नागरिकता संशोधन बिल: समझिए राज्यसभा का पूरा गणित

वैसे तो राज्यसभा में 245 सीटें हैं, हालांकि मौजूदा सांसदों की संख्या 240 ही है क्योंकि पांच सीटें खाली हैं. इसलिए राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 121 का होता है.
Citizenship Amendment Bill, नागरिकता संशोधन बिल: समझिए राज्यसभा का पूरा गणित

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला बिल लोकसभा में पास हो चुका है. सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात 12 बजकर 4 मिनट पर लोकसभा में यह बिल 80 के मुकाबले 311 वोटों से पास हो गया. इस दौरान कुछ गैर-एनडीए दलों ने भी मतदान के दौरन बिल के पक्ष में वोटिंग की, लेकिन इस बिल पर मोदी सरकार की असली परीक्षा राज्यसभा में है.

नागरिकता संशोधन बिल को संसद के ऊपरी सदन में बुधवार को पेश किया जाएगा. लोकसभा की तरह यहां NDA के पास बहुमत तो नहीं है, लेकिन फिर भी यह लग रहा है कि मोदी सरकार इसको राज्यसभा से भी पास करवाने में कामयाब हो जाएगी. ठीक वैसे ही जैसे 370 हटाने और तीन तलाक से जुड़े विधेयक को राज्यसभा से पास करवाने में सफल रही थी, लेकिन बिना बहुमत के कैसे संभव होगा ये? आइए समझते है कि क्या है राज्यसभा का गणित?

राज्यसभा में NDA का समीकरण

Citizenship Amendment Bill, नागरिकता संशोधन बिल: समझिए राज्यसभा का पूरा गणित

NDA की सबसे बड़ी पार्टी BJP के राज्यसभा में 83 सांसद हैं. वहीं JDU के 6, शिरोमणि अकाली दल के 3, रामदास अठावले वाली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का 1 जबकि अन्य दलों के 13 सदस्य हैं. इस तरह NDA के राज्यसभा में 106 सांसद हैं.

ऊपरी सदन में UPA का समीकरण

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उधर विपक्षी पार्टियों के गठबंधन UPA में कांग्रेस के सबसे ज्यादा 46 सांसद हैं. वहीं DMK के 5, NCP और RJD के 4-4 सांसद हैं. इनके अलावा अन्य UPA सहयोगियों के 3 सांसद हैं. यानि UPA के पास कुल 62 राज्यसभा सांसद हैं.

जो न NDA में हैं, न UPA में

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कुछ पार्टियां ऐसी भी हैं जो न NDA में शामिल हैं और न ही UPA में. मुद्दों और समय के हिसाब से ये दल अपना फैसला करते रहते हैं. जैसे TMC जिसके 13 सांसद हैं. उसके अलावा SP के 9, TRS के 6, CPM के 5, BSP के 4 और AAP के 3 सांसद हैं. इनके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की PDP के 2, CPI का एक और JDS का भी एक सांसद है. इन्हें मिलाकर 44 सांसदों का आंकड़ा होता है. मौजूदा सियासत देखते हुए इनका सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल का विरोध करना तय है.

वो दल जो बिल को समर्थन दे सकते हैं

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NDA या UPA दोनों में किसी का हिस्सा नहीं होने वाली कुछ और भी पार्टियां हैं जो बिल को अपना समर्थन दे सकते हैं. इनमें AIADMK के 11, BJD के 7, YSR कांग्रेस पार्टी के 2 और TDP के 2 सांसद शामिल हैं. हाल ही में बीजेपी से नाता तोड़ चुकी शिवसेना के 3 सांसद हैं जो नागरिकता विधेयक के पक्ष में वोटिंग करेंगे. पार्टी ने लोकसभा में भी बिल का समर्थन किया है. साथ ही 3 और सांसद समर्थन दे सकते है. इन सबको मिला दिया जाए तो कुल आंकड़ा 28 सांसदों तक पहुंचता है.

12 नामित सांसदों के वोट काफी अहम

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इस स्थिति में जहां एक-एक वोट कीमती है. राज्यसभा के 12 नामित सदस्यों का मत काफी अहम होगा. इनमें से 8 सांसद BJP में आ गए हैं. 12 से 11 NDA के पक्ष में जबकि बाकी 1 सांसद यूपीए के पक्ष में वोटिंग कर सकते हैं.

तो कौन किस पर पड़ेगा भारी

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अब पूरा हिसाब लगाते हैं. सारे आंकड़ों को जोड़ें तो NDA के 106 सांसदों के साथ बिल के समर्थन में आने वाले कुल सांसदों का आंकड़ा 137 तक पहुंच जाता है. उधर UPA के 62 के अलावा गैर यूपीए विरोधियों की संख्या और एक नामित सदस्य को मिलाकर कुल संख्या 107 होती है. वैसे तो राज्यसभा में 245 सीटें हैं, हालांकि मौजूदा सांसदों की संख्या 240 ही है क्योंकि पांच सीटें खाली हैं. इसलिए राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 121 का होता है. तो पिक्चर साफ है. बहुमत चाहे न हो लेकिन 370 हटाने और तीन तलाक से जुड़े विधेयक की तरह ही राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल की परीक्षा में भी मोदी सरकार अच्छे नंबरों से पास हो जाएगी.

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