महिलाओं से बर्बरता पर DCW चीफ की पीएम मोदी को चिट्ठी, रखीं ये 6 डिमांड

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के खिलाफ आज से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ गई है.

हैदराबाद वेटनरी डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत के बाद देश फिर से उसी दिन को याद कर रहा है, जब साल 2012 में निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी. उस समय भी लोग आरोपियों को सजा दिलाने के लिए मांग कर रहे थे और अब फिर आक्रोशित देश की जनता डॉक्टर के आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग कर रही है.

इसी बीच दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के खिलाफ आज से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ गई है. इससे पहले स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया है और साथ ही रेप जैसी घटनाएं देश में फिर से न हो, इसके लिए पीएम मोदी के सामने अपनी चिट्ठी के जरिए 6 डिमांड भी रखी हैं.

स्वाति मालीवाल ने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री जी, जैसा कि आप जानते हैं, देश मे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध चरम सीमा पर पहुंच चुका है. एक हैदराबाद की डॉक्टर लड़की का बर्बरता से ना सिर्फ भेड़ियों ने गैंगरेप किया बल्कि उसको जिंदा जला दिया. कल एक मासूम 6 साल की स्कूल की छात्रा के साथ राजस्थान में एक दरिंदे ने इतनी बर्बरता से रेप किया कि उसकी आंखें तक बाहर निकाल ली गई.”

“देश के सभी कोनों में बेटियां ऐसे ही जघन्य अपराध की शिकार हो रही हैं. ये दोनों बेटियां हमारे बीच में नहीं है, पर उनकी चीखें हमें चैन से बैठने नहीं दे रही हैं. कितना दर्द उन्होंने झेला होगा यह सोचकर भी रूह कांप जाती है.”

बलात्कार की घटानों पर नहीं लगा कोई अंकुश

“पिछले 3 सालों में दिल्ली महिला आयोग ने 55,000 केस में सुनवाई की है. 2.15 लाख कॉल्स 181 हेल्पलाइन पर अटेंड किए हैं. 75,000 ग्राउंड विजिट की हैं,  33,000 कोर्ट केस में पीड़िताओं की मदद की है, 11,000 काउंसलिंग सेशन और 200 से ज्यादा सुझाव केंद्र व राज्य सरकारों को दिए हैं. दिल्ली महिला आयोग देश का इकलौता महिला आयोग है जो रविवार और शनिवार एवं दिन व रात को भी काम करता है, लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी बेटियों के साथ बलात्कार होता है तो यह सब बेमानी लगता है.”

“पिछले साल छोटे बच्चों के बलात्कारियों को 6 महीने में फांसी की सजा हो, इस मांग को लेकर मैंने आमरण अनशन किया था. मेरे अनशन के दसवें दिन पर आपने देश में कानून बनाया कि छोटे बच्चों के बलात्कारियों को 6 महीने में फांसी की सजा दी जाएगी. साथ ही आपने यह कानून भी बनवाया था कि महिलाओं के रेप केस की सुनवाई 6 महीने में खत्म होगी. यह आश्वासन दिया गया था कि 3 महीने में पूरे देश की पुलिस के संसाधन बढ़ा दिए जाएंगे. पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ा दी जाएगी.”

“आपके इन सभी आश्वासन के बाद ही आपकी इस बेटी ने अपना अनशन दसवें दिन पर तोड़ा था, लेकिन बहुत दुख की बात है कि बलात्कार की घटनाओं पर आज तक कोई अंकुश नहीं लगा, क्योंकि सरकारों ने कानून पारित होने के बाद इस दिशा में कोई भी कार्य नहीं किया. इसके चलते एक मजबूत कानून मज़ाक बनकर रह गया और आज हर दिन देश की बेटियां कुर्बान हो रही हैं.”

