karnataka crisis, कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी, जानिए अब क्या है विकल्प?
karnataka crisis, कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी, जानिए अब क्या है विकल्प?

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी, जानिए अब क्या है विकल्प?

कर्नाटक में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिसमें से 16 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.
karnataka crisis, कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरी, जानिए अब क्या है विकल्प?

नई दिल्ली: कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस (जनता दल सेक्युलर) की सरकार मंगलवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में विफल रही और सरकार गिर गई. इसी के साथ राज्य में करीब तीन हफ्ते से चल रहे राजनीतिक ड्रामे का अंत हो गया.

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को संख्या बल का साथ नहीं मिला और उन्होंने विश्वास मत प्रस्ताव पर चार दिन की चर्चा के खत्म होने के बाद हार का सामना किया. विधानसभा में पिछले बृहस्पतिवार को उन्होंने विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया था.

विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने ऐलान किया कि 99 विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है जबकि 105 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया है. इस प्रकार यह प्रस्ताव गिर गया.

अब लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि क्या कर्नाटक में मध्यावधी चुनाव होंगे या फिर कोई और विकल्प भी होगा.

आइए जानते हैं कि संवैधानिक तरीके से कर्नाटक की राजनीति में क्या विकल्प बचता है.

बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश करेगी
कर्नाटक में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिसमें से 16 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. यानी अब विधानसभा सीटों की अधिकतम संख्या 208 रह गई है. ऐसे में बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए 105 विधायकों का समर्थन चाहिए.

हालांकि अभी तक 16 विधायकों का इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं हुआ है. इसके बावजूद भी बीजेपी अलपमत में सरकार चला सकती है.

राज्यपाल चलाए सरकार
कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला विधानसभा भंग करने के बजाए केंद्रीय गृह मंत्रालय से राष्ट्रपति लगाने की सिफ़ारिश कर सकते हैं. यानी कि विधानसभा स्थगन मोड में रहेगा और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहेगा.

खाली सीटों पर उपचुनाव
हालांकि यह प्रकिया थोड़ी लंबी है. इसमें सभी ख़ाली सीटों पर उपचुनाव करवाना होगा. हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में अक्टूबर महीने में चुनाव होने वाला है तो संभव है कि उसके साथ ही कर्नाटक के सभी ख़ाली सीटों पर उपचुनाव करा दिए जाएं.

हालांकि इसमें दो से तीन महीने का समय लगेगा, ऐसे में तब तक यहां पर राष्ट्रपति शासन लगा रहेगा.

मध्यावधि चुनाव

बीजेपी फ़िलहाल भले ही अलपमत सरकार बना ले लेकिन राज्य में स्थिर सरकार बनाने के लिए उपचुनाव करना ही होगा. बीजेपी ने अगर राज्य में बिना उपचुनाव कराए अलपमत की सरकार चलायी तो 14 महीने बाद कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव होगा.

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 में राज्य के अंदर 28 में से 25 सीटें जीती है ऐसे में पार्टी चाहेगी की मध्यावधि चुनाव कराकर एक मज़बूत सरकार दे.

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