GST भुगतान के लिए केंद्र ने राज्यों को दिया ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट’, चिदंबरम ने कहा, ‘बेवकूफ बनाने वाले शब्द’

केंद्र सरकार ने जीएसटी (GST) भुगतान के लिए राज्यों को ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट’ दिया है. पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने इसे ‘कागज के टुकड़ों पर बेवकूफ बनाने वाले’ शब्द करार दिया है.

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  • Publish Date - 5:07 pm, Thu, 10 September 20

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को जीएसटी के भुगतान के लिए ‘आश्वासन पत्र’ (लेटर ऑफ कम्फर्ट) (letter of comfort) दिया है. पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने केंद्र के इस फैसले पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ये सभी आश्वासन के ही शब्द हैं और इसका कोई मतलब नहीं है.

उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरत है हार्ड कैश की. केंद्र सरकार के पास कई तरीके हैं जिसका उपयोग कर वो राज्य को जीएसटी का भुगतान कर सकती है. अगर राज्य सरकारें कर्ज लेती हैं तो इसका सीधा असर उनके कैपिटल एक्सपेंडीचर पर पड़ेगा.

गुरुवार को किए ट्वीट में पी. चिदंबरम ने कहा कि, ‘सरकार का कहना है कि वह राज्यों को जीएसटी मुआवजा के अंतर को पाटने के लिए ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट’ देगी, जिससे वो उधार ले सके. ये सिर्फ कागज के टुकड़े पर बेवकूफ बनाने वाले शब्द हैं, जिनकी कोई कीमत नहीं है.

उन्होंने ट्विट में कहा कि, ‘राज्यों को नकद राशि की जरूरत है. केवल केंद्र सरकार के पास संसाधनों को बढ़ाने और राज्यों को जीएसटी मुआवजे में कमी का भुगतान करने के लिए कई विकल्प और लचीलापन है.’ उन्होंने कहा कि, ‘यदि राज्यों को उधार लेने के लिए मजबूर किया जाता है तो उन राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय पर कुल्हाड़ी निश्चित ही गिर जाएगी, जो पहले से ही कटौती का सामना कर चुके हैं.’

केंद्र की ओर से दिए गए लेटर ऑफ कम्फर्ट यानी आश्वासन पत्र को पंजाब, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्य ठुकरा चुके हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांग की है कि केंद्र सरकार 2,828 करोड़ रुपए तुरंत उपलब्ध कराए जो कि 2020-21 की बकाया राशि है.

वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलनिस्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और मांग की है कि राज्यों को जीएसटी से हुए नुकसान की पूरी भरपाई हो. उन्होंने कहा कि ये जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है. राज्यो से ये कहना कि वो खुद ही कर्ज ले, इससे राज्यों के संसाधनों पर असर पड़ेगा.

जीएसटी के भुगतान को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है. राज्य सरकारें केंद्र से जीएसटी का बकाया जल्द देने की मांग कर रही हैं. दूसरी तरफ केंद्र ने साफ कर दिया है कि उसके पास पर्याप्त धन नहीं है.