डीके शिवकुमार को नाराज करना पड़ा महंगा, कर्नाटक में गिर जाएगी कांग्रेस-जेडीएस सरकार!

शिवकुमार कांग्रेस के लिए कई तरह के काम करते रहे हैं. वे फंड जुटाने के साथ-साथ सभाओं में भीड़ जुटाने का काम करते रहे हैं.

बेंगलुरू: कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार का संकट गहराता जा रहा है. शनिवार को कांग्रेस के 8 और जेडीएस के तीन विधायक इस्तीफ़ा देने विधानसभा पहुंचे. हालांकि बताया जा रहा है कि फ़िलहाल विधानसभा अध्यक्ष बाहर हैं.

वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी भी अमेरिका दौरे पर हैं. ऐसे में विधायकों को मनाने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार विधायकों से बातचीत करने स्पीकर कार्यालय पहुंचे हैं.

कांग्रेस के मुताबिक पिछले काफी समय से कर्नाटक में जोड़तोड़ की कोशिश होता रही है लेकिन क्या असली वजह यही है?

पिछले साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 70 और जेडीएस को 35 सीटें हासिल हुई थी जबकि बीजेपी ने 104 सीटें जीती थी. माना जाता है कि 2018 में अगर कांग्रेस के संकटमोचक डीके शिवकुमार ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो कांग्रेस-जेडीएस की सरकार नहीं बनती.

कर्नाटक के सीएम या डिप्टी सीएम बनना चाहते थे डीके शिवकुमार

शिवकुमार ने कर्नाटक का सीएम बनने की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को कभी छिपाया नहीं. हालांकि जब कुमारस्वामी का सीएम फॉर्मूला तय हुआ तो वो उपमुख्यमंत्री बनने की चाहत रखने लगे.

उन्हें यह भी लगता था कि पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनकर वह अपने सपने को साकार कर सकते हैं, लेकिन बताया जाता है कि अपने खिलाफ चल रहे कुछ मामलों की वजह से वो दो महीने पहले ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी (KPCC) की रेस से पीछे हट गए और दिनेश गुण्डु राव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए.

आपको याद होगा गुजरात के 44 कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु में सुरक्षित रखने का काम डीके शिवकुमार ने ही किया था. यह करके वह कांग्रेस आलाकमान को ‘खुश’ करना चाहते थे.

दरअसल जब कांग्रेस आलाकमान के सामने गुजरात के अपने विधायकों को सेफ रखने की चुनौती आई तो उन्होंने आगे बढ़कर खुद यह जिम्मेदारी ली. जबकि कांग्रेस ने गोयल नाम के किसी उद्योगपति को यह जिम्मेदारी देने का मन बनाया था. शिवकुमार को लगा कि अगर वह यह काम करने में सफल रहते हैं तो पार्टी में उन्हें कोई बड़ी भूमिका मिल सकती है.

बेंगलुरु मिरर से बात करते हुए सिद्धारमैया सरकार के एक मंत्री ने बताया, ‘गुजरात में आए संकट के बाद वहां के नेताओं ने कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं से कोई मदद नहीं मांगी थी. उन्होंने बेंगलुरु में गुजराती मूल के एक उद्योगपति गोयल से जरूर संपर्क किया था और उन्हें कहा था कि वह विधायकों के ठहरने के लिए प्राइवेट रिजॉर्ट का इंतजाम करें, लेकिन शिवकुमार ने यह मौका झटकने में देर नहीं लगाई. प्रदेश कांग्रेस का कोई नेता इस काम में दिलचस्पी नहीं ले रहा था, लेकिन शिवकुमार ने खुद सारा इंतजाम करने की बात कही. इसकी कोई जरूरत नहीं थी. स्वाभाविक है कि इससे बीजेपी को मौका मिल गया.’

कांग्रेस के लिए फंड जुटाने का काम करते हैं संकटमोचक

शिवकुमार कांग्रेस के लिए कई तरह के काम करते रहे हैं. वे फंड जुटाने के साथ-साथ सभाओं में भीड़ जुटाने का काम करते रहे हैं.

पार्टी पर संकट आने की स्थिति में वह हमेशा काम आए हैं. उनकी कामयाबी की कहानी भी असाधारण रही है. एक गरीब परिवार में पले बढ़े शिवकुमार का आज रियल एस्टेट से लेकर ऊर्जा के क्षेत्र में भी कारोबार है.

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कोऑपरेटिव सोसायटियों और चीनी मिलों में भी वह दखल रखते हैं. जानकार बताते हैं कि उनका साम्राज्य हजारों करोड़ का है. वह भारत के दूसरे सबसे अमीर मंत्री हैं.