Coronavirus से लड़ाई में क्या है विदेश मंत्रालय की भूमिका?

विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) की Covid cell में अभी 75 अधिकारी काम कर रहे हैं इसमें ज्यादातर भारतीय विदेश सेवा के युवा और नए अधिकारी हैं जो काम के घंटों की परवाह किये बगैर पूरी ऊर्जा से लगे हैं.

COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में भले ही देश और दुनिया ने अपने आप को लॉकडाउन (Lockdown in india) कर लिया हो लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय इस लड़ाई में लगातार अहम भूमिका निभा रहा है.

क्या है विदेश मंत्रालय का COVID CELL!

कोरोना(Coronavirus) संकट को देखते हुए शुरुआत में ही विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) के एडिशनल सेक्रेटरी दममू रवि के अगुवाई में एक स्पेशल सेल का गठन कर लिया गया था. विदेश मंत्रालय की इस Covid cell में अभी 75 अधिकारी काम कर रहे हैं इसमें ज्यादातर भारतीय विदेश सेवा के युवा और नए अधिकारी हैं जो काम के घंटों की परवाह किये बगैर पूरी ऊर्जा से लगे हैं. इस सेल ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को इस संकट के समय मदद पहुंचाने में बड़ी भूमिका अदा की है.

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कोरोना को लेकर उपजी परिस्थिति में भारत सरकार विभिन्न देशों से अपने खर्चे पर 2500 लोगों को लेकर वापस आयी जबकि यात्रा के बीच में फंसे 1600 भारतीयों को स्वदेश वापसी में मदद पहुंचाई गई. वहीं करीब 10,000 विदेशी नागरिकों को भारत से वापस भेजा गया. विदेशों में रह रहे भारतीयों की तरफ़ से मदद के लिए स्पेशल सेल में अबतक 3300 कॉल और 2200 ईमेंल के जरिये संपर्क किया गया है.

इसके अलावे कोरोना के खिलाफ दूसरे देशों की लड़ाई के तरीके, उसमें आजमाए गए उपाय और दूसरी जानकारियों को लेकर भी एक डेटाबेस तैयार किया गया गया जिसे सरकार के दूसरे मंत्रालयों से साझा किया जा रहा है.

विदेश में रहने वाले भारतीयों का क्या होगा ? 

आने-जाने वाली सभी तरह की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी के मद्देनजर विभिन्न देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की वतन वापसी की इच्छा को लेकर विदेश मंत्रालय के उच्च स्तर के सूत्र ने टीवी 9 भारतवर्ष से कहा कि इस नाज़ुक हालात में पीएम मोदी ने सबसे अपील की है कि जो जहां है, वही रहे. संबधित देश में मौजूद भारतीय राजनयिकों की तरफ से लगातार जरूरी मदद पहुंचाने की कोशिश जारी है.

कोरोना संकट के दौरान मोदी की विदेश नीति

कोरोना के इस वैश्विक संकट से निपटने से लिये स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले सप्ताह में ही 10 देशों के प्रमुखों से बात कर चुके हैं जिसमें ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, कतर,इजरायल और यूरोपीय यूनियन शामिल है. इससे पहले पीएम ने सार्क सदस्य देशों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत का नेतृत्व किया और जी-20 संगठन के नेताओं की भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुए सम्मेंलन के लिए पहल करते हुए सऊदी किंग और ऑस्ट्रेलिया के पीएम से बात की थी. जी- 20  के वीडियो सम्मेंलन में भी पीएम ने कोरोना के समाधान के लिए सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की थी.

पीएम ने 30 मार्च को विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करते हुए निर्देश दिया कि वो अपने – अपने देशों में रह रहे सभी भारतीयों तक मदद के लिए पहुंचे,  साथ ही कुछ देशों में उप्लब्ध होने वाले PPE, वेंटिलेटर, एन-95 और सर्जिकल मास्क की आपूर्ति की कोशिश करें ताकि घरेलू जरूरतों में मदद मिल सके. इसके अलावे अगर कोई देश या विदेशी संगठन कोरोना संकट के समय भारत की मदद करना चाहता है तो वो पीएम केयर फण्ड में डोनेशन दे सकता है.

इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अमेंरिका के विदेश मंत्री समेंत कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है. अमेंरिकी विदेश मंत्री से जयशंकर ने आग्रह किया है कि अमेंरिका में रहने वाले जिन भारतीय छात्रों का वीजा खत्म हो रहा है उन्हें तत्काल राहत प्रदान की जाय.

तबलीग जमात पर क्या करेगा विदेश मंत्रालय 

टीवी9 भारतवर्ष को विदेश मंत्रालय के उच्च स्तर के सूत्र ने जानकारी दी है कि इस मामले में विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है और भारतीय कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

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