LAC पर धरती और आसमान दोनों तरफ से घिरा चीन, वायुसेना के त्रिशूल और क्रूज मिसाइल से बढ़ी ड्रैगन की टेंशन

पिछले दस दिन में चीन (China) ने LAC पर जो गुस्ताखी की है. उसे देखते हुए भारत ने अब सुखोई और मिग श्रेणी के विमानों के साथ-साथ मिराज को भी मैदान में उतार दिया है, जिसकी गरज बीजिंग तक पहुंच रही है.

आज हम आपको पूर्वी लद्दाख में ग्राउंड जीरों की स्थिति के बारे में बताएंगे. टीवी9 भारतवर्ष की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आप जानेंगे कि कैसे भारत ने सिर्फ इस सर्दी का नहीं, बल्कि अगली सर्दी तक भी चीन से लड़ने का सरहद पर इंतजाम कर लिया है.

चीन के दूतावास ने अपनी पत्रिका के अगस्त के अंक में एक बार फिर भारत-चीन संबंध को बेहतर बनाने की दुहाई दी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीरें छापी हैं. इन तस्वीरों में अहमदाबाद में दोनों चरखा चलाते और महाबलीपुरम में नारियल पानी पीते दिख रहे हैं. जाहिर है चीन ये दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उसे भारत की मेजबानी याद है और दोनों देशों को फिर उसी दोस्ती की राह पर वापस लौटना चाहिए.

भारत ये चीन को पहले से ही समझाता आ रहा है कि हिंदुस्तान अगर अपने अतिथि का सत्कार कर सकता है, तो असुर का संहार भी कर सकता है. इसलिए चीन को असुर बनने से बचना चाहिए, लेकिन चीन ने कोरोना बांटकर भारत को ही दीन हीन समझ लिया. उसे लगने लगा था कि कारोबार ठप पड़ने से भारत आर्थिक तौर पर कमजोर हो चुका है. वो डिप्टी सुपर पावर चीन से लड़ना नहीं चाहेगा.

मगर अब तक उसकी गलतफहमी दूर हो जानी चाहिए, क्योंकि पिछले दस दिन में चीन ने LAC पर जो गुस्ताखी की है. उसे देखते हुए भारत ने अब सुखोई और मिग श्रेणी के विमानों के साथ-साथ मिराज को भी मैदान में उतार दिया है, जिसकी गरज बीजिंग तक पहुंच रही है.

भारतीय वायुसेना के त्रिशूल- सुखोई, मिग और मिराज

सुखोई, मिग और मिराज, ये हिंद के वो गगनवीर त्रिदेव हैं, जिसके सिर उठाते ही जंग-जंग चिल्लाने वाले चीन का जोश पाताल में पहुंच गया है. ये भारतीय वायुसेना के वो त्रिशूल हैं, जिसके वार की कल्पना मात्र से जिनपिंग का माथा ठनक गया है. हिमालय पर लगातार मार खा रही ड्रैगन आर्मी की जमीन हिल गई है और चीन के पिट्ठू पाकिस्तान की हालत पतली हो गई है.

मतलब भारतीय वायुसेना के फाइटर प्लेन की गर्जना से टू फ्रंट वॉर में हाहाकार मचा है. चीन की सारी चालबाजी LAC पर फ्लॉप हो रही है और जिनपिंग के उकसावे में LoC पर साजिश रच रहे बाजवा की हिम्मत भी जवाब दे रही है.

अप्रैल-मई के महीने में चीन ने धोखे से LAC पर घुसपैठ की, लेकिन 15 जून को गलवान में हमारे पर्वतवीरों ने उनकी गर्दन मरोड़ी, हड्डियां तोड़ी 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया, जिसकी चीन ने कभी कल्पना तक नहीं की थी.

बौखलाया चीन भारत को डराने के लिए पांच दशक पहले हुए युद्ध का हवाला देने लगा और जिस लद्दाख बॉर्डर पर कभी बंदूकें नहीं गरजीं वहां चीन के फाइटर प्लेन उड़ने लगे. परमाणु बम से लैस मिसाइलें दिखने लगीं, जो सैटेलाइट तस्वीरों में बार-बार कैद हो रही हैं.

आसमान का सुपर लड़ाका “सुखोई-30 MKI”

चीन की चालबाजियों का जवाब देने के लिए LAC पर पहले तैनात हुआ सुखोई-30 MKI, जिसे आसमान का सुपर लड़ाका कहा जाता है. इसमें सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम लगा है, जिसकी मदद से ये रात और दिन दोनों समय ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है.

इसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है और ये 3,000 किलोमीटर दूर जाकर दुश्मन को नेस्तनाबूद कर सकता है. इस फाइटर प्लेन में 12 टन तक युद्धक सामग्री लोड की जा सकती है और भारत के पास इस वक्त 200 के करीब सुखोई विमान हैं.

LAC पर तैनात वायुसेना का बाज “मिग-29”

इसके अलावा LAC पर तैनात है मिग-29, जो भारतीय वायुसेना में बाज के नाम से मशहूर है. ये 2000 किमी प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भरने में सक्षम है. मिग-29 की रेंज 1400 किमी है और ये 2100 किलो बम बारूद से हमला कर सकता है. करगिल युद्ध में हिंदुस्तान का ये लड़ाका अपना दमखदम साबित कर चुका है.

