JNU हिंसा: दिल्ली पुलिस की जांच में क्या-क्या आया सामने, पढ़ें पूरी कहानी

एक बार सर्वर बंद होने के बाद दोबारा चालू होने में दिक्कत करता है. रजिस्ट्रेशन रुक गया, लोग परेशान हुए. इसके बाद जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर एक FIR दर्ज हुई.
Delhi Police JNU, JNU हिंसा: दिल्ली पुलिस की जांच में क्या-क्या आया सामने, पढ़ें पूरी कहानी

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस की. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बताया कि इस मामले की कवरेज मीडिया में 5 जनवरी शाम को हुई. लेकिन कहानी 1 जनवरी से शुरू हो गई थी.

1 जनवरी से 5 जनवरी तक जेएनयू प्रशासन ने तय किया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू करेंगे. ये हर 6 महीने में होता है. उसके लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया था. जेएनयू में पांच दिन के रजिस्ट्रेशन के लिए 300 रुपए ऑनलाइन जमा करके रजिस्ट्रेशन होना था.

लेकिन जेएनयू के चार छात्र संगठनों जिनमें स्टूडेंट्स फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एशोसिएशन और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन शमिल हैं, इन सभी संगठनों के मेम्बर और सहयोगी फॉलोअर्स इस रजिस्ट्रेशन प्रकिया के खिलाफ थे.

फीस को लेकर ये लोग पिछले साल 28 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन हमने जाकर देखा तो कई छात्र रजिस्ट्रेशन कराना चाहते थे. लेकिन ये चार संगठन लगातार इसमें रुकावट डाल रहे थे, उन छात्रों को रजिस्ट्रेशन के लिए आते वक्त डराया भी जाता था.

3 जनवरी 1 बजे दोपहर यही चारों संगठनों के मेंबर ने जहां ऑनलाइन सर्वर था और रजिस्ट्रेशन हो रहा था वहां जाकर तोड़फोड़ की, जबरन अंदर घुसे. सर्वर से छेड़छाड़ की, उसे बंद किया. गार्ड्स के साथ धक्का मुक्की की.

एक बार सर्वर बंद होने के बाद दोबारा चालू होने में दिक्कत करता है. रजिस्ट्रेशन रुक गया, लोग परेशान हुए. इसके बाद जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर एक FIR दर्ज हुई. 8 लोगों के खिलाफ यह केस दर्ज हुआ, सरकारी संपत्ति को नुकसान और कई धाराओं में केस दर्ज हुआ.

इसके दो घण्टे बाद जेएनयू के तकनीकी लोगों ने सिस्टम सुधारा ताकि रजिस्ट्रेशन फिर शुरू हो सके, जैसे ही वो रिस्टोर हुआ फिर यही चार संगठनों के जुड़े छात्र फिर प्लान बनाए.

4 जनवरी की सुबह जब ये संगठन सर्वर रूम में घुसपैठ नहीं कर पाए तो दोपहर में पीछे की तरफ से एलुमिनियम शीशे के दरबाजे को तोड़कर अंदर घुसते हैं फिर सर्वर को डैमेज कर देते हैं, फिर सब काम ठप हो गया.

इस पर भी एक FIR दर्ज हुई. उन्हीं धाराओं के तहत. चार तारीख को भी ये पंगा जारी था.

5 जनवरी की सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर चार छात्र रजिस्ट्रेशन कराने के लिए परेशान थे, वो एक बेंच पर बैठे थे, स्कूल ऑफ सोशल साइंस के सामने, तब एक ग्रुप ने आकर उन छात्रों को पहले घेरा फिर मारपीट की. बीच बचाव में आए सुरक्षा गॉर्ड्स को भी धक्कामुक्की की, उन्हें भी चोट आई.

इसके बाद 3 बजकर 45 मिनट पर चारों संगठन के लोगों ने पेरियार हॉस्टल पर हमला किया. ये सब नकाबपोश थे. यहां पर जेएनयू की प्रेसीडेंट मौजूद रहीं.

