दिल्ली दंगा: सलमान खुर्शीद-कविता कृष्णन समेत इन तक पहुंची जांच की आंच, लगे गंभीर आरोप

मामले में एक संरक्षित गवाह ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करवाया है कि सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके बाद ये हिंसा फैली. इस गवाह का बयान धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 1:36 pm, Thu, 24 September 20
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कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid), सीपीआई-एमएल पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन (Kavita Krishnan), छात्र कार्यकर्ता कवलप्रीत कौर (Kawalpreet Kaur), वैज्ञानिक गौहर रजा और वकील प्रशांत भूषण तक दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के जांच की आंच पहुंच गई है. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में कथित साजिश को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से पिछले हफ्ते फाइल की गई चार्जशीट में आरोपियों के बयान में इन लोगों के नाम आए हैं.

दंगों के आरोपी खालिद सैफी और पूर्व कांग्रेस पार्षद इशरत जहां ने अपने बयानों में सलमान खुर्शीद का नाम लिया है. 30 मार्च को दिए गए सैफी के बयान के मुताबिक, “विरोध-प्रदर्शन को जारी रखने और लंबे समय तक चलाते रहने के लिए उसने, इशरत और खुर्खीद ने कई लोगों को कॉल किया जो कि ‘उत्तेजकपूर्ण भाषण’ दे सकें.”

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‘प्रदर्शन को जारी रखने के लिए भड़काऊ भाषण’

बयान में कहा गया है कि ‘धरने में बैठे लोग इन भड़काऊ भाषणों के लिए बैठे रहते थे. वो अपने धर्म की खातिर सरकार के खिलाफ अभियान चलाने का जोश भरते थे.’ वहीं, सैफी का पूरक बयान जो आरोप-पत्र का भी हिस्सा है उसमें कहा गया है कि प्रदर्शनों को लंबे समय तक जारी रखने के लिए कई जानेमाने लेाग जैसे कि खुर्शीद, जेएनयू के छात्र शरजील इमाम, जेसीसी सदस्य मीरान हैदर को खुरेजी प्रदर्शन स्थल पर बुलाया जाता था.

मामले में एक संरक्षित गवाह ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करवाया है कि सलमान खुर्शीद ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके बाद ये हिंसा फैली. इस गवाह का बयान धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है.

दिल्ली दंगों में मारे गए 53 लोग

बता दें कि उत्तर-पूर्व दिल्ली में 23 से 27 फरवरी के बीच दंगे हुए थे, जिसमें आधिकारिक तौर पर 53 लोग मारे गए थे. 13 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था जिसके मुताबिक इस दंगे में 40 मुसलमान और 13 हिन्दू मारे गए थे.

मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक कुल 751 एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि इसमें कई संवेदनशील जानकारियां हैं, जिसे वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जा सकता.

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