कन्हैया कुमार पर नहीं चलेगा देशद्रोह का केस, दिल्ली सरकार ने पुलिस के अनुरोध को किया नामंजूर

फरवरी 2016 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम में कथित तौर पर देशद्रोही नारेबाजी किए जाने की खबरें आई थीं. इस घटना को लेकर देशभर में जेएनयू चर्चा का विषय बन गया था.
कन्हैया, कन्हैया कुमार पर नहीं चलेगा देशद्रोह का केस, दिल्ली सरकार ने पुलिस के अनुरोध को किया नामंजूर

दिल्ली सरकार ने पूर्व जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य छात्रों पर लगे देशद्रोह के आरोपों पर मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस के अनुरोध को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार का मानना है कि 9 फरवरी, 2016 को विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम के दौरान अभियुक्तों की गतिविधियां, “राज्य के खिलाफ देशद्रोह के समान नहीं हैं.” यह मामला 18 सितंबर को अदालत में पेश किया जाएगा.

दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय के मुताबिक, रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री के मद्देनजर, FIR में “राज्य के खिलाफ देशद्रोह और राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करने और हिंसा भड़काने का कोई मामला नहीं है. मालूम हो कि इस मामले में कन्हैया कुमार समेत 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र तैयार किए गए थे.

जेएनयू में कथित नारेबाजी के आरोप में दिल्ली पुलिस ने कन्हैया और अन्य 9 छात्रों के खिलाफ IPC की धारा 124 के तहत मामला दर्ज किया था. हालांकि दिल्ली के गृह मंत्री ने इस मामले पर कहा कि FIR नंबर 110/2016 के संदर्भ में पेश किए गए साक्ष्यों के मद्देनजर हिंसा भड़काकर राज्य के खिलाफ देशद्रोह और राष्ट्र की संप्रभुता पर हमले का कोई मामला नहीं बनता है.

मालूम हो कि फरवरी 2016 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम में कथित तौर पर देशद्रोही नारेबाजी किए जाने की खबरें आई थीं. इस घटना को लेकर देशभर में जेएनयू चर्चा का विषय बन गया था. इस घटना को लेकर दर्ज किए गए मामले में दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के साथ, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और अन्य छात्रों के खिलाफ देशद्रोह के अपराध के लिए चार्जशीट दाखिल की थी.

हालांकि देशद्रोह के मामले में चार्जशीट दाखिल करने से पहले दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार की मंजूरी लेनी जरूरी थी, जो कि उसने नहीं ली थी. इसको लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और मंजूरी लेकर दोबारा चार्जशीट दाखिल करने के लिए दो महीने का समय दिया था.

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