Delhi Violence : इनका क्या कसूर… दंगों की आग में जले लोगों की अनसुनी कहानी

दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल के शवगृह में जब टीवी9 भारतवर्ष की टीम पहुंची तो वहां खड़े हर एक की जुबां पर कोई न कोई कहानी थी. ऐसी दर्द भरी दास्तां जिसे उन्हें ताउम्र उन्हें झेलना है.
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दिलवालों के शहर दिल्ली में कुछ ऐसा हुआ कि सोचकर आपकी रुह भी कांप जाए. उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में किसी नवजात ने अपना पिता खोया तो किसी नई नवेली दुल्हन ने अपना सुहाग. उम्र के आखिरी पड़ाव पर बाप ने अपना बेटा खोया तो किसी बेटे ने अपना बाप. यह सब कुछ दंगे की आग में समा गया. दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) के शवगृह में जब टीवी9 भारतवर्ष की टीम पहुंची तो वहां खड़े हर एक की जुबां पर कोई न कोई कहानी थी. ऐसी दर्द भरी दास्तां जिसे उन्हें ताउम्र उन्हें झेलना है.

पापा चिप्स ला दो

करदमपुरी के पास की गली में मोहम्मद इश्तियाक अपनी पत्नी, दो साल के बेटे और लगभग एक साल की बेटी के साथ रहते थे. इश्तियाक वेल्डिंग ऑपरेटर हैं और इसी इलाके में काम करते थे. मंगलवार के दिन जब दंगा भड़का तो इश्तियाक ने घर में ही रहना बेहतर समझा, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. उनका बेटा दिन मे अचानक ही चिप्स खाने की जिद करने लगा.

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मोहम्मद इश्तियाक

इश्तियाक ने पहले लाने से मना कर दिया क्योंकि गली की सारी दुकानें बंद थी. इसके बाद बेटे की जिद की वजह से वह बाहर सड़क पर निकल पड़े चिप्स लाने. तभी अचानक से सड़क पर दंगा भड़क गया और इश्तियाक घर की ओर भागे. इसी बीच एक गोली उनके पेट में लगी और इश्तियाक जमीन पर गिर पड़े और पीछे से भीड़ उन्हें रौंदती हुई निकल गई. आनन-फानन में उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी मौत हो गई.

पहला और आखिरी वैलेंटाइन डे

इस साल महज 11 दिनों पहले अश्फाक की बड़े धूम-धाम से 14 फरवरी को ही शादी हुई थी. अश्फाक फोटो में सेहरा सजाए बैठे हैं. पेशे से इलेक्ट्रिशियन अश्फाक उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं. दिल्ली के मुस्तफाबाद में काम करते हैं. दिन में इनके पास किसी का फोन आया कि बिजली की कुछ परेशानी हो रही है. इसी को ठीक करने के लिए अश्फाक घर से निकले और फिर हिंसा के शिकार हो गए.

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अश्फाक

जीटीबी अस्पताल के सामने इनकी चाची अजरा खातून का रो-रो कर बुरा हाल है. अश्फाक के शव के इंतजार में अजरा ने कहा कि वह तो अपने काम पर जा रहा था. उसका क्या कसूर था जिसकी वजह से दंगाइयों ने उसे मारा. उसकी पत्नी को मैं क्या बताऊं जिसके हाथों में अब भी सुहाग की मेंहदी नहीं छूटी है.

बहन से हुई आखिरी मुलाकात

राजस्थान के सीकर के रहने वाले वीरभान दिल्ली के शिव विहार इलाके में रहते हैं. यहां पर वह काम भी करते हैं. मंगलवार को वह अपनी बहन से मिलने के लिए दोपहर को पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर में आए. बहन के साथ मिलने के बाद वीरभान अपने घर के लिए निकल पड़े.

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वीरभान

वीरभान को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि बहन से उनकी आखिरी मुलाकात है. जैसे ही शिव विहार की पुलिया पर पहुंचे तभी किसी दंगाई ने उन्हें गोली मार दी. वीरभान गिर पड़े. जब उन्हें जीटीबी अस्पताल में लाया गया तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बेटे के सामने बाप को मारा

उत्तर पूर्वी दिल्ली के घोंडा इलाके में विनोद कुमार शादी ब्याह में डीजे लगाने का काम करते थे. सोमवार की रात को विनोद कुमार अपने बेटे मोनू के साथ बाइक पर निकले. तभी सामने से आ रहे दंगाइयों ने उनपर वार किया. बाप बेटे दोनों पर हमला किया और उनकी बाइक भी जला दी.

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मोनू

दंगाइयों के जाने के बाद आस-पास के लोगों ने अस्पताल पहुचाया. जहां अधिक खून बह जाने की वजह से विनोद कुमार की मौत हो गई. उनके बेटे मोनू के सिर से भी काफी खून जा बह था. डॉक्टरों ने 25 टांके लगाए हैं.

शवगृह में मिला बेटा

साजिद अपने बेटे को मंगलवार से लगातार फोन लगा रहे थे. फोन नहीं मिल रहा था. किसी अनहोनी की आशंका में अपने संबंधियों को फोन लगाया और फिर हापुड़ से दिल्ली के लिए निकल पड़े. अस्पताल में सभी जगह ढूंढा पर उनका बेटा मोहसिन कहीं नहीं मिला. जब वह शवगृह में पहुंचे तो अपने बेटे को मृत पड़ा देखा. मोहसिन की शादी महज तीन महीने पहले हुई थी. वह जेनरेटर का काम करता था.

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साजिद

मोहसिन नोएडा में रहता था लेकिन जेनरेटर के काम की वजह से वह उत्तर पूर्वी दिल्ली जा रहा था जहां दंगे की चपेट में वह आया. मोहसिन को सिर में गोली लगी. मोहसिन की पहचान नहीं हो पा रही थी. उनके पिता साजिद ने उन्हें पहचाना. साजिद पेशे से मजदूर हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि आगे उनके परिवार का क्या होगा. साजिद ने कहा कि मेरे बुढ़ापे का लाठी दंगाइयों ने छीन लिया. अब मेरा क्या होगा.

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