‘अगले साल से पहले Corona Vaccine आने की संभावना नहीं’, संसदीय समिति के सामने सरकार ने बताया

सूत्रों के मुताबिक, विज्ञान और तकनीकी संबंधी संसदीय समिति (Parliamentary Committee) की बैठक में यह जानकारी केंद्र सरकार (Central Government) की तरफ से एक उच्च अधिकारी ने दी है.
Corona Vaccine is unlikely to arrive before next year, ‘अगले साल से पहले Corona Vaccine आने की संभावना नहीं’, संसदीय समिति के सामने सरकार ने बताया

केंद्र सरकार (Central Government) के एक बड़े अधिकारी ने शुक्रवार को राज्यसभा (Rajyasabha) की पार्लियामेंट्री कमिटी (Parliamentary Committee) को बताया कि किसी भी सूरत में कोरोनावायरस के लिए वैक्सीन (Corona Vaccine) अगले साल से पहले आने की संभावना नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, विज्ञान और तकनीकी संबंधी संसदीय समिति की बैठक में यह जानकारी सरकार की तरफ से एक उच्च अधिकारी ने दी है. समिति के अध्यक्ष जयराम रमेश (JaiRam Ramesh) हैं, जिन्होंने बैठक की अध्यक्षता की थी.

ICMR के दावे पर सरकार का जवाब

सरकार के तरफ से आधिकारिक तौर पर समिति को यह भी बताया गया कि 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने संबंधी ICMR के पत्र का आशय महज सरकारी कार्यकलाप में ढिलाई और बाबूगिरी की वजह से बेवजह देरी के बजाय तेजी लाना था.

लॉकडाउन के बाद पहली बैठक

बता दें कि लगभग 4 महीने के लॉकडाउन (Lockdown) के बाद 10 जुलाई को राज्यसभा की पहली संसदीय समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें केवल 7 से 8 सांसदों की भागीदारी ही सुनिश्चित हो पाई थी.

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भारत बायोटेक और ICMR मिलकर बना रहे वैक्सीन

दरअसल ICMR और एक प्राइवेट फार्मास्युटिकल कंपनी भारत बायोटेक इंडिया लिमिटेड साथ मिलकर कोविड-19 महामारी फैलाने वाले SARS-CoV-2 वायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन बना रहे हैं.

कुछ दिन पहले ही ICMR ने एक पत्रा जारी किया था, जिसमें जिसमें दावा किया गया था कि 15 अगस्त 2020 तक तमाम क्लीनिकल ट्रायल्स के बाद वैक्सीन लॉन्च की जा सकती है.

ICMR की सफाई

हालांकि, ICMR ने बाद में अपने इस दावे पर सफाई भी थी, जिसमें उसने कहा कि वैक्सीन बनाने में लगे अस्पताल लालफीताशाही और ढिलाई से बचें इसलिए यह चिट्ठी लिखी गई थी.

“ICMR का टारगेट अव्यावहारिक और अवास्तिव”

वहीं बेंगलुरू स्थित वैज्ञानिकों की संस्था इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भी कहा था कि 15 अगस्त तक Covid-19 की वैक्सीन लॉन्च करने का ICMR का टारगेट अव्यावहारिक और अवास्तिव है. IASc का कहना है कि इसमें कोई सवाल नहीं है कि वैक्सीन की काफी जरूरत है, लेकिन वैक्सीन का मनुष्यों पर इस्तेमाल किया जा सके उससे पहले उसे वैज्ञानिक रूप से क्लीनिकल ट्रायल से गुजरना होता है वो भी चरणबद्ध तरीके से.

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