इसके अलावा अब बॉर्डर पर रेडी टू फायर मोड में आ गए है मिराज-2000, जो डबल इंजन वाला मैक-2 विमान है. फोर्थ जेनरेशन का ये फाइटर 2336 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है. इतना ही नहीं. ये 13800 किलो गोला बारूद लेकर उड़ान भर सकता है. बता दें कि पीओके में भारतीय वायसेना ने मिराज-2000 से पराक्रम दिखाया था. जैश के सबसे बड़े आतंकी कैंप पर 2000 किलो गोला बारूद गिराया था.

राफेल कर रहे डे नाइट पेट्रोलिंग

LAC पर इस वक्त लड़ाकू विमान जगुआर भी गरज रहे हैं, जिसे इंडियन आर्मी का शमशेर कहा जाता है. इस फाइटर प्लेन की खासियत ये है कि ये दुश्मन के अंदर घुसकर किसी भी जगह हमला कर सकता है.

अब तो भारतीय वायुसेना के पास राफेल है, जिसके नाम से ही भारत के दुश्मन नंबर वन चीन और दुश्मन नंबर टू पाकिस्तान की नींद हराम हो चुकी है. भारत में आने के बाद से एक एक कर पांचों राफेल हिमालय पर डे नाइट पेट्रोलिंग कर रहे हैं, जिसकी गरज से बीजिंग बौखला चुका है.

चीन की सुन जू रणनीति

दरअसल पूर्वी लद्दाख में लगातार मात खाने के बाद चीन की सेना ने रणनीति बदल ली है. चीन की सेना पैंगोंग झील के फिंगर 4 एरिया में लाउडस्पीकर लेकर पहुंची है. चीन की सेना फिंगर 4 एरिया में लाउडस्पीकर पर पंजाबी गाने बजा रही है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कह रही है कि भारतीय सेना अपने राजनीतिक आकाओं के हाथों मूर्ख न बने.

दरअसल चीन की सेना अपनी हजारों साल पुरानी सुन जू रणनीति का घिनौना खेल खेल रही है. सेना को भड़काने और मनोबल तोड़ने का खेल खेल रही है, जो उसने साल 1962 के युद्ध में भी खेला था, लेकिन इस बार सरहद पर चीन का ये प्रोपेगैंडा मजाक बन गया है.

भारत ने हर तरह से PLA पर हमला कर रखा है. भारत की एक क्रूज मिसाइल भी LAC पर तैनात है. भारत की ये मिसाइल इतनी घातक है कि दुनिया इसे हाथों हाथ खरीदना चाहती है और अब इसके सुपर वर्जन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है.

ऑलटाइम फेवरेट ब्रह्मोस मिसाइल

भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्क्वा नदी के नामों से निकला ब्रह्मोस, जो किसी भी वॉरजोन की ऑलटाइम फेवरेट मिसाइल है और इस समय LAC पर चीन का काल बनकर खड़ी है. ब्रह्मोस मिसाइल को अमेरिका के टॉम हॉक मिसाइल से भी खतरनाक माना जाता है. ये उससे डबल स्पीड से वार कर सकती है और इसीलिए ये दुनिया की सबसे एडवांस्ड मिसाइल कही जाती है.

ब्रह्मोस रास्ता बदलकर दुश्मनों पर वार कर सकती है. इसे दागे जाने के बाद अगर टारगेट अपनी जगह से हटने लगे, तो ये अपना रास्ता बदलकर उसका शिकार करती है. इसी बौखलाहट के मारे चीन ने पूरे तिब्बत को वॉर जोन बना दिया.

लद्दाख में चीन बढ़ा रहा तैनाती

लद्दाख में भारतीय जमीन पर आंखें गड़ाए बैठा चीन बहुत तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है. पूर्वी लद्दाख से सटी सीमा पर 50 हजार से ज्यादा चीनी सैनिक खड़े हैं. पैंगोंग क्षेत्र में करीब 10 हजार, लेकिन ब्रह्रोस की तैनाती जब से हिमालय वॉरजोन में हुई है. तब से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस रेडी टू फायर मोड में है.

बतां दें कि भारत और रूस अब ब्रह्मोस के सुपर वर्जन बना रहे हैं. ये नई मिसाइल दुश्मन देश के अवाक्स सिस्टम वाले प्लेन को मार गिराने में कारगर होगी, जो ध्वनि से 6 गुना तेज रफ्तार से उड़ेगी. मतलब दोगुने ताकत से दुश्मनों पर हमला करेगी.

ब्रह्रोस का सुपर वर्जन हवा में दुश्मनों को करेगा ढेर

अभी ब्रह्रोस से दुश्मनों पर जमीन और समंदर में ही टारगेट किया जा सकता है, जबकि ब्रह्रोस का सुपर वर्जन हवा में दुश्मनों को ढेर कर सकता है. नई मिसाइल एक साथ कई निशानों को साधने में सक्षम होगी. स्वदेशी फाइटर प्लेन तेजस को इस मिसाइल के एयर वैरियंट से लैस किया जाएगा.

ब्रह्मोस का नया वैरियंट 2024 तक तैयार हो जाएगा. भारत और रूस पहले से ही इस सुपरसोनिक मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 600 किलोमीटर करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

यानी जब चार साल बाद ब्रह्मोस का नया वैरिएंट दो गुनी ताकत और दोगुने रेंज के साथ लॉन्च होगा, तो चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन सपने में भी भारत से टकराने की हिमाकत नहीं करे पाएंगे.

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