कृषि कानून के खिलाफ कांग्रेस शासित राज्यों में सरगर्मी, देश भर से जुटाएंगे 2 करोड़ किसानों के दस्तखत

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (rahul gandhi) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (narendra modi) के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 'पिछले छह वर्षों में केंद्र द्वारा शुरू की गई एक भी नीति से गरीबों को लाभ नहीं मिला,

Rahul Gandhi
राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और मजदूरों की आवाज को दबाने का काम कर रही है.

कृषि कानून पर सियासत का पारा हाई है. सभी विपक्षी पार्टियां अपने-अपने तरीके से मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून का विरोध करने में जुटी है. कृषि कानून (Agriculture farmers bill) पर विरोध के सबसे ऊंचे स्वर कांग्रेस (Congress) पार्टी की ओर से उठाए जा रहे हैं. खबर है कि कांग्रेस अब पंजाब (punjab) और हरियाणा (Hariyana) में विरोध प्रदर्शनों की गुंजाइश और तीव्रता का विस्तार करके, राज्यों में अपनी योजना को आगे बढ़ाते हुए नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई तेज करेगी.

कांग्रेस, कृषि कानून पर अपनी आवाज उन किसानों के भरोसे बुलंद करने के प्रयास में है, जो इस कानून का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. कृषि संकट ने पहले ही ग्रामीण आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित किया है, ऐसे में मौके का लाभ उठाकर कांगेस नए कृषि कानून के विरोध की आंड़ में अपने स्वर को बुलंद कर अपना खोया हुआ अस्तित्व वापस पाने की कोशिश में जुट गई है. कुछ जानकारों ने बताया कि कांग्रेस, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शासित राज्यों में विधानसभाओं का एक विशेष सत्र बुलाकर अपने द्वारा लाए गए बिल को पास कराने और केंद्र के कृषि कानूनों को खत्म करने का प्रयास करेगी.

कांग्रेस पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं का ये भी मानना है कि उनके द्वारा लाए जा रहे कृषि बिल को पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के राज्यपालों द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाएगा क्योंकि वहां के राज्यपालों को केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है, हालांकि पार्टी इस मामले में किसी भी टकराव की स्थिति का सामना करने को तैयार हैं. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उनका उद्देश्य इस देश के किसानों को केंद्र सरकार की ओर से लाए गए काले कानूनों से बचाना है.

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कृषि कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में कांग्रेस

संभावनाएं जताई जा रही हैं कि पार्टी तीनों कृषि कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है, हालांकि पार्टी की आंतरिक सोच यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए यह समय सही नहीं है क्योंकि अदालत में कानूनी को लागू करने के लिए सही समय और गुंजाइश का होना बेहद जरूरी है. पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं को अदालत में अपने पक्ष में परिणाम आने की उम्मीद नहीं है. कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि ‘अगर सरकार के पक्ष में अदालत का फैसला आता है, तो हम हार जाएंगे और आंदोलन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा’.

पार्टी की रणनीति के अनुसार कांग्रेस कृषि बिल के विरोध में देश भर के दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर लेगी और उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंप देगी. कृषि बिल के मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi ) से परामर्श लिया गया है, खबर है कि सिंघवी ने संबंधित कांग्रेस के नेतृत्व वाली विधानसभाओं में राज्य सरकारों के लिए बिलों का मसौदा तैयार किया है. कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी महासचिवों और प्रभारियों को अपने-अपने राज्यों का दौरा करने और वहाँ कृषि कानूनों को लेकर विरोध तेज करने को कहा है.

एमके के तिरुचि शिवा और कांग्रेस के टीएन प्रतापन समेत कुछ सांसदों ने कृषि कानूनों पर उपायों के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया हैं, प्रतापन ने स्पष्ट किया है कि तीन कृषि विधयकों में से वह अभी केवल एक कृषि विधेयक के विरोध में अदालत गए हैं. बता दें कि कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी अदालत में जाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

कांग्रेस लगातार मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून का विरोध कर रही है, कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul gandhi) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘पिछले छह वर्षों में केंद्र द्वारा शुरू की गई एक भी नीति से गरीबों को लाभ नहीं मिला, उन्होंने कोरोनोवायरस प्रकोप के बीच तीन काले कृषि बिल पारित कर दिए, इस समय इस कानून को पारित कराने की क्या जल्दबाजी थी? राहुल ने कहा कि ‘पीएम मोदी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा कि देश के किसान कुछ नहीं कर पाएंगे, मगर शायद वे एक किसान की ताकत को नहीं जानते’.

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