नागरिकता संशोधन विधेयक पर भड़के ओवैसी, कहा,”कोई दादा का बर्थ सर्टिफिकेट मांगे तो कहां से लाएंगे आप?”

नागरिकता संशोधन विधेयक जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को मंजूरी दे दी है. अब उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह तक इस विधेयक को संसद में पेश कर दिया जाएगा. संसद में यह बिल जब पेश होगा तब कितना होगा यह तो बाद में साफ होगा, मगर बिल के पेश होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से बयानबाजी अपने चरम पर है.

इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को संसद के शीतकालीन सत्र में एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन औवेसी ने इस बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.

औवेसी ने सरकार से पूछा, “आप धर्म के नाम पर कानून बनाने जा रहे हैं वो क्या है? क्या वो संविधान के खिलाफ नहीं है? सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि कोई सरकार संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर को हाथ नहीं लगा सकती है और आप हाथ नहीं बल्कि उसके खिलाफ जा रहे हैं. आप देश को धर्म के नाम पर बांट रहे हैं.

वहीं ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय को इस विधेयक से बाहर रखने पर बोला, “एनआरसी में अगर किसी का नाम नहीं आएगा तो उसको नागरिकता संशोधन कानून में सिटिजनशिप मिल जाएगी, लेकिन मुसलमान को डिटेंशन सेंटर में डाल देंगे और उसे फिर फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में केस लड़ना पड़ेगा”.

“असम में 19 लाख में करीब 7 लाख गैर मुस्लिम हैं उनके खिलाफ केस खत्म हो जाएगा और केस किसके खिलाफ चलेगा ? सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ. आप मुसलमानों को देश में स्टेटलेस बनाना चाहते हैं. जिन्ना की थ्योरी को आप रिवाईव कर रहे हैं. जो की संविधान के खिलाफ है.सरकार चालाकी से एक साजिश के तहत पहले नागरिकता कानून ला रही है और फिर एनआरसी लाएगी. अब कोई दादा का बर्थ सर्टिफिकेट मांगे तो आप कहां से लाओगे?”

इतना ही नहीं ओवैसी ने जीएसटी और अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा, कहा, “आपके पास राज्यों को देने के लिए जीसटी का पैसा नहीं है और आप करोड़ों खर्च करके एनआरसी लाओगे ? नौकरी देने के लिए नहीं है, बैंक डूब रहे हैं, आर्थिक हालात खराब हैं और आप एनआरसी लाएंगे ?

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता संशोधन विधेयक जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. इस बिल में मुस्लिम समुदाय के लिए नागरिकता देने की बात नहीं कही गई है.

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