70वें संविधान दिवस पर बोले पीएम मोदी- संविधान हमारा मूल और सबसे बड़ा ग्रंथ

70 साल पहले, संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया गया था. बाद में 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया.

देश के 70वें संविधान दिवस पर मंगलवार को संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुलाया गया है. सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सत्र को संबोधित किया.

संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था. बाद में 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया.

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  • अब राष्‍ट्रपति और उप-राष्‍ट्रपति (राज्‍यसभा के पदेन सभापति) संसद के संयुक्‍त सत्र को संबोधित करेंगे.

संविधान दिवस पर क्‍या बोले प्रधानमंत्री

  • सेवाभाव, संस्कार और कर्तव्य हर समाज के लिए बहुत अहम हैं. लेकिन सेवाभाव से कर्तव्य अलग है. सेवाभाव किसी भी समाज को सशक्त करता है. उसी तहर कर्तव्यभाव भी बहुत अहम है. एक नागरिक के नाते हमें वो करना चाहिए, जिससे हमारा राष्ट्र शक्तिशाली बने: प्रधानमंत्री
  • जनप्रतिनिधि होने के कारण खुद को भी एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना हमारा दायित्व बन जाता है और हमें समाज में सार्थक बदलाव लाने के लिए इस कर्तव्य को भी निभाना होगा. हमारी कोशिश होनी चाहिए कि अपने हर कार्यक्रम में, हर बातचीत में हम ड्यूटीज पर फोकस करें : प्रधानमंत्री
  • हमारा संविधान वैश्विक लोकतंत्र की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि है. यह न केवल अधिकारों के प्रति सजग रखता है बल्कि हमारे कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी बनाता है. अधिकारों और कर्तव्यों के बीच के इस रिश्ते और इस संतुलन को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बखूबी समझा था. आज जब देश पूज्य बापू की 150वीं जयंती का पर्व मना रहा है तो उनकी बातें और भी प्रासांगिक हो जाती हैं : प्रधानमंत्री
  • मैं विशेष तौर पर 130 करोड़ भारतीयों के सामने नतमस्तक हूं, जिन्होंने भारत के लोकतंत्र के प्रति आस्था को कभी कम नहीं होने दिया और हमारे संविधान को हमेशा एक पवित्र ग्रंथ माना. हमारे संविधान की मजबूती के कारण ही हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दिशा में आगे बढ़ पाए हैं. हमने तमाम सुधार संविधान की मर्यादा में रहकर किए हैं. हमारा संविधान हमारे लिए सबसे पवित्र ग्रंथ है. ऐसा ग्रंथ जिसमें हमारे जीवन की, समाज की परंपराओं, हमारे आचार-विचार का समावेश है और अनेक चुनौतियों का समाधान भी है : प्रधानमंत्री
  • डॉ राजेन्द्र प्रसाद, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, सुचेता कृपलानी और अनेक अनगिनत महापुरुषों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान देकर ये महान विरासत हमें सौंपी हैं. मैं उन सभी महापुरुषों को नमन करता हूं : प्रधानमंत्री
  • 26 नवंबर हमें दर्द भी पहुंचाता है. जब भारत की महान परंपराओं, हजारों साल की सांस्कृतिक विरासत को आज के ही दिन मुंबई में आतंकवादी मंसूबों ने छलनी करने का प्रयास किया था. मैं वहां मारी गईं सभी महान आत्माओं को नमन करता हूं : पीएम मोदी
  • कुछ दिन और अवसर ऐसे होते हैं जो हमारे अतीत के साथ हमारे संबंधों को मजबूती देते हैं. हमें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं. आज 26 नवंबर का दिन ऐतिहासिक दिन है. 70 साल पहले हमने विधिवत रूप से, एक नए रंग रूप के साथ संविधान को अंगीकार किया था : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान दिवस पर दोनों सदनों की बैठक को संबोधित कर रहे हैं.
  • कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, “सभी देशवासियों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. संविधान दिवस पर हम अपने संविधान सभा के महान नेताओ के बहुमूल्य योगदान को नमन करते हैं. हमें हमारे संविधान पर गर्व है, इसमें निहित मूल्यों को बचाये रखने के लिए हम अपनी वचनबद्धता दोहराते हैं.”

  • राष्ट्रपति वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. इस मौके पर नेशनल यूथ पार्लियामेंट स्कीम का वेब पोर्टल भी लांच होगा. सेंट्रल हॉल में कार्यक्रम सुबह दस बजे से शुरू होकर यह विशेष सत्र एक बजे तक चलेगा. इसमें पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री भी भाग ले सकते हैं. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी इस विशेष सत्र को संबोधित करेंगे.

क्‍या है संविधान दिवस का उद्देश्‍य?

11 अक्टूबर, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी. संविधान दिवस आयोजन के पीछे मकसद है कि जनता में इसको लेकर जागरूकता फैलाने और डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान से सभी को परिचित कराया जाए.

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