‘रिजॉर्ट राजनीति’ के जनक कहे जाते हैं डीके शिवकुमार, ऐसे बने कांग्रेस के ‘किंगमेकर’

डीकेएस का नाम राजनीतिक गलियारों पर तब जाना जाने लगा जब उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव पर लड़ा और इतिहास भी रचा. वोक्कालिगा समुदाय के मज़बूत दावेदार देवेगौड़ा हार गए. फिर दस साल बाद, शिवकुमार ने विधानसभा में देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को हराया था.

नई दिल्ली: कांग्रेस के संकटमोचक डीके शिवकुमार आज खुद संकट में घिर चुके हैं. कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. उनकी गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. शिवकुमार कांग्रेस के संकटमोचक माने जाते थे. कर्नाटक में इन्होंने एचडी कुमारस्वामी को फ्लोर टेस्ट पास करवाया था. इसके बाद दोबारा भी काफी प्रयास किए लेकिन संभव नहीं हो पाया था. बताया जाता है कि जब भी सरकार पर कोई संकट आता था तो कांग्रेसी नेताओं को इन्ही के आलीशान रिसॉर्ट में ठहराया जाता था.

कर्नाटक का सियासी ड्रामा तो सबने देखा होगा. कर्नाटक में JDS-कांग्रेस सरकार बचाने के लिए डीके शिवकुमार ने ताकत झोंक दी थी. कर्नाटक में जेडीएस- कांग्रेस गठबंधन की पूर्ववर्ती सरकार आखिरी सांसे गिन रही थी. 14 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इस दौरान खबर आई कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने पार्टी की राजनीतिक जमीन बचाए रखने के लिए विधायकों के इस्तीफे फाड़ दिए. इस्तीफे फाड़े जाने को लेकर डीके शिवकुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए? चलिए उन्हें शिकायत दर्ज कराने दीजिए, यदि वे मुझे सलाखों के पीछे डलवाना चाहते हैं तो मैं तैयार हूं. मैंने बहुत बड़ा रिस्क लिया है.

ईगलटन के रिज़ॉर्ट मालिक हैं डीके शिवकुमार
डीके शिवकुमार को रिसॉर्ट राजनीति का जनक भी कहा जाता है. जब गुजरात में कांग्रेस के विधायक एक-एक कर भाजपा में शामिल होते जा रहे थे और अहमद पटेल की नैया मझधार में फंसने लगी तब कांग्रेस के बचे 44 विधायकों को बेंगलुरु के पास “ईगलटन” रिज़ॉर्ट ले जाया गया. ये रिजॉ र्टडीकेएस का ही था. यहां की गई बाड़ेबंदी से अहमद पटेल चुनाव जीत गए. इस चुनाव के बाद ही डीकेएस पार्टी आलाकमान के करीब आ गए थे.

लेकिन यह पहली बार नहीं था जब डीकेएस का रिज़ॉर्ट कांग्रेस के लिए रक्षा कवच बना है. 2002 में जब महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख की सरकार पर खतरा आया तब वहां के विधायकों को कांग्रेस शासित कर्नाटक भेज दिया गया था. ये विधायक कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री डीके शिवकुमार के रिज़ॉर्ट में रुके थे. और विलासराव देशमुख की सरकार बच गई थी. इस बार फिर से डीकेएस का ईगलटन रिज़ॉर्ट कांग्रेस के लिए लकी साबित हुआ. कांग्रेस के सभी विधायकों को यहीं रखा गया था. जब विधायकों को बस से हैदराबाद ले जाया गया तो उस बस में सबसे आगे डीकेएस खुद बैठे थे.

डीकेएस का नाम राजनीतिक गलियारों पर तब जाना जाने लगा जब उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव पर लड़ा और इतिहास भी रचा. वोक्कालिगा समुदाय के मज़बूत दावेदार देवेगौड़ा हार गए. फिर दस साल बाद, शिवकुमार ने विधानसभा में देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को हराया था.

उस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल मचाते हुए उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में कनकपुरा लोकसभा सीट से अनुभवहीन तेजस्विनी को खड़ा कराकर देवगौड़ा को मात दी. लेकिन इसके बाद भी जब पार्टी ने जेडीएस और देवगौड़ा परिवार से हाथ मिलाकर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाने का फ़ैसला किया तो उन्होंने एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह पार्टी के फ़ैसले को स्वीकार कर लिया.