‘न्यायपालिका को अस्थिर करने की कोशिश’, इमोशनल हुए CJI गोगोई ने कहा

सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायक के तौर पर काम करने वाली एक 35 वर्षीय महिला ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के 22 जजों को ख़त लिखकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायक के तौर पर काम करने वाली एक 35 वर्षीय महिला द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोप पर सुनवाई के दौरान शनिवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि शिकायत करने वाली महिला क्रिमिनल बैकग्राउंड की है.

इमोशनल होते हुए सीजेआई ने कहा कि जब महिला ने सर्विस ज्वॉइन किया तब भी इसके ऊपर मामला दर्ज था. इतना ही नहीं महिला के पति पर भी दो मामले दर्ज़ हैं.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने इस पर फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया है और मीडिया को न्यायपालिक की स्वतंत्रता के लिए संयम दिखाने को कहा है. बता दें कि महिला की शिकायत पर सीजेआई रंजन गोगई, जस्टिस अरुण मिश्र, संजीव खन्ना की बेंच के सामने सुनवाई चल रही है.

प्रधान न्यायाधीश गोगोई पर कथित रूप से यौन उत्पीड़न के आरोप लगने की मीडिया रिपोर्ट्स के बाद सार्वजनिक महत्व के एक मामले की तत्काल सुनवाई के दौरान कहा उन्होंने कहा, “जब तक मेरा कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता, मैं इस पीठ में बैठूंगा और बिना डरे और निष्पक्षता के साथ अपना कर्तव्य निभाऊंगा.”

न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, “चीजें बहुत दूर चली गई हैं. न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.”

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश है, जो कि अब तक स्वतंत्र बना हुआ है.

उन्होंने साथ ही कहा कि उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली और आपराधिक रिकॉर्ड वाली महिला के पीछे बहुत बड़ी ताकत है.

सीजेआई मे पूरे मामले में दुख व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैं इन आरोपों का जवाब नहीं देना चाहता हूं’.

सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका खतरे में है. अगले हफ्ते कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होनी है, इसीलिये जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए गए. सीजेआई ने कहा कि क्या चीफ जस्टिस के 20 सालों के कार्यकाल का यह ईनाम है? 20 सालों की सेवा के बाद मेरे खाते में सिर्फ  6,80,000 रुपये हैं. कोई भी मेरा खाता चेक कर सकता है. यहां तक कि मेरे चपरासी के पास भी मुझसे ज्यादा पैसे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 20 सालों मे ऐसा कभी नहीं हुआ. मैने जीवन भर सिर्फ इज़्जत कमाई है, इज़्जत से बड़ी कोई चीज़ नहीं होती. अब इस मामले में मेरे साथी जज ऑर्डर पास करेंगे. इस केस में मेरी विशेष ज़िम्मेदारी बनती है इसलिए मैने स्पेशल बेंच का गठन किया है.

वहीं अटार्नी जनरल ने सीजेआई का पक्ष लेते हुए कहा कि यह एक ब्लैकमेल टैक्टिस हो सकता है. न्यायपालिका को इस तरह से टारगेट नही किया जा सकता है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायक के तौर पर काम करने वाली एक 35 वर्षीय महिला ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के 22 जजों को ख़त लिखकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.