हाईप्रोफाइल टैटू गर्ल की हत्या मामले में आठ साल से फरार आरोपी तक पहुंची पुलिस, अस्पताल में मिला मृत

आठ साल से दिल्ली पुलिस हाई प्रोफाइल टैटू गर्ल नीतू सोलंकी के कातिल की तलाश कर रही थी.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के हाइप्रोफाइल टैटू गर्ल की हत्या के फरार आरोपी का नया मामला सामने आया है. आठ साल बाद दिल्ली पुलिस कातिल तक पहुँची लेकिन कातिल मरा मिला. आठ साल से दिल्ली पुलिस हाई प्रोफाइल टैटू गर्ल नीतू सोलंकी के कातिल की तलाश कर रही थी.

आरोपी के बारे में पुलिस को यकीन था कि वो विदेश फरार हो चुका है, जिसके खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों ने लुक आउट नोटिस जारी कर दिया था. वही कातिल दिल्ली से 30 किलोमीटर गुरुग्राम के एक अस्पताल में मृत मिला.

ये है मामला

वारदात करीब आठ साल पहले यानी 11 फरवरी 2011 की है. दिल्ली पुलिस को नई दिल्ली स्टेशन पर एक बैग के अंदर एक लड़की का कई टुकड़ो में शव बरामद हुआ. लड़की के शरीर पर मोर पंख जैसा टैटू बना हुआ था, इसी टैटू से कई घंटो बाद लड़की की पहचान 28 साल की नीतू सोलंकी के रूप में हुई थी.

पार्षद का चुनाव लड़ा

नीतू आईबीएम जैसे बड़े कॉल सेंटर में काम कर चुकी थी. उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई भी की हुई थी. वह निगम पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकी थी. लेकिन 2010 में वो घर में ये बता कर निकली कि वह सिंगापुर जा रही है लेकिन फिर घर नहीं लौटी.

2010 से बंद कर दिया काम

घर छोड़ने के बाद से ही वो 29 साल के राजू गहलोत नाम के एक लड़के के साथ लिविंग में रहने लगी, राजू एयर इंडिया में केबिन क्रू था लेकिन 2010 से उसने काम पर जाना बंद कर दिया था. राजू और नीतू हरि नगर और आश्रम में अलग-अलग मकानों में किराए पर रहे.

फर्जी पहचान पत्र बनवाया

राजू ने दुनिया से अपनी पहचान छिपाने के लिये एक सुरेंद्र पाल सिंह नाम का फ़र्ज़ी पहचान पत्र भी बनवाया, इस दौरान नीतू अपने घरवालों को धोखा देने के लिए इंटरनेट कालिंग या वेबकेम के जरिये बात करती थी. हत्या के एक दिन पहले भी उसने अपनी बहन को बताया कि उसके सर में चोट लगी है. अगले ही दिन उसका शव एक बक्से से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बरामद हुआ था.

आश्रम वाले घर में की थी हत्या

पुलिस ने हत्या के इस हाई प्रोफाइल केस में पहली गिरफ्तारी 2 मार्च 2011 को की थी. जिसमे राजू गहलोत के चचेरे भाई नवीन शौकीन को गिरफ्तार किया गया था. नवीन ने ही बताया था कि राजू और नीतू का अक्सर झगड़ा होता था. 11 फरवरी को उसने गुस्से में आकर आश्रम वाले घर में नीतू की हत्या कर दी उसके बाद शव के कई टुकड़े किये फिर नवीन को कार लेकर बुलाया और शव को नई दिल्ली स्टेशन पर ठिकाने लगा कर चले गए.

कई मोबाइल किए इस्तेमाल

मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कई महीने तक उसकी तलाश में लगातार छापेमारी करती रहीं, लेकिन राजू दूसरे शहरों में भागता रहा. उसने इस दौरान दर्जनभर से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल किये,लेकिन एक मोबाइल एक बार मे इस्तेमाल कर किसी दूसरे को बेच देता था, ताकि पुलिस को चकमा दे सके.

बदल लिया हूलिया

पुलिस ने उसकी तलाश में 150 से ज्यादा बार छापेमारी की, कई कॉल सेंटरों में भी उसकी तलाश की लेकिन राजू गहलोत का सुराग नहीं लग सका. मीडिया की कवरेज में भी वांटेड राजू का फोटो लगातार चल रहा था, इस वजह से पकड़े जाने के डर से उसने अपना हुलिया ही बदल लिया था.

मां को कॉल किया और पुलिस ने लगा लिया पता

लेकिन आठ साल बाद एक फ़ोन कॉल ने दिल्ली पुलिस को कातिल राजू गहलोत का पुख्ता सुराग दे दिया. बीते मंगलवार को राजू गहलोत ने अपनी मां को कॉल किया, बोला कि मैं बीमार हूँ अब ज़िंदा नहीं बचूंगा, मैं गुरुग्राम के पारस अस्पताल में भर्ती हूँ. पुलिस ने उसके घरवालों के मोबाइल नबंर सर्विलांस पर लगाये हुए थे.

पुलिस ने जैसे ही मोबाइल फोन पर बातचीत सुनी, पुलिस की टीम फौरन गुरुग्राम गयी लेकिन राजू गहलोत ज़िंदा नहीं मिला, उसे लीवर की बीमारी थी जिसके चलते उसकी अस्पताल में मौत हो गयी. राजू की मौत के बाद जांच में पता चला कि वो कई शहरों में रहने के बाद गुरुग्राम आ गया.

ऑटोमोबाइल्स में की नौकरी

यहां उसने अपना नाम बदलकर रोहन दहिया रख लिया था. अपने सभी दस्तावेज भी उसी नाम से बनवा लिए, इन्हीं दस्तावेजों के जरिये उसने एक बड़ी कंपनी कोचर ऑटोमोबाइल्स में नौकरी हासिल कर ली, वो पिछले 8 सालों से कंपनी में रिपोर्टिंग ऑफिसर के पद पर था, इस दौरान कंपनी में किसी को उस पर शक नहीं हुआ.

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान पिछले 8 सालों में राजू गहलोत ने कभी अपने घरवालों को फोन नहीं किया, इसलिए वो पकड़ में नहीं आ सका. नीतू सोलंकी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके के नवादा और राजू गहलोत मटियाला इलाके का रहने वाला था.