आखिर क्या है नागरिकता संशोधन बिल? जानें, क्यों मचा है हल्ला

Share this on WhatsAppनयी दिल्ली नागरिकता संशोधन बिल ने पूरे देश में हड़कंप मचाया हुआ है. इसका खास असर पूर्वोत्तर के राज्यों में दिखा, जहां भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल मोर्चा खोले हुए हैं. असम के लोग बिल के विरोध में सड़क पर हैं, जिससे सर्वानंद सोनोवाल की अगुवाई वाली भाजपा सरकार गिरने का […]

नयी दिल्ली

नागरिकता संशोधन बिल ने पूरे देश में हड़कंप मचाया हुआ है. इसका खास असर पूर्वोत्तर के राज्यों में दिखा, जहां भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल मोर्चा खोले हुए हैं. असम के लोग बिल के विरोध में सड़क पर हैं, जिससे सर्वानंद सोनोवाल की अगुवाई वाली भाजपा सरकार गिरने का खतरा मंडरा रहा है. आइए जानते हैं इस बिल के बारे में…

 

नागरिकता संशोधन बिल

यह बिल नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है. इस संशोधन के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों (हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारत में लगातार 12 साल के बजाय सिर्फ 6 साल बिताने पर भारत की नागरिकता बिना आवश्यक दस्तावेजों के मिल जाएगी. इस बिल को लोकसभा में 15 जुलाई 2016 में पेश किया गया था. इसके बाद यह बिल जॉइंट पार्लियामेंट्री समिति के पास भेजा गया और यह लोकसभा में 8 जनवरी 2019 को पास करा दिया गया. यह गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों में आए प्रवासियों को भी राहत पहुंचाएगा.

 

विरोध क्यों?

नागरिकता संशोधन बिल को असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में ज्यादा विरोध झेलना पड़ा है. लोग इसका यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि इसके कारण असम को अवैध प्रवासियों का ज्यादा दबाव झेलना पड़ेगा. बिल को इसलिए भी विरोध झेलना पड़ रहा है क्योंकि इसमें नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के मुसलमान अल्पसंख्यकों को नहीं डाला गया है. पाकिस्तान में प्रताड़ना झेल रहे अहमदिया मुसलमानों को भी इस बिल में जगह नहीं मिली है. असम के लोगों को यह दर भी सता रहा है कि कहीं वो ही इस बिल की वजह से अल्पसंख्यक ना हो जाएँ.

 

इन्होंने खोला मोर्चा

असम गण परिषद (एजीपी) ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ दिया है. रिपोर्टों की मानें तो बोडो पीपल्स फ्रंट भी बीजेपी से समर्थन वापस लेने का मन बना रही है.

 

केंद्र का रुख

केंद्र सरकार का कहना है कि यह उन प्रवासियों के लिए है जो पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं से भारत में आए और यहां बस गए. प्रवासियों के इस भार को पूरा देश सहेगा और केंद्र इसमें सभी राज्य सरकारों की मदद करेगी.

 

भाजपा का चुनावी दांव?

ऐसा माना जा रहा है कि इस बिल से सबसे ज्यादा फायदा बंगाली हिन्दू रिफ्यूजियों को होगा. इसका चुनावी फायदा भाजपा को बंगाल समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी मिलेगा. साथ ही असमियों में फैली नाराजगी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके जरिये वहां के 6 समुदायों को ट्राइबल का दर्जा मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है. यह 6 समुदाय राज्य में अच्छी जनसंख्या में हैं और इनको अच्छे वोट बैंक के रूप में देखा जा सकता है.

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