धनतेरस पर इस बार नहीं बरसेगा पैसा, जानिए क्‍या है वजह

बाजारों में हलचल भले ही है, लेकिन सजावट के सामान के अलावा लोग सोना-चांदी खरीदने की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं, क्योंकि सोना-चादी के जो दाम हैं, इस बार आसमान छू रहे हैं.

बाजार सज चुके हैं, लोगों ने दीवाली की शॉपिंग करना शुरू कर दिया है. दीवाली से पहल 25 अक्टूबर को है धनतेरस. धनतेरस वाले दिन सोना, चांदी और बर्तन खरीदना काफी शुभ माना जाता है. दीवाली से पहले अच्छे-अच्छे ऑफर्स और डिस्काउंट्स की भरमार देखने को मिलती है, पर लगता है कि इस बार लगता है कि आर्थिक मंदी के चलते धनवर्षा नहीं हो पाएगी.

बाजारों में हलचल भले ही है, लेकिन सजावट के सामान के अलावा लोग सोना-चांदी खरीदने की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं, क्योंकि सोना-चादी के जो दाम हैं, इस बार आसमान छू रहे हैं. ऊंचे भाव पर सोने की मांग कमजोर रहने के कारण इस साल धनतेरस पर सोने की खरीदारी पिछले साल के मुकाबले घटकर आधी रह सकती है.

भारतीय सर्राफा बाजार में इस साल त्योहारी सीजन में ऊंचे भाव पर मांग कमजोर रहने से वैसी रौनक नहीं है, जैसी पिछले साल में रहती थी. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने इस मामले पर बात करते हुए बताया कि धनतेरस पर देशभर में करीब 40 टन सोने की खरीदारी होती है, लेकिन इस साल मांग कमजोर होने के कारण 50 फीसदी तक खरीदारी घट सकती है.

मेहता ने बताया कि ऊंचे भाव पर मांग घटने और आयात शुल्क में वृद्धि होने के कारण बीते महीने सितंबर में सोने का आयात सितंबर महीने में घटकर 26 टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में भारत ने 81.71 टन सोने का आयात किया था.

इस प्रकार पिछले साल के मुकाबले इस साल सितंबर में सोने का आयात 68.18 फीसदी घट गया. सोने का आयात घटने की वजह पूछने पर मेहता ने आईएएनएस से कहा कि सरकार ने आयात शुल्क में वृद्धि कर दी, जिससे सोने का आयात महंगा हो गया.

सरकार ने इस साल जुलाई में पेश किए गए वर्ष 2019-20 के आम बजट में महंगी धातुओं पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया.

मेहता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव ऊंचा होने से मांग कमजोर है. वहीं, घरेलू बाजार में त्योहारी मांग वैसी नहीं है जिस तरह विगत वर्षो में देखी जाती थी. उन्होंने कहा, “सोने में तीन तरह की मांग रहती है, पहली, शादी के सीजन की मांग, दूसरी त्योहारी मांग और तीसरी नियमित मांग. बाजार में तरलता के अभाव में नियमित मांग की हालत पहले से ही खराब है, वहीं भाव ऊंचा होने से लोग निवेश से भी घबराते हैं. इसके अलावा त्योहारी मांग भी कमजोर रहने वाली है.”

 

ये भी पढ़ें-   केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने डाला वोट, मिस्टर खन्ना के साथ खिंचवाई फोटो

INX मीडिया केस: CBI ने सीलबंद लिफाफे में सौंपे दस्‍तावेज, चैंबर में होगी सुनवाई