दिल्‍ली में प्रदूषण खत्‍म करने के लिए लगाए जाएंगे एंटी स्‍मॉग टावर, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा पूरा प्‍लान

CPCB ने सुप्रीम कोर्ट के सामने उन उपायों का भी जिक्र किया, जिनकी मदद से चीन ने प्रदूषण को खत्‍म किया है.

नई दिल्‍ली: दिल्‍ली की हवा में घुल रहे जहर से निजात पाने के लिए एयर प्‍योरिफायर टावर लगाने की तैयारी है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि प्रदूषण से छुटकारा पाने के लिए दिल्‍ली के सबसे ज्‍यादा प्रदूषित स्‍थानों का चयन किया जाए और वहां पर टावर लगाए जाएं.

ऑई-ईवन मामले पर Central Pollution Control Board (CPCB) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि प्रदूषण की वजह से विजिबिलिटी में बहुत कमी आ जाती है. CPCB ने बताया कि आईआईटी के साथ मिलकर इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं.

CPCB ने सुप्रीम कोर्ट के सामने उन उपायों का भी जिक्र किया, जिनकी मदद से चीन ने प्रदूषण को खत्‍म किया है. CPCB ने कोर्ट से कहा कि चीन में प्रदूषण को सोखने के लिए टावर लगाए गए हैं, जिनसे हवा को शुद्ध करने में काफी मदद मिली हैं. इसी तरह के टावर दिल्‍ली में भी लगाने की योजना है.

एयर प्‍योरिफायर टावर लगाने के प्रस्‍ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने CPCB से पूछा- कितना समय लगेगा? मुंबई आईआईटी के विशेषज्ञ ने बताया कि ये टावर एक किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण को सोखकर खत्म कर देंगे. चीन में इनका प्रयोग किया गया है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा समय में बहुत अधिक प्रदूषण है. कब तक ये टावर लगाए जाएंगे? साथ ही हाई रेंज वाले टावर लगाए जा सकते हैं क्या? इस सवाल के जवाब में मुंबई आईआईटी के विशेषज्ञ ने कहा कि ये टावर लगाने के लिए आठ महीने का समय और लगेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिल्ली का हाल बुरा है. एयर क्‍वलिटी इंडेक्‍स (AQI) 600 है, कैसे सांस ले रहे हैं लोग? ये बहुत ही खराब स्थिति है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल आपको जल्द पूरा करना होगा और स्थिति को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने होंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने CPCB से कहा कि वह सात दिन के अंदर अदालत को स्मोक रिडक्शन टावर के बारे में बताएं. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-‘प्रोजेक्ट वायु’ पर आपका अध्ययन कब पूरा होगा? CPCB कहा कि एक साल और लगेगा.

Odd-Even पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली सरकार से पूछे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबकुछ धीमी गति में नहीं किया जा सकता. आप इस पर जवाब दाखिल करें. CPCB ने कहा कि Odd-Even पर पिछले साल भी अध्ययन किया गया था. उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट की इस बात पर दिल्ली सरकार ने विरोध किया. जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यहां चर्चा हो रही है किसी नतीजे पर बात नहीं हो रही. दिल्ली सरकार कि ओर से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा ऑड-ईवन ऐप्का के कदमों पर आधारित है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम आपके डेटा पर नहीं जा रहे हैं. हमें यह जानना है कि इससे फायदा हो रहा है या नहीं? दिल्ली सरकार ने कहा कि अगर टू-व्‍हीलर्स को हटा दिया गया तो परेशानी हो जाएगी, क्योंकि सार्वजनिक वाहन इतने नहीं हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को कम करने में कितना असर ऑड ईवन ने दिखाया. हम सिर्फ यह जानना चाहते है कि इसका फायदा क्या रहा. दिल्ली सरकार ने कहा कि असली समस्‍या पराली जलाना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस स्कीम के बारे में जानना चाहते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कूड़ा जलाया जाना भी बड़ी समस्या है. उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, असली परेशानी वहां से है. आप ऑड ईवन के इतर भी कदम उठाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑड-ईवन के दौरान भी प्रदूषण नहीं कम हुआ. उसका कोई असर नहीं दिख रहा. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा पिछले साल क्या स्थिति रही थी. आपने जब इस साल लागू किया तो क्या पिछले साल के आंकड़ों पर गौर किया गया था.

दिल्ली सरकार ने पिछले साल अक्टूबर के आंकड़े बताए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले साल प्रदूषण कम था. इस साल जैसी स्थिति नहीं थी.
दिल्ली सरकार ने कहा कि ऑड-ईवन से 5 से 7% कि कमी प्रदूषण में आती है, जो पिछले तीन अध्ययन में है. इसके साथ प्राकृतिक अवस्था का प्रभाव आता है.