CRPF के डीजी बोले, ‘जम्मू कश्मीर में नेताओं के बाहर आने पर भी अब नहीं बिगड़ेगी हालत’

डीजी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में 70 हजार सीआरपीएफ जवान आतंकवादी घटनाओं से मुकाबला करने और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तैनात हैं. वहां हालात सुधर रहे हैं और इसमें जम्मू कश्मीर पुलिस का बड़ा योगदान है.

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के नए महानिदेशक (DG) एपी माहेश्वरी ने मंगलवार को कहा कि पुलवामा हमले के बाद हमने मोबिलिटी, हथियार नेविगेशन, ड्रिल्स और क्षमता को मजबूत किया है, क्योंकि विरोधी भी लगातार बदलते रहते हैं. उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ का काम आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना है. इसलिए हम पुलिस और एजेंसी के साथ बेहतर तालमेल पर लगातार काम कर रहे हैं.

माहेश्वरी ने बताया कि सीआरपीएफ ने आंतरिक रूप से देश को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपने तीन लाख से अधिक कर्मियों का मेगा ऑडिट कराया है. यह कदम जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह की आतंकियों के साथ मिले होने के खुलासे के बाद उठाया गया है. उन्होंने डीएसपी देविंदर सिंह मामले को बेहद शर्मनाक घटना बताया.

कश्मीर में अब नहीं बिगड़ेगा माहौल

गुरुग्राम के कादरपुर में डीजी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में 70 हजार सीआरपीएफ जवान आतंकवादी घटनाओं से मुकाबला करने और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तैनात हैं. वहां हालात सुधर रहे हैं और इसमें जम्मू कश्मीर पुलिस का बड़ा योगदान है. सीआरपीएफ स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करती है. उन्होंने कहा कि कश्मीर में अब हालात नहीं बिगड़ेंगे.

दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षा बल है सीआरपीएफ

माहेश्वरी ने कहा कि सीआरपीएफ देश का ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षा बल है. इसके जवान जम्मू कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तर राज्य में भी बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ ही खुफिया तंत्र को भी काफी मजबूत किया जा रहा है. इसके अलावा सुरक्षा बलों को साइबर प्रूफ भी किया जा रहा है. हम किसी भी तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी करते रहते हैं.

साल 2003 में माओवादियों के खिलाफ उठाई बंदूक

डीजी एपी माहेश्वरी ने सीआरपीएफ जवानों के बलिदान पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि देश के लिए जान देने में हम पीछे नहीं हैं. अबतक हमारे 2200 से अधिक जवानों ने बलिदान दिया है. उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ जवानों ने साल 2003 में माओवादियों के खिलाफ बंदूक उठाया और आज यह समस्या काफी घट गई है. इसी तरह वीआईपी सुरक्षा के मामले में भी सीआरपीएफ का भरोसा सबसे ज्यादा किया जाता है. फिलहाल देश के 55 वीआईपी की सुरक्षा सीआरपीएफ कर रही है.

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