“सिर्फ कानून बना देना ही काफी नहीं है, उसको लागू भी करना पड़ेगा. आपसे गुजारिश है कि तत्काल सभी रेपिस्ट्स को 6 महीने में फांसी की सजा का कानून लागू हो और इसके लिए जरूरी सभी तंत्र शुरू किए जाएं.”

“इस तंत्र को लागू करने के लिए यह निम्नलिखित मांगें पूरी करना अत्यंत जरूरी है और इनको मनवाने के लिए मैं आज से आमरण अनशन पर बैठ रहीं हूं. मैं आपको आश्वस्त करती हूं कि  जब तक मेरी मांग पूरी नहीं की जाएंगी तब तक मैं अनशन नहीं तोड़ूंगी. मैं आशा करती हूं कि आप अपनी बेटियों की चीखें ज़्यादा दिन तक अनसुनी नहीं करेंगे.”

पीएम मोदी के सामने रखी गईं ये 6 डिमांड

1. निर्भया के दोषियों को तुरंत फांसी की सजा दी जाए.

2. बलात्कारियों को 6 महीने में फांसी हो, इसके लिए सभी कानूनों में संशोधन कर, केस के निर्वाहन व सभी अपील, मर्सी पेटिशन की समय सीमा कानून में 6 महीने की निर्धारित हो. जब तक कानून में समय सीमा का उल्लेख नहीं होता तब तक कुछ नही बदलेगा.

3. देश की सभी राज्य पुलिस को पर्याप्त पुलिसकर्मी दिए जाएं. दिल्ली में आज भी पिछले 13 साल से 66,000 पुलिसकर्मियों की कमी है. गृह मंत्रालय तुरंत 66,000 कर्मी दिल्ली पुलिस को प्रदान करें.

4. देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट की बहुत बड़ी कमी है. कई जिलों में या तो फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं ही नहीं या अगर हैं भी तो सामान्य कोर्ट से भी लचर हाल में है, इसलिये सभी जिलों में पर्याप्त कोर्ट बनें. दिल्ली में कम से कम 45 अन्य कोर्ट की ज़रुरत है, जो कि तुरंत बनाये जाएं.

5. सालों पहले बना निर्भया फंड का आज तक कोई ठोस इस्तेमाल नहीं हुआ. हजारों करोड़ रुपये जो देश की बच्चियों की जान बचाने में काम आ सकते थे, वो सालों से सरकारी खजानों में बंद हैं, इसिलए तत्काल यह फंड राज्यों में बांटा जाए और महिला सुरक्षा के लिए जरूरी तंत्रों को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जाए.

6. पुलिस की जवाब देही तय की जाए. भारत तकनीकी क्षेत्र में विश्व गुरु माना जाता है, लेकिन कितनी शर्म की बात है कि केंद्र पिछले 13 सालों से एक सॉफ्टवेयर नही बना पाई जो पुलिस का डिजिटलाइजेशन कर सकें. जरूरी है कि तुरंत सॉफ्टवेयर बनाया जाए एवं और भी अन्य तरीकों से पुलिस की जवाबदेही तय की जाए.

इसके बाद स्वाति मालीवाल ने लिखा, “मैं आशा करती हूं की मेरे इस तप से सरकार और समाज में रेप से लड़ने के ख़िलाफ़ जागरुकता एवं संवेदनशीलता बढ़ेगी. आपसे हाथ जोड़ के अपील है कि आप इन मुद्दों पर ठोस कदम तुरंत उठाएं. बहुत हो गया, अब एक भी और लड़की के साथ दुष्कर्म न होने पाए! – देश की बेटी.”

 

ये भी पढ़ें-  पिता ने घर-घर दूध पहुंचाया-वैन चलाई, खुद अखबार बेचते थे प्रियम गर्ग, यूं बने अंडर-19 टीम के कैप्‍टन

गाजियाबाद में दो मासूमों का घोंटा गला, आखिर 500 का नोट छोड़ 8वें फ्लोर से क्‍यों कूद गए वो तीन?