तारीख दर तारीख चीन की गलवान साजिश बेपर्दा, पढ़ें लद्दाख में चली ड्रैगन की हर चाल

अब भारत-चीन सैन्य स्तर की बातचीत में सहमति बन गई है, जिसके बाद  भारत-चीन ने साझा बयान जारी किया है. इस बयान में बताया गया है कि LAC पर और सैनिक न भेजने पर दोनों देश सहमत हुए है.

छठे चरण की सैन्य कमांडर स्तर की बैठक के बाद आखिरकार भारत और चीन दोनों के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को खत्म करने को लेकर सहमति बनते हुए दिख रही है. हालांकि ड्रैगन का कोई भरोसा नहीं है, वो अक्सर अपने दावों से पीछे हटने में परहेज नहीं करता है. आज चीन की गलवान वाली साजिश का रेशा-रेशा अलग करके आपको बता रहे हैं. तारीख दर तारीख चीन की गलवान साजिश को बेपर्दा कर रहे हैं.

साल 2020 की शुरुआत होते ही चीन ने गलवान साजिश की नींव डाल दी थी.

जनवरी से अप्रैल के बीच फिंगर-4 और 5 के बीच सड़क बनाना शुरू कर दिया. इस सड़क को लेकर भारत और चीन के बीच सहमति ये बनी थी कि इसका इस्तेमाल जॉइंट पेट्रोलिंग के लिए होगा. इसके बाद दोनों तरफ से लामबंदी होती रही, लेकिन चार महीने बाद एक तारीख आई और पैंगोंग का माहौल एकदम पलट गया.

5 मई 2020, पेट्रोलिंग पॉइंट 14 का वाय जंक्शन, दोपहर करीब 12 बजे 200-300 के करीब चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की, जिन्हें भारतीय सेना ने रोक दिया, जिसके बाद अगले दिन तक शांति रही.

7 मई 2020- एकाएक कर्नल ली की अगुवाई में 50-60 PLA के जवानों ने धावा बोल दिया. पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के पास बन रहे पुल के काम को रोकने पहुंचे चीनी सैनिकों ने वहां रखी मशीनें तोड़ दीं. टेंट को जला दिया और कंस्ट्रक्शन साइट को काफी नुकसान पहुंचाया. चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख से गलवान में तनाव बढ़ने लगा, जिसे एक महीने बाद बातचीत के जरिए कम करने की कोशिश हुई.

12 जून को भारत-चीन के बीच कमांडर लेवल बातचीत हुई.

13 जून को दोबारा बातचीत हुई, जिसमें तय हुआ कि चीनी सैनिक इस क्षेत्र को खाली करेंगे. यहां तक कर्नल संतोष बाबू ने चीन के कर्नल और जवानों को चॉकलेट, सिगरेट और जूस गिफ्ट किए.

14 जून को कर्नल बाबू कुछ जवानों के साथ स्पॉट पर पहुंचे तो चीन के कमांडर ने जगह खाली करने का भरोसा दिया, लेकिन 14 जून की ही रात गलवान में PLA ने बड़ा खेल खेला. वहां मौजूद कंपनी बटालियन को बदल दिया. पहले से ड्यूटी कर रहे जवानों को हटाकर नए जवानों की तैनाती की और अपनी स्पेशस फोर्स को आगे कर दिया.

15 जून 2020- कर्नल संतोष 3-4 जवानों के साथ ये देखने गए कि चीनी सेना ने टेंट हटाए या नहीं? इसलिए वो खाली हाथ मौके पर गए थे, लेकिन वहां उन्होंने देखा कि PLA ने सारी टीम बदल दी और साढ़े पांच बजे भारतीय सैनिकों के साथ हाथापाई शुरू कर दी. जो देर रात तक चलती रही. ये लड़ाई तीन अलग-अलग इलाकों में चली, जिसमें 16 बिहार रेजिमेंट के जवान और 3 सिख रेजिमेंट के जवानों ने हिस्सा लिया और इस खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए और चीन को भी भारी नुकसान हुआ.

अब भारत-चीन सैन्य स्तर की बातचीत में सहमति बन गई है, जिसके बाद  भारत-चीन ने साझा बयान जारी किया है. इस बयान में बताया गया है कि LAC पर और सैनिक न भेजने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. भारत-चीन के बीच 7वें दौर की बातचीत पर भी दोनों देश सहमत हुए हैं.

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