मरीज को चक्कर कटवाने पर हाई कोर्ट की सख्ती, दिल्ली सरकार और अस्पताल पर 1.5 लाख का जुर्माना

नॉन कोविड (Non Covid-19) मरीजों के इलाज और ऑपरेशन की गाइडलाइंस को लेकर अस्पतालों में बनी भ्रम की स्थिति को साफ करने के लिए कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो बताएं कि दिल्ली में नॉन कोविड मरीजों के इलाज और ऑपरेशन को लेकर दिल्ली सरकार की गाइडलाइंस क्या है?
Delhi high court fined Delhi government, मरीज को चक्कर कटवाने पर हाई कोर्ट की सख्ती, दिल्ली सरकार और अस्पताल पर 1.5 लाख का जुर्माना

42 साल के एक मरीज की जान से खिलवाड़ और ऑपरेशन के लिए बार-बार क‌ई अस्पतालों के चक्कर कटवाने के मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए दिल्ली सरकार पर 50 हजार और भगवान महावीर अस्पताल पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. कोर्ट ने जुर्माने की राशि 1 हफ्ते के भीतर पीड़ित मरीज के खाते में जमा कराने के आदेश दिया. कोर्ट ने दिल्ली सरकार की फटकार लगाते हुए पूछा कि वह एक सप्ताह में रिपोर्ट दे कि मरीज का ऑपरेशन कब, कहां और कितने समय में होगा?

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा हालात में याचिकाकर्ता मरीज का इलाज 3 अस्पतालों में करवाया जा सकता है, जिसमें दीनदयाल उपाध्याय, GB पंत और भीमराव अंबेडकर अस्पताल शामिल हैं, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ने मरीज को 3 अगस्त को चेकअप के लिए बुलाया है, लेकिन उस दिन रक्षाबंधन है और अस्पताल की छुट्टी होगी. दिल्ली सरकार का जवाब सुनने के बाद हाई कोर्ट ने दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल को निर्देश दिया है कि वे 24 जुलाई तक मरीज का मेडिकल टेस्ट कर कोर्ट में रिपोर्ट दे.

5 महीने में ऑपरेशन के लिए काटे 3 अस्पतालों के चक्कर

याचिका के मुताबिक याचिकाकर्ता मरीज आंत की बीमारी से ग्रस्त हैं, जिसके इलाज के लिए नवंबर 2019 में उनका LNJP अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था. इसके बाद अस्पताल ने उन्हें दूसरे ऑपरेशन के लिए इसी साल 26 मार्च का समय दिया था, लेकिन ऑपरेशन होने से ठीक पहले कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया.

इतना ही नहीं दिल्ली में बढ़ते कोरोना संक्रमितों के चलते LNJP अस्पताल को कोविड डेडिकेटिड अस्पताल बना दिया गया. अस्पताल प्रशासन ने मरीज को ऑपरेशन के लिए पीतमपुरा स्थित भगवान अस्पताल रेफर कर दिया. अस्पताल में मरीज को ऑपरेशन के लिए 15 मई की डेट दी गई, लेकिन आरोप है कि वहां डॉक्टर ने मरीज को कोरोना होने की बात कहकर ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया, लेकिन मरीज की परेशानियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका.

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याचिका में कहा गया है कि मरीज में कोरोना के लक्षण नहीं होने की वजह से सरकारी अस्पतालों ने टेस्ट कराने से भी इनकार कर दिया जिसके बाद मरीज को एक बार फिर GTB अस्पताल में रेफर किया गया, लेकिन दिल्ली में लगातार कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते GTB अस्पताल को भी कोरोना अस्पताल घोषित कर दिया और 1 जून को GTB अस्पताल ने मरीज की आंत का ऑपरेशन करने से मना कर दिया.

जिसके बाद एक बार फिर LNJP अस्पताल ने मरीज को पीतमपुरा के भगवान महावीर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां मरीज को अपने सभी टेस्ट दोबारा से करवाने पड़े, लेकिन बावजूद इसके मरीज का आंत का ऑपरेशन फिर भी नहीं किया गया. आखिर में मरीज ने परेशान होकर ऑपरेशन के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

नॉन कोविड मरीजों के इलाज के लिए गाइडलाइंस स्पष्ट करे दिल्ली सरकार

नॉन कोविड मरीजों के इलाज और ऑपरेशन की गाइडलाइंस को लेकर अस्पतालों में बनी भ्रम की स्थिति को साफ करने के लिए कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो बताएं कि दिल्ली में नॉन कोविड मरीजों के इलाज और ऑपरेशन को लेकर दिल्ली सरकार की गाइडलाइंस क्या है? दिल्ली हाई कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को करेगा.

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