‘संविदा नीति के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे’, रोजगार मुद्दे पर युवाओं से बातचीत में बोलीं प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव(Congress General Secretary) को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए व्यथा सुनाते हुए कई अभ्यर्थी रो पड़े. एक महिला अभ्यर्थी ने महासचिव से बातचीत में बताया कि जब 2016 में उन्होंने परीक्षा दी थी, चयन के बाद बहुत खुश थीं लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं हुई.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Congress General Secretary Priyanka Gandhi) ने गुरुवार को युवाओं के साथ रोजगार (Employment) के मुद्दे पर संवाद शुरू किया. प्रियंका ने संविदा के मुद्दे पर भी युवाओं की राय ली और आश्वस्त किया कि हम सरकार में आते ही ऐसी नीति लाएंगे जिसमें संविदा नहीं, बल्कि सम्मान हो. उन्होंने कहा कि वो इस काले कानून के खिलाफ सड़कों में भी आवाज उठाएंगी. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रभारी उत्तर प्रदेश प्रियंका गांधी ने 2016 के 12,460 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बातचीत की. ये बातचीत प्रियंका द्वारा हाल ही में शुरू किए गए युवाओं के साथ रोजगार पर संवाद का हिस्सा है.

प्रियंका ने कहा कि मेरा मानना है कि युवाओं की बात सुननी पड़ेगी और उनके मुद्दों के लिए हमें सड़क से लेकर सदन तक लड़ना होगा. कांग्रेस पार्टी इसमें पीछे नहीं हटने वाली है.

12,460 शिक्षक भर्ती में नियुक्त को लेकर चर्चा

गौरतलब है कि 2016 में 12,460 शिक्षक भर्ती में ‘शून्य जनपद’ के अभ्यर्थी अबतक नियुक्ति से वंचित हैं. इस शिक्षक भर्ती के विज्ञापन में 51 जिलों में पद थे लेकिन 24 जिलों में पद शून्य थे. विगत 3 साल से ‘शून्य जनपद’ वाले अभ्यर्थी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए व्यथा सुनाते हुए कई अभ्यर्थी रो पड़े. एक महिला अभ्यर्थी ने महासचिव से बातचीत में बताया कि जब 2016 में उन्होंने परीक्षा दी थी, चयन के बाद बहुत खुश थीं लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं हुई. उनके पास दो छोटे-छोटे जुड़वा बच्चे हैं, उनकी चिंता रहती है.

‘नौकरी न मिलने पर दो साल तक अवसाद में रही’

उन्होंने कहा कि वो नौकरी न मिलने पर लगभग दो साल तक अवसाद में थीं. कई दिनों तक वो सोफे पर पड़ी रहती थीं, उनके बच्चे भूखे-प्यासे रहने को मजबूर थे. अपनी बातों को रखते हुए उन्होंने कहा कि अब घर की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. अपने बच्चों पर 10 रुपया खर्च करने के लिए उन्हें 10 बार सोचना पड़ता है.

‘अब सुबह- शाम खाने की होने लगी है चिंता’

एक अन्य अभ्यर्थी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बड़ी ही मेहनत से उसने पढ़ाई की है. सोचा था कि परिवार वालों की मदद कर पाऊंगा, लेकिन तीन साल से धक्के खा रहा हूं. बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू किया था, अब कोरोना काल में वह भी बंद है. घर का एक सदस्य प्राइवेट नौकरी करता है लेकिन अब उनकी भी नौकरी छूट चुकी है. घर की स्थिति यह है कि अब शाम-सुबह के खाने की चिंता होने लगी है.

‘नौकरी न मिलने से शादी टूट गई’

दो अन्य अभ्यर्थियों ने अपना दर्द साझा करते हुए महासचिव प्रियंका गांधी से कहा कि नौकरी न मिलने से उनकी शादी टूट गयी और वे अब सामाजिक उपहास के पात्र बन गए हैं. यह कहते हुए एक अभ्यर्थी ने भावुक होते हुए कहा कि आखिर हमारी गलती क्या है? हम योग्य हैं. परीक्षा में बेहतर नम्बर लाए हैं लेकिन सरकार रोज रोज अपना नियम बदलती है.

महासचिव ने वादा किया कि वो हर सम्भव मदद करेंगी. उन्होंने बातचीत में कहा कि यह हमारे लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का मसला है. यह न्याय का सवाल है.

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