Exclusive: नाना जो मक्खी भी नहीं मारते थे, वो जान लेने पर उतारू थे… पढ़ें सुनंदा वशिष्ठ की आपबीती

सुनंदा ने अपने भाषण में कश्मीरी हिंदुओं की बात प्रमुखता से रखी थी. इस पर उन्होंने कहा, 'आजाद भारत में एक ही एथनिक क्लीन्जिंग हुई है वो कश्मीरी हिंदुओं की हुई है, लेकिन हमारा कोई जिक्र कभी नहीं हुआ. इस पर जमकर राजनीति हुई, लेकिन ये मुद्दा कभी उठाया ही नहीं गया. हालांकि इसके बारे में झूठ बहुत बोला गया.'

अमेरिकी कांग्रेस में कश्मीर मुद्दे पर चल रही सुनवाई के दौरान अपने भाषण को लेकर चर्चा में आईं कॉलमनिस्ट सुनंदा वशिष्ठ का कश्मीर से खास रिश्ता रहा है. उनसे कश्मीर से उनके रिश्ते…आपबीती और अमेरिका में उनके भाषण के बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने खास बातचीत की.

सुनंदा ने बताया कि उन्हें 12 नवंबर को इस सुनवाई में जाने के बारे में पता चला. पैनलिस्ट के नाम पहले ही सामने आ गए थे, जिन्हें देखकर उन्हें लगा कि ये तो पूरी तरह से भारत के विरोध में होने वाला है. वहां कोई भी भारत का पक्ष रखने वाला नहीं था. लेकिन काफी लोगों की मेहनत से मुझे बुधवार को वहां भारत का पक्ष रखने का न्योता मिला और इसके बाद में वहां गई और उसके बाद का सभी को पता है.

अमेरिका में उनके भाषण के चलते कश्मीर का पक्ष दुनिया भर में गूंज उठा, इसपर सुनंदा ने कहा कि यह सत्य की विजय है और असल में गूंज सत्य की हुई है. उन्होंने कहा मैं एक थी वो चार थे. पैनल में कोई समानता नहीं थी, लेकिन मुझे पता है कि सच जब आपके साथ होता है तो आपको घबराने की कोई जरुरत नहीं होती. अपने भाषण की तैयारियों के बारे में सुनंदा ने कहा कि उन्होंने वहां जाने से पहले कोई खास तैयारी नहीं की, उन्होंने बस आपबीती सुनाई.

सुनंदा ने अपने भाषण में कश्मीरी हिंदुओं की आवाज को हमेशा नकारे जाने की बात कही थी. इसके बारे में टीवी9 भारतवर्ष पर उन्होंने कहा कि कभी भी वहां कश्मीरी हिंदुओं की आवाज वहां तक (अमेरिकी कांग्रेस तक) नहीं पहुंची है. सुनंदा ने कश्मीरी हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा, “ISIS वाले जैसा करते हैं उनके साथ वैसा ही बर्ताव हुआ था. बहुत लोगों ने तो अब ISIS को जाना जबकी हम काफी पहले ही ऐसा बर्ताव देख चुके हैं.”

जब मेरे सीधे-साधे नाना ने हमें मारने के लिए उठा ली कुल्हाड़ी

टीवी9 भारतवर्ष पर अपनी कहानी सुनाते हुए सुनंदा ने कहा कि वहां (अमेरिकी कांग्रेस) जाने से पहले मैंने अपनी मां से बात की थी, तब उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया और सच कहने के लिए कहा. सुनंदा ने अपना आंखों देखा किस्सा सुनाते हुए कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुआ बर्ताव समझाया.

उन्होंने कहा कि उस समय हमें इतना डराया गया कि मेरे नाना जो मक्खी भी नहीं मारते थे वो इतना डर गए थे कि घर में पड़े सब्जी काटने के चाकू और कुल्हाड़ी लेकर दरवाजे पर खड़े हो गए. वो कह रहे थे कि कोई यहां आया तो उनके हाथ लगने से पहले ही मैं तुम्हें और तुम्हारी मां को मार दूंगा. सुनंदा कहती हैं कि वो कैसा लम्हा होगा जब एक बाप को अपने बच्चों से ऐसा कहना पड़ रहा हो.

सुनंदा ने अपने भाषण में कश्मीरी हिंदुओं की बात प्रमुखता से रखी थी. इस पर उन्होंने कहा, ‘आजाद भारत में एक ही एथनिक क्लीन्जिंग हुई है वो कश्मीरी हिंदुओं की हुई है, लेकिन हमारा कोई जिक्र कभी नहीं हुआ. इस पर जमकर राजनीति हुई, लेकिन ये मुद्दा कभी उठाया ही नहीं गया. हालांकि इसके बारे में झूठ बहुत बोला गया.’

उन्होंने कहा, ‘कश्मीर हिंदुओं कि ट्रेजिडी ये रही है कि हमारी बात किसी ने कहीं रखी नहीं है और हमें खारिज कर दिया गया है. मैंने सिखों की बात की. मैंने उन मुसलमानों की भी बात की जो हमें बचाने के लिए मारे गए और उनके बारे में कोई नहीं जानता. मैंने विशेष तौर पर हिंदुओं की बात इसलिए की क्योंकि उनकी बात करने वाला वहां (अमेरिकी कांग्रेस में) कोई नहीं था. बाकी लोगों की बात रखने के लिए कई लोग थे लेकिन हिंदुओं की बात किसी ने नहीं रखी इसलिए ये मेरा फर्ज था उनकी बात को प्रमुखता से रखूं.

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