भीषण गर्मी में पहननी पड़ रही PPE, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, जलन जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे डॉक्‍टर्स

PPE किट (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) प्रोटेक्टिव गियर्स हैं, जिन्हें कोरोना वायरस पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्स को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है.

PPE kit making doctors sick, भीषण गर्मी में पहननी पड़ रही PPE, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, जलन जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे डॉक्‍टर्स

कोरोना वायरस महामारी (Corona virus epidemic) से देश को उबारने के लिए अस्पतालों में लगातार सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को अब बचाव के पहनी जाने वाली पीपीई किट यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (Personal protective equipment) बीमार कर रही है, क्योंकि तापमान सामान्य से ज्यादा है और कोविड वार्ड में कमरे को ठंडा करने की सुविधा यानी एयरकंडीशन का प्रयोग प्रतिबंधित है. ऐसे में आठ घंटे तक पीपीई किट को पहनकर अपनी सेवाएं देने वाले चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ डिहाइड्रेशन और चक्कर आने तथा हार्ट बीट बढ़ने जैसी परेशानियों का शिकार हो रहे हैं. पीपीई किट पहनने वाले कई डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ कुछ दिनों में मौसम के गर्म होने पर डिहाइड्रेशन, सिर दर्द, आंखों में जलन और त्वचा रोग का शिकार हुए हैं. जबकि कई बेहोश भी हो गए. इसके बावजूद कोविड-19 वार्ड में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ गंभीर मरीजों के इलाज में जुटे हुए हैं.

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आपको बता दें कि पीपीई किट (PPE Kit) पहनने के बाद लगातार आठ घंटे तक डॉक्टर खाने या पीने कि चीजों से दूर रहते हैं. उन्हें वॉशरूम जाने से भी परहेज करना होता है. मोबाइल समेत अन्य रोजाना के उपकरणों को भी खुद से दूर रखना होता है. जब ड्यूटी पूरी होती है, तब वह सेनेटाइजेशन रूम में जानकर पीपीई किट को उताकर कचरे के डब्बे में फेंकते हैं और फिर सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं.

कोविड का इलाज कर रहे तमाम डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ बीते दो माह में कोरोना (Corona) वायरस के संक्रमण का शिकार हुए हैं. देश के कई अस्पतालों में पीपीई किट ने कोरोना वॉरियर्स की तबीयत को नासाज किया है. उन्हें पीपीई किट पहनने के बाद शरीर को हवा नहीं मिल पाती. पसीना इतना अधिक आता है कि पूरे कपड़े भीग जाते हैं. पसीना आखों तक आ जाता है, जिससे जलन शुरु हो जाती है. लगातार ग्लब्स पहने से स्किन प्रॉब्लम होना शुरु हो गई है. पीपीई किट पहनने से पहले हेड कवर लगाया जाता है, जिससे सिर दर्द होने लगता है. जबकि लगातार मास्क लगाने की वजह से सांस लेने में दिक्कत होनी शुरु हो जाती है. इससे हार्ट बीट बढ़ जाती है.

PPE kit making doctors sick, भीषण गर्मी में पहननी पड़ रही PPE, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, जलन जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे डॉक्‍टर्स

हाल ही में एम्स इमरजेंसी मेडिसिन की डॉक्टर डयूटी के दौरान बेहोश हो गई थी. उस समय डॉक्टर ने पीपीई किट पहनी हुई थी. डॉक्टर की नाइट डयूटी थी. डॉक्टरों का कहना है कि वो पीपीई किट के कारण बेहोश हुई थी और उनका डि-हाइड्रेशन का इलाज किया गया. वहीं, सफदरजंग की एक अन्य नर्स भी डयूटी के दौरान बेहोश हो गई थी.

बिना एसी, भीड़ और पीपीई किट से हो रही है दिक्क्तें

कोरोना (COVID-19) वायरस संक्रमण तेजी से फैल रहा है इसलिए डॉक्टरों को गैर कोविड वाले क्षेत्रों में भी पीपीई पहनकर जाना होता है. यह किट सात से आठ घंटे पहननी पड़ती है. ठंड में वायरस के ज्यादा फैलने के डर से अस्पताल में एसी भी नहीं चलता और पंखे की हवा का तो इसे पहनने वाले को पता भी नहीं चलता.

क्या है पीपीई किट

पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट प्रोटेक्टिव गियर्स हैं, जिन्हें कोरोना वायरस पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्स को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है. इन गियर्स को पहनने से डॉक्टर्स वायरस के संपर्क में आने से खुद को अधिक से अधिक बचा पाते हैं. पीपीई किट में चश्मे, फेस शील्ड, मास्क, ग्लव्स, गाउन, हेड कवर और शू कवर शामिल होते हैं.

कैसे करें पीपीई किट का इस्तेमाल

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के मुताबिक पीपीई किट पहनने में सबसे पहले गाउन, फेस शील्ड, मेडिकल मास्क या प्रोटेक्शन मॉस्क, ग्लव्स फिर शूज पहने जाते है. किट को उतारने के लिए अपने या किसी के भी संपर्क में आने से बचें, पहले सबसे भारी गियर को उतारें फिर गाउन और ग्लव्स कूड़े में फेंक, हाथ धोएं, फिर फेस शील्ड को पीछे से उतारकर कूड़े में फेंकें, चश्में और शूज पर से भी कवर को उतारकर हाथ साफ करें.

