धोखे से रेपिस्ट का चेहरा देखने पर 1300, मिलने पर लगता है डबल झटका

नयी दिल्ली किसी का मर्डर करके जेल जाने वाले की यहां न कोई पैरवी करता है और न ही कोई सलाखों के पीछे बंद उस शख्स से मिलने की जुर्रत. और यदि कोई ऐसा भूले भटके कर भी देता है तो उससे वसूला जाता है 50 से डेढ़ लाख तक का भारी भरकम जुर्माना. कुछ […]

नयी दिल्ली
किसी का मर्डर करके जेल जाने वाले की यहां न कोई पैरवी करता है और न ही कोई सलाखों के पीछे बंद उस शख्स से मिलने की जुर्रत. और यदि कोई ऐसा भूले भटके कर भी देता है तो उससे वसूला जाता है 50 से डेढ़ लाख तक का भारी भरकम जुर्माना. कुछ इस तरीके का हुक्म जारी होता है मेरठ से करीब पचास किलोमीटर दूर बसे एक गांव से.

बसई बुज़ुर्ग गांव के लोगों की सपेरे समुदाय पर गहरी आस्था है और अगर आस्था है तो जाहिर है उनके हर फैसले सर आँखों पर होंगे. छाता तहसील के चौमुंहा ब्लॉक में बसे इस गांव को सपेरे समाज की सर्वोच्च अदालत का दर्जा प्राप्त है. यहां की अदालत में तारीख पर तारीख नहीं मिलती. समाज से जुड़े किसी भी मामले पर सिर्फ तीन सुनवाई के बाद ही फैसला सुना दिया जाता है.

बाहर गया तो रज़ामंदी कराके सुनवाई
नीम के पेड़ के नीचे बैठकर फैसला सुनाने वालों के पास न कोई डिग्री है और न ही वकीलों के पास. लेकिन इनके हुक्म की उदूली करने का साहस किसी में भी नहीं होता. सुनवाई के लिए देशभर के सपेरों के समाज के मामले यहां आते हैं. छपी रिपोर्टों के मुताबिक़ यहाँ के एक प्रमुख पंच ने बताया कि आपसी विवादों को लेकर हम थाने कचहरी का रुख नहीं करते. यदि चले भी गए तो समझौता कराकर थाने से मामला वापस ले अपनी कोर्ट का रुख करते हैं. वो बताते हैं कि एमपी, हरियाणा, राजस्थान, यूपी समेत देश के कई हिस्सों से लोग अपने विवाद निपटाने यहां आते हैं.

सुनवाई पर ना आये तो 10 हज़ार
इस अदालत में बलात्कार के आरोपी को पापी बताकर उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है. उससे धोखे से मिलने वालों पर 1300 जबकि जानबूझकर मिलने वालों पर 2600 का जुर्माना लगाया जाता है. कोर्ट सुनवाई पर न आने वालों पर भी सख्त होती है. रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे लोगों पर तकरीबन 10 हजार तक के दंड का प्रावधान है. हालांकि हत्या जैसे मामले पर कानून अपना काम करता है पर ये कुछ फैसले उसकी पैरवी और मिलने का मन रखने वालों के लिए सुनाते हैं.