दिल्ली की एयर क्वालिटी हुई ‘खराब’, पड़ोसी राज्यों में जलाई गई एक दिन में सबसे ज्यादा पराली

रविवार को पड़ोसी राज्यों में इस मौसम में एक दिन में पराली जलाने की सबसे ज्यादा 1230 घटनाएं दर्ज की गईं. दिल्ली के वातावरण में ‘पीएम 2.5’ कणों में पराली जलाने की हिस्सेदारी 17 फीसदी है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:09 am, Mon, 19 October 20
Stubble-Burning
पराली से हो रहा प्रदूषण (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को वायु गुणवत्ता (Air Quality) “खराब” श्रेणी में दर्ज की गई, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में इस मौसम में एक दिन में पराली जलाने की सबसे ज्यादा 1230 घटनाएं दर्ज की गईं. दिल्ली के वातावरण में ‘पीएम 2.5’ कणों में पराली जलाने की हिस्सेदारी 17 फीसदी है.

जबकि शनिवार को यह 19 फीसदी थी, शुक्रवार को 18 फीसदी, बुधवार को करीब एक फीसदी और मंगलवार, सोमवार और रविवार को करीब तीन फीसदी थी. एक केंद्रीय एजेंसी ने यह जानकारी दी है

महानगर में 24 घंटे के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 254 दर्ज किया गया. शनिवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 287 दर्ज किया गया था. शुक्रवार को यह 239, बृहस्पतिवार को 315 था, जो इस साल 12 फरवरी के बाद से सबसे ज्यादा खराब है. उस दिन एक्यूआई 320 था.

शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच को ‘गंभीर’ माना जाता है.

रात में तापमान घटने से जमा हो जाते हैं पोल्यूटेंट

मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दिन के वक्त उत्तरपश्चिमी हवाएं चल रही हैं और पराली जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषक तत्वों (Pollutants) को अपने साथ ला रही है. रात में हवा के स्थिर होने और तापमान घटने की वजह से प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ‘एयर क्वालिटी वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर)’ के मुताबिक, हरियाणा, पंजाब और नजदीकी सीमा पर स्थित क्षेत्रों में शनिवार को पराली जलाने की 1230 घटनाएं हुईं, जो इस मौसम में एक दिन में सबसे ज्यादा है. इसमें बताया गया कि ‘पीएम 2.5’ प्रदूषक तत्वों में पराली जलाने की हिस्सेदारी शनिवार को करीब 17 फीसदी रही.

सोमवार तक और बढ़ सकता है पराली जलाने का असर

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली ने कहा है कि वायु संचार सूचकांक 11,500 वर्गमीटर प्रति सेकेंड रहने की उम्मीद है, जो प्रदूषक तत्वों के बिखरने के लिए अनुकूल है.

वायु संचार सूचकांक छह हजार से कम होने और औसत वायु गति दस किमी प्रतिघंटा से कम होने पर प्रदूषक तत्वों के बिखराव के लिए प्रतिकूल स्थिति होती है. प्रणाली की ओर से कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता पर पराली जलाने का प्रभाव सोमवार तक काफी बढ़ सकता है.

अधिकारियों ने शनिवार को कहा था कि पिछले साल के मुकाबले इस साल इस मौसम में अब तक पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं अधिक हुई हैं, जिसकी वजह धान की समयपूर्व कटाई और कोरोनावायरस महामारी के कारण खेतों में काम करने वाले श्रमिकों का न होना है.

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