पीपीई किट के नियम और मानक

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (Personal protective equipment) किट तैयार करने के लिए नियम बनाया है कि जो भी कंपनी किट तैयार करेगी, उसे कपड़ा मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी. किसी भी कंपनी द्वारा तैयार किट का पहले प्रयोगशाला में टेस्ट होगा. इसके लिए देश में दो प्रयोगशालाएं अधिकृत की गई हैं. इनमें साउथ इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (सिटरा) कोयंबटूर में और दूसरी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिसमेंट (डीआरडीई) ग्वालियर मध्यप्रदेश में है. किट के टेस्ट में पास होने के बाद मंत्रालय कंपनी को प्रमाण पत्र देगा. ये प्रमाण पत्र निर्धारित समय के लिए ही मान्य होगा. जो पीपीई किट बनेगी उस किट पर निर्माता कंपनी का स्टीकर लगेगा. स्याही से उस पर प्रोडक्ट का नाम लिखा जाएगा.

पीपीई किट कि गुणवत्ता से भी हो रहा खेल

कोरोना संकट काल में पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) किट की उपयोगिता बढ़ी है. सरकारी अस्पताल हो या निजी नर्सिंग होम हर जगह मरीजों की देखभाल करने वाले चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी खुद को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पीपीई किट पहनकर कार्य कर रहे हैं, पर कुछ लोग निजी स्वार्थ के कारण मानकों को ताक पर रखकर पीपीई किट तैयार रहे हैं. इन फैक्ट्रियों में पहले रेडीमेंट कपड़े तैयार किए जाते थे. अब इन मशीनों पर पीपीई किट तैयार की जा रही है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से लोगों ने कपड़ा मंत्रालय से इस बारे में शिकायत की है.

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खास बात ये है कि शिकायतों में साफ किया गया है कि प्राइवेट अस्पताल कम कीमत के चक्कर में ऐसी पीपीई किट खरीद रहे हैं जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं है और वह मानक पर भी खरे नहीं उतरते यानी सीधे तौर पर वह डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जान जोखिम में डाल रहे हैं. एक अनुभवी पीपीई किट निर्माता के मुताबिक पीपीई किट में सिंगल जिप लगती है. उसके कपड़े का मैटेरियल कपड़ा मंत्रालय द्वारा तय किया गया है. साथ ही किट निर्माण के लिए पूर्व अनुमति और उसके बाद में टेस्ट किया जाता है कि किट मानकों के मुताबिक है या नहीं. नकल और असल का खेल इसलिए हो रहा है, क्योंकि मानक के मुताबिक पीपीई किट का दाम दोगुने के करीब पहुंच जाता है, जबकि उसकी नकल आधे दाम पर मिलती है. ऐसे में प्राइवेट अस्पताल पैसे बचा रहे हैं.

भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

भारत महज 60 दिनों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है. दो महीनों मे उद्योग 56 गुना बढ़ गया है. भारत में 600 से अधिक कंपनियां पीपीई का उत्पादन करने के लिए प्रमाणित हैं और देश आज एक दिन में पीपीई के 4.5 लाख किट बनाती है.

इन्वेस्ट इंडिया स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट रिसर्च यूनिट रिपोर्ट के लेखक मिषिका नय्यर और रेम्या लक्ष्मणन का कहना है कि भारत में 15.96 लाख पीपीई किट की सूची है और अन्य 2.22 करोड़ किट उद्योग द्वारा फर्म के आदेशों के खिलाफ निर्मित किए जा रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंगलुरु एक बड़ा पीपीई हब बन गया है, जहां आधा उत्पादन होता है. इसका बाकी हिस्सा पूरे देश में फैला हुआ है- तिरुप्पुर, कोयम्बटूर, चेन्नई, अहमदाबाद, वडोदरा, लुधियाना, भिवंडी, कोलकाता, नोएडा और गुरुग्राम. अरविंद मिल्स, जेसीटी मिल्स और वेलस्पन जैसे टेक्सटाइल दिग्गज अब इस व्यवसाय में हैं. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जहां सबसे ज्यादा पीपीई किट बनाए जा रहे हैं. खास बात यहां यह है कि केवल दो महीने से भी कम समय के अंदर भारत व्यक्तिगत सुरक्षा परिधान (पीपीई) का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है.

  • कपड़ा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार ने पीपीई की क्वालिटी और मात्रा दोनों में सुधार करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, जिसके कारण भारत दो महीने से भी कम समय में पीपीई का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है. अब भारत इस मामले में केवल चीन से पीछे है. मंत्रालय यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि सप्लाई चैन में केवल प्रमाणित कंपनियां ही पीपीई की आपूर्ति करें.
  • जनवरी में देश में केवल 2.75 लाख पीपीई किट (आयातित) उपलब्ध थे. मई में केंद्र-राज्य बफर स्टॉक में लगभग 16 लाख से ज्यादा पीपीई किट हैं. आयात के साथ सरकार ने देश में पीपीई किट के घरेलू निर्माताओं की पहचान की और मौजूदा समय 600 कंपनियां पीपीई किट बना रही हैं. सरकार ने केंद्र और राज्य द्वारा संचालित अस्पतालों को 22 लाख से ज्यादा पीपीई किट वितरित किए हैं.
  • केंद्र सरकार के अधिकार प्राप्त समूह-3 ने सूचित किया है कि जून 2020 तक पीपीई किटों की कुल अनुमानित मांग 12-12 करोड़ होगी. 2.22 करोड़ पीपीई किट के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं, जिनमें से 1.42 करोड़ के ऑर्डर घरेलू निर्माताओं के पास रखे गए हैं और 80 लाख पीपीई किट आयात किया गया है.

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