आम जनता के लिए खुला RTR फ्लाई ओवर, एयरपोर्ट जाना हुआ आसान

एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले इस फ्लाई ओवर के बनने के बाद इस रूट पर ट्रैफिक जाम की समस्या 25 फीसदी तक कम हो जाएगी.

नई दिल्ली: अगर आप साउथ दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली होते हुए एयरपोर्ट या गुड़गांव की तरफ जाते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. पिछले कई सालों से बन रहा RTR यानी राव तुलाराम फ्लाई ओवर आम जनता के लिए खुल गया है और इसकी बनने के बाद आपको ट्रैफिक की समस्या से छुटकारा मिलेगा और आप एयरपोर्ट जल्दी पहुंच सकेंगे.

मंगलवार के दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने RTR फ्लाई ओवर का उद्घाटन किया. एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले इस फ्लाई ओवर के बनने के बाद इस रूट पर ट्रैफिक जाम की समस्या 25 फीसदी तक कम हो जाएगी.

205 करोड़ में बना RTR फ्लाईओवर

लगभग 3 किलोमीटर लंबे इस फ्लाई ओवर को बनाने में कुल 205 करोड़ों रुपए की लागत आई. इस फ्लाई ओवर को बनाने में खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इस फ्लाई ओवर के नीचे स्टील का इस्तेमाल किया गया है. साथ ही U-shaped पिलर लगाए गए हैं, जिससे कंस्ट्रक्शन तेजी से हो और समय भी कम लगे. साथ ही पहले से मौजूद सड़क पर ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहा.

5 बार बदली डेडलाइन, 3 साल देरी से काम पूरा

नई तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जो डेडलाइन थी उसे 5 बार बदलना पड़ा. इस फ्लाईओवर को नवंबर 2016 में बनकर तैयार होना था लेकिन लेटलतीफी और कई तरह की कानूनी अड़चनों के चलते काम जून 2019 में पूरा हुआ. हेलो कि तय समय सीमा में काम पूरा न करने के चलते प्रोजेक्ट बनाने वाली कंपनी पर 27.8 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया.

फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने अपनी सरकार के कई कामों की चर्चा की. केजरीवाल ने कहा कि “दिल्ली सरकार काम करने में यकीन रखती है ना की राजनीति करने में। शीला दीक्षित की सरकार 15 साल रही और उन्होंने 15 साल में 70 फ्लाईओवर बनाए और आम आदमी पार्टी की सरकार ने साढ़े 4 साल में 23 फ्लाईओवर बना दिए हैं”

इस उद्घाटन पर राजनीति भी खूब हो रही है बीजेपी दिल्ली अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने ट्वीट करके केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार 5 साल में 2.7 किमी सड़क का टुकड़ा बना पाई जबकि केंद्र की मोदी सरकार ने सिर्फ 15 महीने में ही 8.7 किमी सड़क बना डाली.

दिल्ली में कुछ ही महीनों बाद चुनाव की घोषणा होनी है ऐसे में दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल के समय हुए कार्यों को जनता को सौंप देना चाहती है ताकि अगले साल चुनाव के समय जनता आसानी से तय कर पाए कि उसे वोट किस पार्टी को देना है.