जासूसी नेटवर्क: चीनी महिला से पूछताछ में खुलासे, फॉर्मेसी होलसेलर्स को भी भेजी गई मोटी रक़म

स्पेशल सेल (Special Cell) ये भी जानने की कोशिश कर रही है कि किंग शी ने दवाई होल सेलर को जो पेमेंट किया है, क्या वाकई उसकी एवज में दवाई खरीदी गई थी या फिर ये पेमेंट हवाला रैकेट का हिस्सा था.

चीन के जासूसी कांड के मामले में नए खुलासे हो रहे हैं. स्पेशल सेल मामले में अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए हवाला कारोबारियों पर शिकंजा कस रही है. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि किंग शी की दोनों शैल कंपनी से हवाला के जरिये मोटी रकम स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा (Rajiv Sharma) को जा रही थी.

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि चीनी नागरिक किंग शी भगीरथ पैलेस के कुछ दवाई होलसेलर के संपर्क में थी, जिनसे वो अपनी फार्मेसी कंपनी के लिए दवाई खरीदती थी. किंग शी के ऑफिस से उसकी कंपनी के इन होल सेलर से कनेक्शन के दस्तावेज मिले हैं, जिनसे पूछताछ की जानी है. स्पेशल सेल ये भी जानने की कोशिश कर रही है कि किंग शी ने इन दवाई होल सेलर को जो पेमेंट किया है, क्या वाकई उसकी एवज में दवाई खरीदी गई थी या फिर ये पेमेंट भी उसी हवाला ट्रांजेक्शन का महज़ एक हिस्सा था.

राजीव शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, जिस पर आरोप है कि वो गोपनीय जानकारी साझा करने में शामिल थे. वो ग्लोबल टाइम्स के लिए भी आर्टिकल लिखता रहा है. राजीव शर्मा के संपर्क में रहने वाले कुछ सरकारी कर्मचारी और प्राइवेट पर्सन से भी सेल जल्द पूछताछ करने की योजना बना रही है.

स्पेशल सेल ने शनिवार को राजधानी दिल्ली के इलाके से एक चीनी महिला और उसके एक सहयोगी का गिरफ्तार किया था. महिला की पहचान किंग शी के रूप में हुई थी. वहीं दिल्ली पुलिस ने 61 साल के वरिष्ठ पत्रकार राजीव शर्मा को उनके पीतमपुरा के घर से 14 सितंबर को गिरफ्तार किया था.

राजीव शर्मा पर लगे हैं ये आरोप

आरोप है कि राजीव शर्मा चीन के इंटेलीजेंस अफसरों को भारतीय सेना और रक्षा से जुड़े दस्तावेज भेज रहे थे और इसके बदले उन्हें वहां से काफी पैसा आ रहा था. उनके घर से रक्षा से जुड़े कई खुफिया दस्तावेज बरामद हुए हैं. राजीव करीब 40 साल से पत्रकारिता में हैं. देश के बड़े-बड़े अखबारों, न्यूज एजेंसियों के लिए काम कर चुके हैं, लेकिन 2010 से वो स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे थे और उनके पास पीआईबी कार्ड भी था.

सेल कंपनी के जरिए ही राजीव को अब तक चीन से 30 लाख रुपये से ज्यादा का पेमेंट आ चुका है. हालांकि, इन दोनों कंपनियों के असली मालिक एक चीनी दंपत्ति है, जो चीन में हैं और सूरज और उषा नाम से कंपनी चलाते हैं.

ग्लोबल टाइम्स से लेकर दलाई लामा तक…

  • राजीव 2010 से 2014 तक चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के लिए लिखते थे.
  • उनके लेख देखकर एक चीनी खुफिया एजेंसी के अफसर माइकल ने उनसे लिंकडिन अकॉउंट के जरिए उनसे संपर्क किया.
  • उन्हें चीन बुलाया गया और भारत-चीन रिश्तों के कई पहलुओं से जुड़ी जानकारी ली गई.
  • उनसे भूटान, सिक्किम और सिक्किम के ट्राई जंक्शन, डोकलाम, भारत-म्यांमार के रिश्तों और भारत-चीन सीमा पर सेना की तैनाती से जुड़ी जानकारी ली गई.
  • राजीव की माइकल के साथ मुलाकात मालदीव और दूसरे देशों में हुई.
  • 2019 में राजीव की मुलाकात चीन के एक दूसरे खुफिया अफसर जॉर्ज से चीन में हुई.
  • जॉर्ज ने राजीव से दलाई लामा से जुड़ी जानकारी देने और उनके बारे में लिखने के लिए कहा.

हवाला के जरिए पहुंच रहा था पैसा

जॉर्ज ने खुद को चीन की एक मीडिया कंपनी का जनरल मैनेजर बताया और राजीव से कहा अगर वो ये काम करेंगे, तो उनके लिए महिपालपुर की एक कंपनी के जरिए एक जानकारी या लेख के लिए 500 यूएस डॉलर से ज्यादा पैसा पहुंच जाएगा. राजीव को 10 किश्तों में हवाला और सेल कंपनी के जरिए पिछले एक साल में 30 लाख से ज्यादा रुपया पहुंचा दिए गए.

भारतीय सेना से जुड़े कई दस्तावेज भी मिले

इस पूरे जासूसी कांड को अंजाम देने के लिए किंग शी ने महिपालपुर में एमजेड फार्मेसी अपना ऑफिस बनाया हुआ था, जिसमें किंग शी के साथ शेर सिंह भी इस कंपनी में डायरेक्टर था. किंग शी रोज सुबह अपने इसी ऑफिस में आती थी. इस ऑफिस से भी कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स स्पेशल सेल ने सीज किए हैं. भारतीय सेना से जुड़े कई दस्तावेज भी यहां से मिले हैं. राजीव शर्मा ने कई बार इसी ऑफिस में किंग शी से मुलाकात की थी.

शेल कंपनियों की जांच के लिए ED को पत्र

पुलिस के मुताबिक, जो चीनी महिला किंग शी पकड़ी गई है, उसने जामिया में एक कोर्स में एडमिशन लिया था, लेकिन उसका असली काम भारतीय सेना की जासूसी करना था. अब स्पेशल सेल और जांच एजेंसियां इस जासूसी नेक्सस के बाकी लोगों की तलाश में जुटी है. साथ ही स्पेशल सेल ने किंग शी, राजीव शर्मा और शेर सिंह के तमाम इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स को कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक रेस्पांस टीम को भेज दिया है, ताकि इनसे डिलीट किए गए डाटा को वापस हासिल किया जा सके. वहीं इस जासूसी कांड में इस्तेमाल होने वाली सभी शेल कंपनियों की तफ्तीश के लिए दिल्ली पुलिस ने ED को भी चिट्ठी लिखी है.

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