दिल्ली: Lockdown के कारण पिछली साल के मुकाबले इस वर्ष 36% कम हुईं मौत

जानकारों का मानना है कि लॉकडाउन के कारण कम सड़क दुर्घटनाएं हुईं, साथ ही दिल्ली के बाहर के लोगों की कम संस्थागत मौतें हुईं, फूड पॉइजनिंग, पानी और प्रदूषण जनित बीमारियों में कमी आई. इन दावों की तस्दीक दिल्ली ट्रेफिक पुलिस के आंकड़ों भी करते हैं.
Deaths in 2020, दिल्ली: Lockdown के कारण पिछली साल के मुकाबले इस वर्ष 36% कम हुईं मौत

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है, देश की राजधानी दिल्ली में भी कोरोना 1300 से ज्यादा संक्रमितों की जान ले चुका है, हालांकि दिल्ली नगर निगम के आंकड़े कुछ अलग तस्वीर भी बयां करते हैं. दिल्ली की तीनों नगर निगमों के आंकड़े बताते हैं कि इस साल मार्च, अप्रैल और मई में पिछले साल की तुलना में 36 प्रतिशत कम मौत हुई हैं.

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दिल्ली की तीनों नगर निगमों ने पिछले साल 2019 में मार्च से लेकर मई के बीच 28,170 मौतें दर्ज कीं थी, लेकिन इस साल इसी अवधि में नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि करीब 10,000 मौतें कम दर्ज की गई यानी 17,902, इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत कोरोनोवायरस बीमारी की वजह से हुई.

क्या बताते हैं आंकड़े?

आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2019 में तीनों MCD में 9,396 मौतें हुई थी, वहीं इस साल मार्च में 8,718 दर्ज की गई यानी 678 मौतों का अंतर. मार्च 2020 में, उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने पिछले साल 4,359 की तुलना में 3,702 मौतें दर्ज कीं. नगर निगम के आंकड़े बताते हैं कि इस साल अप्रैल में पिछले साल अप्रैल की तुलना में लगभग आधी मौतें हुई, यानि 9498 के मुकाबले 4127.

पिछले साल अप्रैल में NDMC ने 3,891 मौतें, EDMC ने 2,085 और SDMC ने 3,522 दर्ज की थी. वहीं इस साल अप्रैल में NDMC ने 2,079 मौतें, EDMC में 668 और SDMC ने 1,380 दर्ज की. इतना ही नहीं इस साल मई में इन एजेंसियों के रिकॉर्ड में मौतों में लगभग 45 फीसदी की गिरावट देखी गई. इस साल मई में जहां 5,057 मौतें हुईं, वहीं पिछले साल 9,276 थी.

दक्षिण और पूर्व दिल्ली नगर निगमों ने मार्च 2020 में 3, 232 और 1,784 मौतें दर्ज की, जबकि मार्च 2019 में, दक्षिणी निगम ने 3,508 और पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने 1,529 लोगों की मौत दर्ज की थी. हालांकि, मौतों के आंकड़े में आई इस गिरावट के पिछे एक बड़ी वजह पूरे देश में लगाया गया लॉकडाउन माना जा रहा है.

लॉकडाउन के कारण मौतों में आई कमी

जानकारों का मानना है कि लॉकडाउन के कारण कम सड़क दुर्घटनाएं हुईं, साथ ही दिल्ली के बाहर के लोगों की कम संस्थागत मौतें हुईं, फूड पॉइजनिंग, पानी और प्रदूषण जनित बीमारियों में कमी आई. इन दावों की तस्दीक दिल्ली ट्रेफिक पुलिस के आंकड़ों भी करते हैं, आंकड़े बताते हैं कि इस साल 25 मार्च से 27 मई के बीच राजधानी दिल्ली में 39 जानलेवा हादसे हुए थे, जबकि 1 जनवरी से 25 मार्च तक लॉकडाउन से पहले 294 घातक दुर्घटनाएं हुई थीं.

इतना ही नहीं ट्रैफिक पुलिस के अनुमान के मुताबिक लॉकडाउन से पहले, शहर में हर महीने औसतन 120 से 150 के बीच घातक सड़क दुर्घटनाएं हुआ करती थीं. यानी लॉकडाउन की वजह से बहुत कम सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसकी वजह से दिल्ली में दर्ज कुल मौतों में सड़क दुर्घटनाओं की वजह से होने वाली मौतों में लगभग 25 से 30 फीसदी की कमी आई है.

MCD जारी करती है मृत्यु प्रमाण पत्र

MCD के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पीके शर्मा का मानना है कि “दिल्ली में जो लोग मरते हैं, चाहे वे किसी भी राज्य के हों, उनके मृत्यु प्रमाण पत्र MCD ही जारी करती है, लेकिन लॉकडाउन के कारण, कम लोग इलाज के लिए दिल्ली आए तो मौत के आंकड़े में गिरावट का ये भी एक बड़ा कारण हो सकता है. दूसरा, चूंकि लॉकडाउन में लोग अपने घरों तक ही सीमित थे, तो ऐसे में फूड पॉइजनिंग, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और जल-जनित जैसी बीमारियों में कमी आना भी मौतों में गिरावट आने का एक कारण हो सकता है.

ये आंकड़े थोड़ी राहत जरूर देते हैं, लेकिन दिल्ली में मौत के आंकड़ों को लेकर सियासत अभी भी जारी है, दिल्ली सरकार का दावा है कि दिल्ली में अभी तक कोरोना महामारी की वजह से 1327 लोगों की मौत हुई है, जबकि MCD द्वारा दावा किया जा रहा है कि कोरोनावायरस से 2300 से लोगों की मौत हो चुकी है.

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