‘राज्यसभा में नियमों का नहीं किया गया उल्लंघन’ उपसभापति ने दिया सिलसिलेवार ब्योरा

विपक्ष का आरोप था कि दो कृषि विधेयक पारित किए जाने के दौरान मत-विभाजन के उसके अनुरोध को दरकिनार कर दिया गया. इस मामले को लेकर एक अखबार में न्यूज भी प्रकाशित हुई. इसके बाद उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है.

Harivansh Narayan Singh
File Pic- Harivansh Narayan Singh

राज्यसभा (Rajya Sabha) में दो कृषि विधेयक पारित किए जाने के दिन हुए शोर-शराबे और हंगामे के बीच उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) ने कड़ा रुख अपनाया था. उन्होंने उस दिन के घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है. विपक्ष का आरोप था कि मत-विभाजन के उसके अनुरोध को दरकिनार कर दिया गया.

न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक उपसभापति की सफाई एक खबर के संदर्भ में आई है, जिसमें कहा गया है कि सिंह ने मत-विभाजन के लिए सदस्यों के बैठने की व्यवस्था जिस तरह से करवाई थी, वह पूर्व प्रायोजित थी.

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा, “वैधानिक प्रस्ताव अध्यादेश को नामंजूर करता प्रतीत हो रहा था और के.के. रागेश ने विधेयक में संशोधन के लिए उसे सलेक्ट कमेटी में भेजे जाने की बात कही थी, जिसे सदन ने 1.07 बजे ध्वनिमत से नकार दिया था.

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के.के. रागेश सदन के वेल में चले गए थे. उस समय वह गैलरी की अपनी सीट पर नहीं थे. वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्हें अपना संशोधन प्रस्ताव पेश करने को कहा जा रहा है, मैंने गैलरी की तरफ देखा, लेकिन वह वहां नहीं थे.”

उपसभापति ने आगे कहा कि तिरुचि सिवा ने दोपहर से पहले बिल को सलेक्ट कमेटी को भेजे जाने के संदर्भ में अपनी सीट से अपने संशोधन प्रस्ताव पर मत-विभाजन की मांग की थी.

लेकिन उन्होंने यह कहकर बचाव किया, “आप वैसा ही वीडियो दोपहर एक बजे देखेंगे, जिसमें एक सदस्य रूलबुक को फाड़ते और मेरी ओर फेंकते नजर आ रहे हैं. वह मुझसे पेपर छीनने की कोशिश कर रहे थे, उसी समय कुछ सदस्यों ने मुझे चारों तरफ से घेरकर बचाया.”

उन्होंने यह बात तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन के संदर्भ में कही. उपसभापति ने हर मिनट का ब्योरा उपलब्ध करवाया है.

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