पंजाब: नए कृषि कानूनों को बेअसर करने के लिए CM अमरिंदर ने बनाई ये योजना

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) की अध्यक्षता में कैबिनेट का निर्णय पंजाब को आधिकारिक रूप से कृषि कानून को खारिज करने वाला पहला राज्य बनाता है.

Amrinder Singh
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह

पंजाब सरकार ने केंद्र के कृषि कानून (Farm Law) को खारिज करने का फैसला किया है, जिसने पंजाब और पड़ोसी हरियाणा में तूफान खड़ा कर रखा है. 19 अक्टूबर को इसके लिए एक विशेष विधानसभा सत्र का आयोजन किया जाएगा. राज्य मंत्रिमंडल ने आज यह संकल्प लिया. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) की अध्यक्षता में कैबिनेट का निर्णय पंजाब को आधिकारिक रूप से कृषि कानून को खारिज करने वाला पहला राज्य बनाता है.

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28 अगस्त को समाप्त हुए विधानसभा सत्र के दौरान, इस आशय का एक प्रस्ताव पारित किया गया था. उम्मीद जताई जा रही है कि कैबिनेट के इस कदम को भारी समर्थन मिलेगा, क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी शिकोमणि अकाली दल दोनों ही केंद्र के कृष कानून के खिलाफ हैं.

सत्ता में आने के बाद कानून रद्द करने का वादा

कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में आने के बाद इन कानूनों को रद्द करने का वादा किया है. राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नए कानूनों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात कही. वहीं अकाली दल जिसने शुरू में इस कानून का समर्थन किया था, ने पिछले महीने किसानों के दबाव में यूटर्न ले लिया. इतना ही नहीं उसने एनडीए गठबंधन से भी खुद को अलग कर लिया.

केंद्र लाई तीन नए कानून

किसानों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने पिछले महीने तीन नए कृषि कानून बनाए. विपक्षी दल का कहना है कि यह कानून किसानों को कमजोर करने वाला है. इस कानून के जरिए वह कॉर्पोरेट के गुलाम बन जाएंगे. वहीं किसान संगठनों को डर है कि सरकार कहीं MSP न बंद कर दे.

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इस कानून का सबसे ज्यादा विरोध कृषि प्रधान राज्य पंजाब में देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 4 अक्टूबर को कहा था कि हम कृषि कानून के खिलाफ लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे. जब तक किसानों को लिखित में MSP की गारंटी नहीं मिल जाती वह इस कानून का तब तक विरोध करेंगे.

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