फर्जी भर्ती मामला: SIT की रिपोर्ट के बाद सीएम योगी ने ऑफिसरों को किया सस्पेंड

ये भर्तियां सपा सरकार के शासन काल (2012-13) में हुईं थी. योगी सरकार बनते ही इस पर एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए गए थे. एसआईटी ने जांच रिपोर्ट भेज दी थी जिसके बाद ये कार्रवाई की गई.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान पशुपालन विभाग में हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सामने आने पर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए पशुपालन विभाग के अपर निदेशक सहित छह अफसरों को रविवार को निलंबित कर दिया है.

इस मामले पर यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ ने बड़ा बयान दिया है. योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, “कानूनी कार्रवाई द्वारा समाजवादी सरकार के पाप के पचड़े को साफ करने के लिए सफाई अभियान चल रहा है. जो भी हमारे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कुत्सित चेष्टा करेगा, जो भी दोषी होगा,कितना ही बड़ा क्यों न हो इन सबकी जगह जेल होगी. यह पूरे प्रदेश की जनता को मैं आश्वस्त करता हूँ.

सीएम योगी ने कहा, “प्रदेश में माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक शिक्षा की या कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हो, पारदर्शिता और पूरी ईमानदारी दिखनी चाहिए. मैंने सभी आयोगों के अध्यक्षों को बुलाकर स्पष्ट किया है कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि प्रदेश के किसी भी युवा को नियुक्तियों में धांधली के चलते परेशान न होना पड़े.”

प्रमुख सचिव (पशुधन) सुधीर एम. बोबड़े ने रविवार को बताया कि इस मामले में पशु पालन विभाग के निदेशक चरण सिंह यादव के साथ अपर निदेशक अशोक कुमार सिंह, बस्ती के अपर निदेशक जी.सी. द्विवेदी, लखनऊ मंडल के अपर निदेशक डॉक्टर हरिपाल, बरेली मंडल के अपर निदेशक ए.पी. सिंह और अयोध्या के अपर निदेशक अनूप श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है.

बोबड़े ने बताया कि एसआईटी टीम ने प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी है, जिस पर कार्रवाई की गई है. 2012-13 में पशुधन अधिकारियों की भर्ती में हुए घोटाले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर एसआईटी ने भर्ती में घोटाले का पर्दाफाश किया है.

जांच में पाया गया कि भर्ती में मनमाने तरीके से मानकों को दरकिनार किया गया. प्रदेश भर में 1148 पशुधन प्रसार अधिकारियों की हुई भर्ती में अफसरों ने लिखित परीक्षा 100 की जगह 80 अंकों की करवाई और 20 अंकों का साक्षात्कार रख दिया. इसके सहारे मनपसंद अभ्यर्थियों को चुना गया. योगी सरकार ने 28 दिसंबर, 2017 को मामले की जांच एसआईटी को सौंपी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने यह कार्रवाई की है.