जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने न्यूज रिपोर्ट का किया खंडन, कहा- LG ऑफिस से नहीं आई कोई सिफारिश

18 जनवरी 2020 को छपी न्यूज रिपोर्ट का जिक्र करते हुए गृह विभाग ने साफ किया कि निलंबित अधिकारी दविंदर सिंह के प्रमोशन से जुड़ी कोई अलग फाइल को गृह विभाग में प्रोसेस नहीं किया गया है, जब वह एसपी थे.

Jammu and Kashmir Home Department denied the news report on davinder singh, जम्मू कश्मीर गृह विभाग ने न्यूज रिपोर्ट का किया खंडन, कहा- LG ऑफिस से नहीं आई कोई सिफारिश

जम्मू और कश्मीर के गृह विभाग ने मंगलवार को एक न्यूज रिपोर्ट का जोरदार खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि दविंदर सिंह के प्रमोशन के लिए उप राज्यपाल के ऑफिस से स्पेशल निर्देश आए थे. एशियन एज न्यूजपेपर में 18 जनवरी 2020 को छपी न्यूज रिपोर्ट का जिक्र करते हुए गृह विभाग ने साफ किया कि निलंबित अधिकारी दविंदर सिंह के प्रमोशन से जुड़ी कोई अलग फाइल को गृह विभाग में प्रोसेस नहीं किया गया है, जब वह एसपी थे. गृह विभाग ने यह भी साफ किया कि न ही कभी उप राज्यपाल के ऑफिस से दविंदर की फाइल जल्दी क्लियर करने का कोई निर्देश आया.

इस न्यूज रिपोर्ट को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए विभाग की ओर से कहा गया कि दीदार सिंह के पुत्र दविंदर सिंह, जो कि पुलवामा के त्राल के रहने वाले हैं, को नवबंर 1990 में सब इंस्पेक्टर नियुक्त किया गया था. उन्हें फरवरी 2001 तक कश्मीर जोन में SOG में तैनात किया गया. उन्हें आउट ऑफ टर्न आधार पर पुलिस हेडक्वार्टर ने 1997 में इंस्पेक्टर के तौर पर प्रमोट किया. इसके बाद उन्हें मार्च 2000 में प्रमोशन के बाद DSP बनाया गया.

गृह विभाग ने बताया, निलंबित अधिकारी सितंबर 2019 तक DSP के रूप में काम कर रहे थे, क्योंकि लंबे समय से चली आ रही वरिष्ठता विवादों के कारण जम्मू कश्मीर पुलिस में कोई नियमित प्रमोशन नहीं किया जा सकता था. वरिष्ठता का ये विवाद सितंबर 2019 में सुलझा, तब 153 डिप्टी एसपी को रेगुलराइज किया गया. रेगुलराइजेशन का फायदा दविंदर सिंह को भी मिला. विभाग ने आगे कहा कि, अगली कड़ी में सामान्य कोर्स के तहत सरकार द्वारा DSP की वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अक्टूबर 2019 में पूरी हुई.

इस लिस्ट में दविंदर सिंह को भी शामिल किया गया. फाइनल सीनियोरिटी को अंतिम रूप दिया गया और प्रकाशित होने के बाद, नियमों के मुताबिक सख्ती से पात्रता, वरिष्ठता और उपलब्ध जगहों के आधार पर एसपी के पद पर DSP के प्रमोशन को बढ़ावा दिया. गृह विभाग ने आगे कहा कि “यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक है कि राज्य का विभाजन 30 अक्टूबर की आधी रात को हुआ था, जबकि वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया इससे पहले ही शुरू हो गई थी.”

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