CJI को क्लीनचिट मिलने पर बोली पीड़िता, “अब न्याय पाने का कोई चारा नहीं बचा”

शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जूनियर कोर्ट असिस्टेंट है. उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों को एक शपथ-पत्र भेजा था.

नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर कथित यौनाचार के आरोपों पर क्लीन चिट दी गई है. जांच समिति के मुताबिक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं. जांच समिति ने कहा है कि इस मामले में कोई संदिग्धता नजर नहीं आ रही है और कोई सबूत भी नहीं मिले हैं जिससे ये पता चले की आरोप सही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पीडिता ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामले में अब उसके पास न्याय पाने का कोई भी चारा नहीं है. उन्होंने कहा- न्याय प्रक्रिया से मेरा भरोसा उठ रहा है. मैं इस बात से दुखी नहीं हूं कि कोर्ट को मेरी बात के सच होने का कोई सबूत नहीं मिला, बल्कि अपने ही देश की महिला को इंसाफ नहीं दिला पाए, ये बात अधिक पीड़ाजनक है.

याद रहे कि शिकायतकर्ता महिला ने कहा था कि उसे आंतरिक समिति की कार्यवाही पर भरोसा नहीं है और वह भविष्य में इस कार्रवाई पर शामिल नहीं होगी. ऐसे में जस्टिस बोबड़े जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने तय किया कि इस मामले में एक पक्षीय सुनवाई को जारी रखा जाएगा और सीजीआई ने समिति की जांच में सहयोग पर सहमति जता दी.

महिला ने जांच पैनल पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “मुझे लगा कि मुझे इस समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है और इसलिए मैं अब न्यायाधीशों की समिति की कार्यवाही में भाग नहीं ले रही हूं”. महिला ने जांच पैनल में शामिल नहीं होने के लिए कई कारणों का हवाला दिया था–

  • सुनवाई के दौरान घबराहट और भय के बावजूद शिकायतकर्ता महिला को वकील या किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने की अनुमति नहीं दी गई.
  • समिति की कार्यवाही का कोई वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं होना.
  • उसे 26 और 29 अप्रैल 2019 को दर्ज किए गए बयान की एक भी प्रति नहीं दी गई है.
  • इस समिति द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया के बारे में शिकायतकर्ता महिला को सूचित नहीं किया गया था.

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि न्यायमूर्ति रमन्ना CJI रंजन गोगोई के करीबी दोस्त हैं और इसी वजह से मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती. शिकायतकर्ता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व जूनियर कोर्ट असिस्टेंट है. उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों को एक शपथ-पत्र भेजा था. सूत्रों ने बताया कि सेक्रेटरी जनरल इस मामले से संबंधित सारे दस्तावेज और सामग्री के साथ समिति के समक्ष पेश हुये.

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