यूं हीं नहीं प्रचंड वोटों से जीते भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नाराज जाट बिरादरी को मनाने लिए बनाई खास रणनीति

चुनाव से पहले कांग्रेस ने नई रणनीति के तहत काम किया और 55 गावों के 225 बूथों के माध्यम से 2 लाख मतदाताओं को साधने में दमदार सफलता हासिल की.
Congress Leader Bhupinder Singh Hooda, यूं हीं नहीं प्रचंड वोटों से जीते भूपेंद्र सिंह हुड्डा, नाराज जाट बिरादरी को मनाने लिए बनाई खास रणनीति

हरियाणा विधान सभा चुनाव 2019 Haryana Vidhan sabha Election के नतीजे आ चुके हैं. इन नतीजों में 15 सीटों पर सिमट चुकी कांग्रेस को भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda )ने प्रदेश की 90 में से 31 सीटों पर जीत दिलवा कर दमदार वापसी की है. भले ही कांग्रेस (Congress) फिलहाल सत्ता से दूर है लेकिन भूपिंदर सिंह हुड्डा नें गढ़ी सांपला किलोई से सबसे ज्यादा वोटों से जीत कर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पूरे हरियाणा के वे सबसे मजबूत और लोकप्रिय नेता हैं.

इस चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता चौधरी भूपिंदर सिंह हुड्डा(Bhupinder Singh Hooda )सबसे ज्यादे 58,312 वोटों से जीतने वाले विधायक बने हैं. यहां चुनाव से पहले कांग्रेस ने नई रणनीति के तहत काम किया और 55 गावों के 225 बूथों के माध्यम से 2 लाख मतदाताओं को साधने में दमदार सफलता हासिल की. वहीं जाट आंदोलन के बाद गैर जाट बिरादरी के मतदाताओं ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से दूरी बना ली थी लेकिन इस चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि हुड्डा सभी का दिल जीतने में सफल रहें.

इस जीत के पीछे सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि भूपेंद्र हुड्डा ने इलाके में विकास तो खूब किया लेकिन लोगों की नाराज़गी थी कि “उनके 4 चौधरी” यानी करीबी गांव वालों की समस्याओं को हुड्डा तक नहीं पहुंचाते थे. इस समस्या का निपटारा करते हुए दीपेन्द्र हुड्डा ने हर सभा में लोगों से एक ही बात कही कि अगर कोई समस्या है तो हमसे सीधे आकर मिलें आपको किसी भी चौधरी की परमिशन की जरूरत नहीं है. इस बात का असर यह हुआ हुड्डा की नकारात्मक छवि धीरे-धीरे बदली और लोगों का विश्वास एक बार फिर हुड्डा पर हुआ.

वहीं इन सबसे से इतर एक बात ओर कांग्रेस की जीत के पीछे का राज़ यह रहा कि, कांग्रेस इस चुनाव में रणनीति बनाने और अपने मतदाताओं को साधने में बीजेपी से कांग्रेसएक कदम आगे रही. दरअसल, हुड्डा के लिए ज़मीन तैयार करने वाली टीम बीजेपी की हर रणनीति और गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए थी. बीजेपी की हर छोटी-बड़ी रणनीति के आधार पर ही हुड्डा और कांग्रेस आगे की रणनीति तैयार करते थे.

बता दें कि गढ़ी सांपला किलोई को पुरे हरियाणा में कांग्रेस को जीत दिलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है, लेकिन अपने ही गढ़ में जीत का अंतर चुनाव दर चुनाव कम होते जाने से हुड्डा की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं. अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए हुड्डा ने अपनी रणनीति तैयार की. इसका नतीजा यह रहा कि गढ़ी सांपला किलोई से दावेदार भूपेन्द्र सिंह हुड्डा इस विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 58,312 वोटों से जीत दर्ज करने में कामयाब रहें.

हालांकि हरियाणा में कांग्रेस की जीत का सेहरा भले ही भूपेन्द्र सिंह हुड्डा रहे हों लेकिन हुड्डा और कांग्रेस की जीत के पीछे IIMC के पूर्व छात्र रहे बद्री के द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और दिए गए सुझाव रहे. पिछले कई महीनों ने दिन-रात कांग्रेस और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए जीत की रणनीति तैयार करने वाले बद्री किलोई में कांग्रेस के गिरते ग्राफ को ऊपर उठाने में गढ़ी सांपला किलोई विधानसभा अहम रणनीतिकार साबित हुए.

बता दें कि बद्री और उनकी टीम के मुख्य सदस्य पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव जिताने वाले I-PAC और प्रशांत किशोर के साथ काम कर चुके हैं. इस टीम में सभी Ex-IPACers रहे हैं. बद्रीनाथ जहां ग्राउंड पर एक्टिव रहें वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर की टीम के डायरेक्टर रह चुके उनके साथी मनीष कुमार हर पहलू पर नजर रखने के साथ ही समय-समय पर महत्वपूर्ण सुझाव देते रहें. वहीं Texos University से डाटा एक्सपर्ट रहें एकांक जतवानी, TISS के शाहबाज अहमद, I-PAC के अकाउंटेंट रह चुके संजीव कुमार ने कांग्रेस और हुड्डा की जीत के पीछ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बता दें कि बद्रीनाथ उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता का मक्का कहे जाने वाले देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से बद्रीनाथ ने विज्ञापन और जनसंपर्क पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. इसके साथ ही यूनिसेफ से हेल्थ जर्नलिज्म की परीक्षा के टॉपर रहे बद्री अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद WHO के Diabetes campaign में काम कर चुके हैं. इसके अलावा बद्री ने तीन साल I-PAC और प्रशांत किशोर के साथ काम करने के अलावा बीते चार वर्षों से देश विभिन्न महत्वपूर्ण चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं.

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