कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो का किया ऑर्डर, घर पर आई भगवद् गीता

कोलकाता (Kolkata) में हुए एक मामले ने उस समय बड़ा तूल पकड़ लिया, जब एक व्यक्ति ने अमेजन (Amazon) पर कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो बुक (Communist Manifesto) के लिए ऑर्डर किया तो उन्हें उसकी जगह भगवद् गीता (Bhagavad Gita) की डिलीवरी की गई.

कोलकाता में हुए एक मामले ने उस समय बड़ा तूल पकड़ लिया जब एक व्यक्ति ने अमेजन पर कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो बुक (Communist Manifesto) के लिए ऑर्डर किया तो उन्हें उसकी जगह भगवद गीता (Bhagavad Gita) की डिलीवरी की गयी. अमेजन इसे सामान्य गलती बता रहा है तो वहीं, कई लोग इस बात को दूसरे नज़रिये से भी देख रहे हैं.

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कोलकाता के निवासी सुतीर्थ दास ने इस बुधवार अमेजन वेबसाइट (Amazon) पर अपने पढ़ने के लिए कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो बुक से जुड़ी किताब ऑर्डर की थी. ऑर्डर करने के बाद उन्हें अपने सामान की डिलीवरी डेट भी मिल गयी.

पैकिंग पर लिखा था उनकी ऑर्डर की गई बुक का नाम

शनिवार रात 11 बजे जब सुतीर्थ अपने ऑफिस में काम कर रहे थे, तब उन्हें एक फोन कॉल आया जिसमें उन्हें बताया गया कि इस डिलीवरी को कैंसल कर दिया जाये क्योंकि उसमें गलत किताब भेजी गयी है. लेकिन उन्होंने ऑर्डर को कैंसल नहीं किया. इसके बाद जब वह शाम को घर वापस आये तो उन्हें अपना पैकेज मिला.

पैकिंग पर उनकी ऑर्डर की हुई किताब का नाम लिखा था लेकिन जब उन्होंने पैकेज को खोलकर देखा तो उन्हें उसमें भगवद गीता की एक संशोधित कॉपी मिली. यह देखकर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ. इस बात की जानकारी खुद सुतीर्थ ने अपने फेसबुक अकाउंट पर दी है. उनकी पोस्ट पर सैकड़ों कमेंट्स आ चुके हैं. कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो के बजाय भगवद गीता की डिलीवरी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

इससे पहले भी ई-कॉमर्स कंपनियों की ऐसी गलतियों को लेकर कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां ग्राहकों को ऑनलाइन मोबाइल फोन के ऑर्डर पर पत्थरों की डिलीवरी की गई. अमेजन के एक कस्टमर गौतम रेगे ने अपने एक ट्वीट पर लिखा कि उन्होंने 300 रुपये के स्किन लोशन का ऑर्डर दिया था. लेकिन जब उन्होंने अपना पैकेज खोलकर देखा तो उसमें 19,000 रुपये का बोस वायरलेस हेडफोन मिला. जब उन्होंने डिलीवरी के बारे में कस्टमर केयर को जानकारी दी तो उन्हें बताया गया कि वह हेडफोन नॉन-रिटर्नेबल था.

ऑनलाइन शॉपिंग से संबंधित होने वाले ये मामले नए नहीं हैं लेकिन कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो के बजाय भगवद गीता की डिलीवरी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.

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