मानवीयता के विरुद्ध है CAA का विरोध : डॉ. भागी

सीएए के द्वारा गरीबों और वंचितों को न्याय मिलेगा, जो भारत का विभाजन होने के कारण कष्ट सह रहे हैं: डॉ. भागी
citizenship amendment act, मानवीयता के विरुद्ध है CAA का विरोध : डॉ. भागी

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य डॉ.ए के भागी के मुताबिक, ‘करीब 6 दशक तक देश की सत्ता काबिज रही कांग्रेस के बयान भारत के पड़ोसी देशों में यातना का शिकार हुए लोगों को लेकर हमेशा से ही मानवीय नहीं राजनीतिक रहे हैं. देश में कांग्रेस के शासन काल में सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी हमेशा ही देशवासियों ने महसूस की है. इससे अलग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने लंबे समय से चली आ रही विवादित, सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के लिए ऐसी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है, जो अनुकरणीय है.’

कांग्रेस की ओर से भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2004 में राज्यसभा में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थन में बयान भी दिया था, लेकिन फिर भी किया कुछ नहीं. कारण वहीं कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी था. बात चाहे एफडीआई की हो, जीएसटी हो, या कोई अन्य मुद्दा, कुछ न हो पाने का कारण केवल कांग्रेस सरकार की इच्छाशक्ति की कमी ही थी.

लेकिन अब कांग्रेस इस बात को पचा नहीं पा रही है कि मोदी सरकार अपने वादों को हकीकत में बदलने की कोशिश कर रही है. इसलिए सरकार के निर्णयों का राजनीतिक विरोध करने के बजाय अफवाहें फैलाई जा रही हैं और सीएए और एनआरसी के बारे में झूठ बोला जा रहा है. वो सब बताया जा रहा है जो इस समय मौजूद ही नहीं है. मोदी सरकार अपने वादे पूरे कर सके या ना कर सके, लेकिन वादे करके भूल नहीं जाती. वह जो वादे करते है, उसे पूरे करने का प्रयास भी करती है.

डॉ.ए के भागी ने कहा, ‘मैं सीएए का समर्थन करता हूं क्योंकि इससे उन हिंदुओं, सिखों, पारसियों, ईसाइयों और बौद्धों को न्याय और सम्मान मिला है जो विभाजन के समय पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में ही रह गए थे. वे इसलिए वहां रहे कि उन्हें भारत (कांग्रेस) के नेताओं और पाकिस्तान (मुस्लिम लीग) के नेताओं ने गारंटी दी थी कि उनकी पूर्ण सुरक्षा की जाएगी. उनके धर्म ही नहीं, बल्कि उनके सभी अधिकारों की रक्षा की जाएगी. तीनों पड़ोसी इस्लामी देशों ने अपना वादा नहीं निभाया और इन अल्पसंख्यकों को भारत में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. ये लाखों लोग वर्षों से भारत में रह रहे हैं. उन्हें वे मूल अधिकार भी प्राप्त नहीं है जो भारतीय नागरिकों को दिए जाते हैं.’

अब इस अधिनियम के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में आ चुके लोगों को नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक रास्ता दिया गया है. सीएए के द्वारा गरीबों और वंचितों को न्याय मिलेगा, जो भारत का विभाजन होने के कारण कष्ट सह रहे हैं.  भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ, ताकि एक साथ दो प्रधानमंत्री बनाने के सपने को साकार किया जा सके. भारत में रहने वाले मुसलमान सीएए से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हैं बल्कि उन्हें बांहे फैलाकर इन लोगों का स्वागत करना चाहिए, ताकि ऐसा लगे कि एक अल्पसंख्यक दूसरे अल्पसंख्यकों के दर्द को समझता है.

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