नई शिक्षा नीतिः कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- BJP और RSS खुश मगर क्रिटिकल थिंकिंग को किया दरकिनार

नई शिक्षा नीति (National Education Policy, 2020) में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़े बदलाव किए जाने की घोषणा की गई. इस नई शिक्षा नीति का कांग्रेस (Congress) विरोध कर रही है.
congress attack on modi government, नई शिक्षा नीतिः कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- BJP और RSS खुश मगर क्रिटिकल थिंकिंग को किया दरकिनार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति (National Education Policy, 2020) को मूंजरी दी थी, जिसमें स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़े बदलाव किए जाने की घोषणा की गई. इस नई शिक्षा नीति का कांग्रेस (Congress) विरोध कर रही है. अब कांग्रेस ने नई शिक्षा नीति को लेकर अपना आधिकारिक बयान दिया है.

रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने कांग्रेस के बयान को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा- “नई शिक्षा नीति के जरिए मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, क्रिटिकल थिंकिंग एवं जिज्ञासा की भावना दरकिनार हुई है.”

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

नई शिक्षा नीति केवल चमक-दमक तक सीमित

कांग्रेस ने अपने बयान में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (एनईपी 2020), जिसका उद्देश्य ‘स्कूल एवं उच्च शिक्षा’ में परिवर्तनकारी सुधार लाना होना चाहिए, वह केवल शब्दों, चमक-दमक, दिखावे व आडंबर के आवरण तक सीमित रही है. इस नीति में तर्कसंगत कार्ययोजना व रणनीति, स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्य एवं  इस भव्य सपने के क्रियान्वयन के लिए सोच, दृष्टि, रास्ते व आर्थिक संसाधनों का अभाव व विफलता साफ है.

न परामर्श, न चर्चा, न विचार विमर्श और न पारदर्शिता

अपने आप में बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा नीति 2020 की घोषणा कोरोना महामारी के संकट के बीचों बीच क्यों की गई और वो भी तब, जब सभी शैक्षणिक संस्थान बंद पड़े हैं. सिवाय भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों के, पूरे शैक्षणिक समुदाय ने आगे बढ़ विरोध जताया है कि शिक्षा नीति 2020 के बारे में कोई व्यापक परामर्श, वार्ता या चर्चा हुई ही नहीं.

हमारे आज और कल की पीढ़ियों के भविष्य का निर्धारण करने वाली इस महत्वपूर्ण शिक्षा नीति को पारित करने से पहले मोदी सरकार ने संसदीय चर्चा या परामर्श की जरूरत भी नहीं समझी. याद रहे कि इसके ठीक विपरीत जब कांग्रेस ‘शिक्षा का अधिकार कानून’ लाई, तो संसद के अंदर व बाहर हर पहलू पर व्यापक चर्चा हुई थी.

वादों में जमीन आसमान का फर्क

स्कूल और उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव करने, परिवर्तनशील विचारों को लागू करने तथा बहुविषयी दृष्टिकोण को अमल में लाने के लिए पैसे की आवश्यकता है. शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की गई है. इसके विपरीत मोदी सरकार में बजट के प्रतिशत के रूप में शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च, 2014-15 में 4.14 प्रतिशत से गिरकर 2020-21 में 3.2 प्रतिशत हो गया है.

यहां तक कि चालू वर्ष में कोरोना महामारी के चलते इस बजट की राशि में भी लगभग 40 प्रतिशत की कटौती होगी, जिससे शिक्षा पर होने वाला खर्च कुल बजट के 2 प्रतिशत (लगभग) के बराबर ही रह जाएगा. यानि शिक्षा नीति 2020 में किए गए वादों एवं उस वादे को पूरा किए जाने के बीच जमीन आसमान का अंतर है.

ऑनलाइन शिक्षा से गरीब छात्रों पर पड़ेगा प्रभाव

शिक्षा नीति 2020 का मुख्य केंद्र ‘ऑनलाइन शिक्षा’ है. ऑनलाइन शिक्षा के आधार पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का औसत भर्ती अनुपात मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने का दावा किया गया है. परंतु गरीब व मध्यम वर्ग परिवारों में कंप्यूटर/इंटरनेट न उपलब्ध होने के चलते गरीब और वंचित विद्यार्थी अलग थलग पड़ जाएंगे और देश में एक नया ‘डिजिटल डिवाईड’ पैदा होगा. हाशिए पर रहने वाले वर्गों के 70 प्रतिशत से अधिक बच्चे पूरी तरह ऑनलाइन शिक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जैसा कोविड-19 की अवधि में ऑनलाइन क्लासेज के एक्सेस में गरीब के बच्चे पूरी तरह से वंचित दिखे.

ऑनलाइन शिक्षा के तर्क पर सवालिया निशान

सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित समूहों- दलित/आदिवासी/ओबीसी के समक्ष चुनौतियां हैं. शिक्षा नीति 2020 में शैक्षणिक संस्थानों में दलित, आदिवासी, ओबीसी आरक्षण का कोई उल्लेख नहीं है. चाहे वह छात्रों के लिए हो, शिक्षकों के लिए या अन्य कर्मचारियों के लिए.

वास्तव में, शिक्षा नीति 2020 में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शामिल करने या लाभ देने के बारे में किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं है. शिक्षा नीति 2020 में प्राइवेट शिक्षा पर ज्यादा निर्भरता व सरकारी शिक्षण संस्थानों को कम करने का प्रावधान किया गया है. लेकिन जब सरकारी शिक्षण संस्थान बंद होते जाएंगे, तो फिर, दलित, आदिवासी, ओबीसी विद्यार्थियों के लिए कम होने वाले शैक्षणिक अवसरों का क्या विकल्प होगा? शिक्षा नीति में इसकी कोई चर्चा नहीं है.

भाजपा व उसके छात्र संगठनों का विश्वविद्यालयों पर हमला

शिक्षा नीति 2020 का ‘क्रिटिकल थिंकिंग’, रचनात्मक स्वतंत्रता एवं ‘जिज्ञासा की भावना’ का उद्देश्य मात्र खोखले शब्द बनकर रह गया है. क्योंकि मोदी सरकार के संरक्षण में भाजपा व उसके छात्र संगठन सुनियोजित साजिश के तहत विश्वविद्यालयों पर लगातार हमले बोल रहे हैं, शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त किया जा रहा है तथा शिक्षकों एवं छात्रों की बोलने की आजादी का गला घोंट दिया गया है. शैक्षणिक संस्थानों में भय, उत्पीड़न, दमन व दबाव का माहौल फैला है. यहां तक कि मेरिट को दरकिनार कर भाजपा-आरएसएस विचारधारा वाले लोगों को ही विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

Related Posts