CJI रंजन गोगोई पर कथित यौन शोषण का आरोप, 11 अक्‍टूबर की घटना पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

एक महिला ने 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट जजों को चिट्ठी लिख सीजेआई रंजन गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई पर एक महिला ने कथित यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. दोनों पक्षों की तरफ से अब तक जो भी कहा गया है, उनमें दो बातें एक जैसी हैं. पहली कथित घटना की तारीख यानी 11 अक्‍टूबर और दूसरी, जगह यानी सीजेआई का आधिकारिक निवास. जूनियर असिस्‍टेंट रही जिस महिला ने आरोप लगाए हैं, वह 27 अगस्‍त 2018 तक सीजेआई के आवास पर तैनात थी. जस्टिस रंजन गोगोई ने 3 अक्‍टूबर को सीजेआई का पदभार संभाला था. महिला का दावा है कि 11 अक्‍टूबर को उसका यौन शोषण हुआ.

दूसरी तरफ, आधिकारिक आवासीय कार्यालय पर तैनात सीजेआई के सचिवालय ने 12 अक्‍टूबर को सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को पत्र लिखा. इसमें महिला पर सीजेआई को अनचाहे संदेश भेजने का आरोप लगाते हुए सीजेआई के आवासीय कार्यालय से उसे सुप्रीम कोर्ट वापस भेजे जाने को कहा गया था. 10 दिन बाद, महिला को सुप्रीम कोर्ट के रिसर्च एंड प्‍लानिंग सेंटर में वापस भेज दिया गया, इसके बाद उन्‍हें प्रशासन (खरीद) विभाग में तैनात किया गया. हालांकि महिला ने नई भूमिका स्‍वीकारने से इनकार कर दिया और कर्मचारी यूनियन को साथ लेकर विरोध तेज कर दिया. विभागीय जांच के बाद, 21 दिसंबर को महिला को सेवा से बर्खास्‍त कर दिया गया.

19 अप्रैल को महिला ने सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को एक हलफनामे के रूप में चिट्ठी लिखी. इसमें उन्‍होंने अपना अनुभव विस्‍तार से बताया था और वरिष्‍ठ सेनानिवृत्‍त जजों की एक विशेष जांच समिति बनाए जाने की मांग की थी. महिला ने अपने हलफनामे में कहा है, “मैं सीजेआई के यौन प्रस्‍तावों के विरोध और इनकार की पीड़ा भोगती रही हूं. मेरे पूरे परिवार को परेशान किया गया.” महिला के पति और देवर दिल्‍ली पुलिस में काम करते हैं और पिछले साल दिसंबर में, दोनों को सस्‍पेंड कर दिया गया था. महिला का आरोप है कि छोटे देवर को भी सुप्रीम कोर्ट में एक अस्‍थायी नियुक्ति से बर्खास्‍त किया गया.

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई के कार्यालय ने यह बात रिकॉर्ड में रखी है कि महिला के पति ने भी 11 अक्‍टूबर के बाद अपना निलंबन वापस लिए जाने के लिए मेसेज करना शुरू कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में महिला और उसके परिवार के सदस्‍यों के खिलाफ दर्ज पांच आपराधिक मामलों का जिक्र किया था. महिला दो दिन पुलिस कस्‍टडी में भी रही है.

सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने कहा है, “वह कुछ समय के लिए ही सीजेआई के घर वाले ऑफिस पर तैनात थी और उसका काम ऐसा था कि सीजेआई से आमना-सामना होना ही नहीं था. जब उसकी सेवाएं खत्‍म की गईं, तब भी उसने इस तरह की कोई शिकायत नहीं की थी.”