दिल्ली HC ने मानसिक रूप से बीमार बेघरों के Corona टेस्ट के लिए डमी फोन नंबर की दी अनुमति

वकील गौरव कुमार बंसल (Gaurav Kumar Bansal) ने याचिका में कहा था कि बेघर मानसिक रूप से बीमार लोगों को कोरोना महामारी (Corona Pandemic) में ना सिर्फ विशेष देखभाल की जरूरत है बल्कि सरकार और समाज की तरफ से उन्हें लगातार सहयोग किए जाने की भी जरूरत है.
Dummy phone number for corona test, दिल्ली HC ने मानसिक रूप से बीमार बेघरों के Corona टेस्ट के लिए डमी फोन नंबर की दी अनुमति

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को मानसिक रूप से बीमार बेघरों के कोरोना टेस्ट (Corona Test) से संबंधित जनहित याचिका का निपटारा करते हुए टेस्ट के लिए डमी फोन नंबर 9999999999 और पते के रूप में लैब या अस्पतालों का पता इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने वकील गौरव कुमार बंसल (Gaurav Kumar Bansal) की दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर दावा किया कि बेघर मानसिक रूप से बीमार मरीजों को गाइडलाइंस के मुताबिक अनिवार्य आईडी प्रूफ और मोबाइल नंबर के प्रावधानों की वजह से कोरोना टेस्ट कराने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

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ICMR ने अपने हलफनामे में कहा कि स्वास्थ्य सेवा राज्य सरकार का विषय है लिहाजा संबंधित राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को शिकायतों को दूर करने के लिए उचित प्रोटोकॉल को अपनाने पर विचार करना चाहिए और ‘टेस्ट/ट्रैक/ट्रीट’ की रणनीति का पालन सुनिश्चित करना चाहिए.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए निर्देश

चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की प्रेजेंटेशन पर विचार करे, COVID-19 टेस्ट के लिए संबंधित इलाके के पुलिस अधिकारी की आईडी का इस्तेमाल बेघर मानसिक रूप से बीमारों के आईडी प्रूफ के रूप में प्रयोग करें.

इससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह बिना किसी पहचान या पते के प्रमाण समेत मानसिक रूप से बीमार बेघर लोगों के लिए कोरोना टेस्ट की सुविधा के लिए गाइडलाइंस जारी करे.

क्या कहा दिल्ली सरकार ने

दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने अपने हलफनामे में कहा था कि मानसिक बीमारी या संदिग्ध मानसिक बीमारी वाले बेघर और निराश्रित व्यक्तियों के टेस्ट में शुरुआती समस्याएं उनके फोटो पहचान पत्र और वैध मोबाइल नंबर का ना होना है क्योंकि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार और ICMR के टेस्ट के लिए जारी दिशा-निर्देशों में ये अनिवार्य शर्तें हैं.

दिल्ली सरकार ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार बेघर लोगों को COVID-19 के टेस्ट समेत सभी स्वास्थ्य सेवाएं और देखभाल मिलनी चाहिए, घरों में रह रहे आम लोगों की तुलना में इन लोगों को कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) का खतरा ज्यादा है.

बेघर मानसिक रूप से बीमार लोगों की विशेष देखभाल

आपको बता दें कि याचिकाकर्ता वकील गौरव कुमार बंसल ने याचिका में कहा था कि बेघर मानसिक रूप से बीमार लोगों को इस महामारी में ना सिर्फ विशेष देखभाल की जरूरत है बल्कि सरकार और समाज की तरफ से उन्हें लगातार सहयोग किए जाने की भी जरूरत है.

हालांकि, कोरोनावायरस महामारी की इस संकट की घड़ी में सरकार के कंधों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी तो बढ़ेगी लेकिन बेघर मानसिक बीमार लोगों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने और उन्हें लागू करने से इन लोगों को इस जानलेवा वायरस से बचाया जा सकता है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 की धारा 3 (3) के मुताबिक यह सरकार का कर्तव्य है कि वह मानसिक रुप से बीमार लोगों के लिए जरूरी सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए.

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