CJI रंजन गोगोई ने CBI को दी इजाजत- हाई कोर्ट के सिटिंग जज पर दर्ज करो FIR, पहली बार हुआ ऐसा

पिछले महीने CJI गोगोई ने पीएम नरेंद्र मोदी को संसद में जस्टिस शुक्‍ला को हटाने का प्रस्‍ताव लाने के लिए चिट्ठी लिखी थी.

नई दिल्‍ली: भारत के प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने CBI को इलाहाबाद हाई कोर्ट के सिटिंग जज के खिलाफ FIR दर्ज करने की अनुमति दे दी है. CBI निदेशक ने CJI को चिट्ठी लिख जस्टिस एसएन शुक्‍ला पर लगे आरोपों की जांच करने की इजाजत मांगी थी. भारतीय न्‍यायपालिका के इतिहास में पहली बार CJI ने सिटिंग हाई कोर्ट जज के खिलाफ जांच को हरी झंडी दी है.

CBI प्रिवेंशन ऑफ करप्‍शन एक्‍ट के तहत केस दर्ज करेगी. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, CBI निदेशक ने CJI को लिखा था कि तत्‍कालीन CJI (दीपक मिश्रा) के संज्ञान में मामला लाए जाने के बाद उन्‍हीं की सलाह पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस श्री नारायण शुक्‍ला के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज की गई थी.

करीब 30 साल पहले हुआ था प्रक्रिया में बदलाव

25 जुलाई, 1991 को के. वीरास्‍वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्‍यवस्‍था दी थी. सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सिटिंग जज के खिलाफ FIR दर्ज करने से पहले किसी जांच एजंसी को CJI को सबूत दिखाने होंगे और जांच की अनुमति लेनी होगी. 1991 से पहले ऐसा हुआ भी नहीं था कि किसी एजंसी ने सिटिंग हाई कोर्ट जज के खिलाफ जांच की हो. यह पहली बार हुआ है जब CJI ने किसी जांच एजंसी को सिटिंग जज के खिलाफ FIR की इजाजत दी हो.

क्‍या है मामला?

जस्टिस एसएन शुक्‍ला पर MBBS में दाखिल के लिए एक निजी मेडिकल कॉलेज को कथित रूप से फायदा पहुंचाने का आरोप है. सितंबर 2017 में यूपी के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह की शिकायत पर CJI मिश्रा ने एक पैनल बनाकर जांच को कहा था. जस्टिस शुक्‍ला पर आरोप है कि उन्‍होंने एक सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर के खिलाफ स्‍टूडेंट्स के एडमिशन की डेडलाइन आगे बढ़ाकर निजी कॉलेज को राहत दी.

पिछले महीने CJI गोगोई ने पीएम नरेंद्र मोदी को संसद में जस्टिस शुक्‍ला को हटाने का प्रस्‍ताव लाने के लिए चिट्ठी लिखी थी. 19 महीने पहले CJI मिश्रा ने भी इन-हाउस इंक्‍वॉयरी के बाद संसद के जरिए जस्टिस शुक्‍ला को हटाने की सिफारिश की थी. इन-हाउस इंक्‍वॉयरी में जज को गंभीर न्‍यायिक अनियमितताओं का दोषी पाया गया था.

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