हौसले को सलाम, तीन दशक बाद बर्फीले रेगिस्तान से आर्मी ने खोज निकाला ध्रुव

Share this on WhatsAppजम्मू वाकई भारतीय सेना के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. शून्य से नीचे माइनस 23 डिग्री सेल्सियस के तापमान वाले इलाके में तीन दशक पहले क्रैश हुए चॉपर को भारतीय सेना के जवानों ने खोज निकाला है. यही नहीं अब इसे दोबारा उड़ान भरने के लिए भी तैयार कर दिया गया […]

जम्मू

वाकई भारतीय सेना के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. शून्य से नीचे माइनस 23 डिग्री सेल्सियस के तापमान वाले इलाके में तीन दशक पहले क्रैश हुए चॉपर को भारतीय सेना के जवानों ने खोज निकाला है. यही नहीं अब इसे दोबारा उड़ान भरने के लिए भी तैयार कर दिया गया है.

इस ध्रुव चॉपर की कहानी शुरू होती है आज से 34 साल पहले, जब सियाचीन में गुस्ताख़ पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना टूट पड़ी थी. जवानों ने दुश्मनों को तो धूल चटा दी पर, इसी दौरान वायु सेना ने अपने इस एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव 203 को खो दिया. बर्फ के इस रेगिस्तान से इसे खोज निकालने में अहम भूमिका 14 कोर के जनरल ऑफिसर कमांड और डायरेक्टर जनरल ऑफ एविएशन ने निभायी.

ऑपरेशन मेघदूत के नाम से लगभग नामुमकिन इस काम को जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में अंजाम दिया. रिपोर्टों से मिली जानकारी के मुताबिक़ इसे जुलाई में खोजा गया था. फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर के जरिये इसके क्रैश होने की वजहों का पता लगाया जाएगा.

रिपोर्टों की माने तो सियाचीन में अब तक करीब चालीस हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुके हैं. इनका अभी तक किसी को कोई सुराग नहीं मिला.