NaMo App की तर्ज पर अरविंद केजरीवाल लाए ‘AK’ एप, जानें क्‍या है खास

केजरीवाल ने कहा कि "सब लोगों ने एप बनाए हैं. पीएम ने भी बनाया है. संवाद का जरिया है तो हम भी लॉन्च कर रहे हैं."

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संवाद के लिए AK एप लान्‍च की है. उन्‍होंने लॉन्चिंग पर कहा कि ‘इस एप पर पार्टी और सरकार से जुड़ी सारी खबरें और जानकारी मिल सकती हैं.’ केजरीवाल ने कहा कि “दिल्ली मॉडल ऑफ गवर्नेंस, चाहे स्कूल हो, सीसीटीवी हो, सड़कें हों.. मॉडल से जुड़ी सारी खबरें मिलेंगी.”

कार्यकर्ताओं से संवाद मजबूत करने की रहेगी कोशिश: केजरीवाल

कुछ ही महीनों बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसको आम आदमी पार्टी हर धड़े को मजबूत करने में लगी है. बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘AK App’ लॉन्च की. केजरीवाल ने एप को लाने के पीछे के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि ‘आम आदमी पार्टी युवाओं की पार्टी है और देश की सबसे युवा पार्टी है.

AK एप, NaMo App की तर्ज पर अरविंद केजरीवाल लाए ‘AK’ एप, जानें क्‍या है खास

‘झूठी खबरों को नकारने में आसानी होगी’

मोबाइल एप को लाने के पीछे खास वजह फेक न्यूज़ को भी बताया जा रहा है,केजरीवाल ने कहा कि कभी-कभी झूठी खबरें फैलाई जाती हैं, अफवाहें उड़ाई जाती हैं. उनकी पुष्टि हम अब से इसी एप पर करेंगे. सबसे बड़ी बात मैं लोगों से खुद जुड़ सकता हूं. 9871010101 ये एफ डाउनलोड कर सकते हैं. वेबसाइट और गूगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड कर सकते हैं.

मोदी की राह पर केजरीवाल?

टीवी9 भारतवर्ष का सवाल- पीएम मोदी ने NaMo App लॉन्च किया, अब आप AK App लॉन्च कर रहे हैं, मान लिया जाए कि केजरीवाल पीएम मोदी की राह पर हैं?

केजरीवाल का जवाब- ‘हमें पता था ये सवाल ज़रूर पूछा जाएगा. यही कहूंगा कि सब लोगों ने एप बनाए हैं, पीएम ने भी बनाया है, संवाद का जरिया है तो हम भी लॉन्च कर रहे हैं.’

AK एप, NaMo App की तर्ज पर अरविंद केजरीवाल लाए ‘AK’ एप, जानें क्‍या है खास

दिल्ली के अंदरूनी प्रदूषण पर केजरीवाल का बयान

एप के लॉन्च पर पहुंचे केजरीवाल ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर कहा कि, हम मानते है कि हमारा घरेलू प्रदूषण भी है लेकिन ऐसा नहीं है. अगस्त-सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में प्रदूषण बढ़ गया, तो ऐसा क्यों हो गया?

प्रदूषण किस से कितना हो रहा है, ये तय करने की अभी कोई डिवाइस नहीं है. हम ऐसा डिवाइस लाने की कोशिश कर रहे है जिससे पता लग सके कि वाहनों से कितना प्रदूषण हो रहा है, कितना पराली से और कितना अन्य वजहों से. इसलिए जो भी डेटा जारी करने वाली एजेंसियां हैं, जिम्मेदारी से डाटा जारी करें.

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