मैसूर में मिस्ट्री बना कोरोना केस, नांजांगुड में फैले Covid-19 के पीछे कहीं चाइनीज कंसाइनमेंट तो नहीं

15 मार्च को कंपनी के जिस शख्स ने इस कंसाइनमेंट (Chinese Consignment) रिसीव किया था वो 26 मार्च को कोरोना वायरस (Coronavirus) पॉजिटिव पाया गया था. तबसे आसपास के 20 अन्य लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं.
Nanjangud Chinese Consignment, मैसूर में मिस्ट्री बना कोरोना केस, नांजांगुड में फैले Covid-19 के पीछे कहीं चाइनीज कंसाइनमेंट तो नहीं

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 5200 के पार पहुंच गया है. इनमें से 181 कोरोना के पॉजिटिव केस कर्नाटक में दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 35 मामले केवल मैसूर के हैं. कर्नाटक में बढ़े कोरोना के केस को लेकर एक मिस्ट्री बनी हुई है. अधिकारी 14 मामलों में वायरस के सोर्स को ट्रैक करने में सक्षम रहे हैं, जबकि वे मैसूर जिले के नांजांगुड तालुक में कोरोना वायरस के मूल सोर्स को ढूंढने में विफल रहे हैं.

अकेले नांजांगुड में 21 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें कोई न कोई डायरेक्टली या इंडायरेक्टली राज्य के एक अन्य कोरोना मरीज से जुड़ा रहा है. इन लोगो में फैले वायरस को लेकर कहा जा रहा है कि यह एक चाइनीज कंसाइनमेंट के जरिए आया है, जो कि जुबिलेंट लाइफ साइंस ने रिसीव किया था.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 15 मार्च को कंपनी के जिस शख्स ने इस कंसाइनमेंट रिसीव किया था वो 26 मार्च को कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया था. तबसे आसपास के 20 अन्य लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इन लोगों की कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है. ये सभी लोग डायरेक्टली या इंडायरेक्टली कंसाइनमेंट रिसीव करने वाले शख्स के संपर्क में आए थे. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि चीन से आया यह कंसाइमेंट कंपनी ने चेन्नई के जरिए 15 मार्च को रिसीव किया था.

असाइंमेंट रिसीव करने वाले शख्स पर यह जिम्मेदारी थी कि लगभग 3 टन का रॉ मटेरियल गोदाम में सही तरीके से पहुंच जाए. 17 मार्च को इस शख्स को बुखार हुआ और 18 मार्च को उसने काम से छुट्टी ले ली. वह 19 मार्च को फिर से काम पर आया, लेकिन 20 मार्च को वह मैसूर के गोपाल गौड़ा अस्पताल में भर्ती हुआ. अगले दिन उसे सरकार द्वारा संचालित केआर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर 26 मार्च को उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया.

इसके तुरंत बाद, नांजांगुड में 3 किमी का एक क्षेत्र निर्धारित किया गया, जहां पर सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) ने घर-घर जाकर यह चेक किया कि कहीं किसी में कोरोना के लक्षण तो नहीं हैं.

वहीं अब यह मिस्ट्री बनी हुई है कि आखिर कंसाइनमेंट रिसीव करने वाले शख्स में कोरोना के वायरस आए कहां से हैं, क्योंकि उसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं रही है. जिला प्रशासन इसकी जांच कर रहा है कि आखिर उसे कोरोना हुआ कैसे. प्रशासन पता लगा रहा है कि क्या वह किसी ऐसे व्यक्ति से मिला था जो विदेश यात्रा करता है या यह वायरस कंसाइमेंट के जरिए आया था.

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