CJI यौन शोषण केस: अटॅार्नी जनरल ने की थी जांच समिति में बाहरी सदस्य को शामिल करने की मांग

केंद्र ने AG पर दवाब डाला था कि वह अपने लेटर को व्यक्तिगत घोषित करें और साफ करें कि इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है.

नई दिल्ली: CJI रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) के खिलाफ कथित यौन शोषण (Sexual harassment case) के आरोपों की जांच के मामले में अटॉर्नी जनरल (AG) केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) और केंद्र सरकार के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले पर केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक लेटर लिखा था.

इस लेटर में उन्होंने लिखा था कि महिला के आरोपों पर सुनवाई करने वाली किसी भी कमेटी में बाहरी सदस्य होने ही चाहिए. उन्होंने कहा था कि इन बाहरी सदस्यों में रिटायर्ड महिला जजों को वरीयता देनी चाहिए.

केके वेणुगोपाल के लेटर को लेकर केंद्र ने असहमति भी जताई थी और अटॉर्नी जनरल पर दबाव डाला था कि वह इस लेटर को व्यक्तिगत करें और कहें कि इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है. इसके बाद उन्होंने जजों को एक और लेटर लिखकर यह सफाई दी कि पिछले लेटर में लिखी गई बातें उनके निजी विचार थे.

तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी

शिकायतकर्ता द्वारा आरोप के संदर्भ में शीर्ष अदालत के 22 न्यायाधीशों को पत्र लिखने के बाद, न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे (S.A. Bobde) की अगुवाई में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी (Indira Banerjee) और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा (Indu Melhotra) की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी. समिति में शुरुआत में न्यायमूर्ति एन.वी. रमन्ना शामिल थे, जिन्होंने गुरुवार को शिकायतकर्ता द्वारा उनके समिति में शामिल होने पर सवाल उठाने के बाद खुद को समिति से अगल कर लिया था.

पूर्व जूनियर कोर्ट असिस्टेंट है शिकायतकर्ता

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि न्यायमूर्ति रमन्ना CJI रंजन गोगोई के करीबी दोस्त हैं और इसी वजह से मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती. शिकायतकर्ता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व जूनियर कोर्ट असिस्टेंट है. उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों को एक शपथ-पत्र भेजा था. सूत्रों ने बताया कि सेक्रेटरी जनरल इस मामले से संबंधित सारे दस्तावेज और सामग्री के साथ समिति के समक्ष पेश हुये.

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