पाकिस्तान से भारत पहुंचा खतरनाक कांगो फीवर, बेहद मुश्किल है बच पाना

कांगो से पीड़ित हर तीसरे शख्स की मौत हो जाती है लेकिन शुरुआत में ही बीमारी की पहचान हो जाए तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है.

एक दशक बाद कांगो फीवर ने भारत में फिर वापसी की है. खबरों के मुताबिक राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर में कांगो फीवर की वजह से दो मौतें हो चुकी हैं और गुजरात में भी इसके फैलने की बात सामने आई है. राजस्थान सरकार ने 134 लोगों का ब्लड सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजा है. 2011 में कांगो की चपेट से भी कुछ मौतें हुईं थी.

राजस्थान में कांगो से पीड़ित लोगों की पहचान के लिए एक टीम कई इलाकों में घूमकर जायजा ले रही है. उन इलाकों की पहचान की जा रही है जो इस बीमारी से संक्रमित हैं और लोगों को इससे बचने के उपाय भी बताए जा रहे हैं.

क्या है कांगो फीवर?
कांगो यानी क्रीमियन कांगो हेमरेजिक फीवर. ये एक तरह का जानलेवा बुखार है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान में इसका कहर देखा जा चुका है. इस वायरल इंफेक्शन ने अब तक 30 से 80 फीसदी लोगों की जान ले ली है. इस साल भी राजस्थान में इसके चलते 40 साल की महिला और 18 साल के युवक की मौत हो गई.

ऐसे फैलता है कांगो फीवर
इंसानों में ये बीमारी जानवरों में पाए जाने वाले पैरासाइट हिमोरल (खाल में चिपके पिस्सू जैसे कीड़े) के जरिए फैलती है. जानवरों पालने वालों या उनकी देखभाल करने वालों को ये बीमारी होती है. इसका संक्रमण तेजी से फैलता है. इससे ग्रसित व्यक्ति के ब्लड या टिश्यू के संपर्क में आने से इसका संक्रमण फैलता है.

बीमारी के ज्यादातर केस पश्चिमी और पूर्वी अफ्रीका से सामने आए हैं. वहीं भारत में ये बीमारी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आई है. पाकिस्तान से लगे राजस्थान की सीमा से ये बीमारी भारत में पहुंची.

लक्षण
वैसे तो कांगो से पीड़ित हर तीसरे शख्स की मौत हो जाती है लेकिन शुरुआत में ही बीमारी की पहचान हो जाए तो  पीड़ित की जान बचाई जा सकती है. इंफेक्शन से पीड़ित शख्स के शरीर से खून आने लगता है और शरीर के खास अंग काम करना बंद कर देते हैं. तेज बुखार और मांसपेशियों में भयानक दर्द उठता है.

यही नहीं सिर दर्द, चक्कर, उलटी, गले में खराश, पीठ में दर्द, आंखों में जलन और पानी आने की शिकायत पैदा हो जाती है. कांगो से ग्रसित मरीज का प्लेटलेट्स काउंट भी काफी तेजी से गिरने लगता है.