सादी वर्दी में जो पुलिस JNU में पहले से थी वो वहां पर पहुंची. इस दौरान नकाबपोश लोगों ने हिंसा की. इसकी भी FIR दर्ज हुई. इसमें लोकल पुलिस की टीचर्स और बाकी कुछ लोगों ने मदद की.

जिन लोगों को चोट लगी थी उन्हें हम एम्स ट्रामा सफदरजंग अस्पताल लेकर गए. हॉस्टल के कुछ रूम को टारगेट करके हमला किया गया. इस बीच पीस मीटिंग हुई, टीचर्स एसोसिएशन और छात्रों की. इसमें 120 लोग साबरमती टी-पॉइंट के पास जुटे.

इसी दौरान एक भीड़ आई जिसमें छात्र और बाकी लोग शामिल थे, उनके हाथ मे डंडे-लाठी थी. ये नकाबपोश थे. पहले उन्होंने पीस मीटिंग में जाकर झगड़ा किया फिर वो साबरमती हॉस्टल पहुंच गए.

इन्होंने हॉस्टल के कमरे में जाकर अटैक किया, तोड़फोड़ की. ये सब 7 बजे हुआ. कुछ नर्मद्रा हॉस्टल मे भी हिंसा हुई. इसमें हमने एक ओर FIR दर्ज की. दंगों की और धाराओं के तहत. हमारी SIT तीन केस की जांच कर रही है.

हम सबसे बात करके जांच करने की कोशिश कर रहे हैं. छात्र, टीचर्स, JNU प्रशासन, गार्ड्स और लोकल लोगों से पूछताछ की जा रही है. बाहर वालों के लिए JNU में अंदर जाना आसान नहीं है. इसलिए हम हर गेट के रजिस्टर चेक कर रहे हैं. कौन आया और कब आया, कब गया.

कुछ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं. हिंसा के वक्त व हिंसा प्लानिंग के लिए. एक ग्रुप तो करीब 5 बजे के आसपास बना है. ग्रुप्स के बाद लोग इकट्ठा हुए, फिर 7 बजे यह घटना हुई, साबरमती हॉस्टल में.

बहुत जंगल इलाका है, इसलिए घटना के बाद नकाबपोश अलग-अलग जगहों पर भाग गए. हमें सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल रही है. सीसीटीवी डिसेबल हो गए हैं. हम वायरल वीडियो और फोटो से मदद कर रहे है. करीब 32 गवाहों के बयान लिए हैं, उनसे मदद ले रहे हैं.

जो व्हाट्सएप ग्रुप मिला उसका नाम यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट था. इसमे 60 मेंबर थे. अभी हमने 9 लोगों की पहचान की है. इसमें चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, योगेंद्र भारद्वाज, प्रिया रंजन, शिव पूजन मंडल, डोलन, विकास पटेल और आइशी घोष शामिल हैं.

अभी तक की जांच यहीं तक है. कोई भी हिरासत में नहीं है. हम इन 9 लोगों को नोटिस भेजेंगे, अपना पक्ष रखने के लिए. जानकारी लेने के लिए कि आपका नाम आया है, जवाब दें. जांच जारी है.

डीसीपी MS रंधावा के मुताबिक, ये चारों संगठन 28 अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. ये कानून की लगातार अवहेलना कर रहे हैं. सबने देखा है. इसलिए कई FIR दर्ज हुईं हैं.

कई बेरीकेट्स तोड़े गए हैं. ये कल प्रेसीडेंट हाउस जाना चाह रहे थे, उन्हें रोक दिया तो कनॉट प्लेस जाकर हंगामा किया. लोगों को दिक्कत आई जिससे उसमें भी FIR दर्ज की गई है. ये पुलिस की बात कभी नहीं मानते है. आगे एसआईटी की जांच जारी है.

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