क्या अनुष्का को BCCI सेलेक्टर्स चाय सर्व करते थे?

फारूख इंजीनियर के इन आरोपों पर अनुष्का शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. अनुष्का ने फारूक के आरोपों को झूठा बताया है.
BCCI selectors serve tea to Anushka, क्या अनुष्का को BCCI सेलेक्टर्स चाय सर्व करते थे?

फारूख इंजीनियर इंग्लैंड में रहते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट और खिलाड़ियों पर उनकी नजर बनी रहती है. फारुख इंजीनियर बीसीसीआई के मौजूदा सेलेक्शन कमेटी बिल्कुल संतुष्ट नहीं है. उनकी नजर में सेलेक्शन कमेटी में तजुर्बेकार खिलाड़ी होने चाहिए.

एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में फारूख इंजीनियर ने मौजूदा सेलेक्शन कमेटी पर खूब तंज कसा, उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा इस चयन समिति के पास ऐसी क्या खूबी है, जिसके दम पर ये टीम चुनते हैं. टीम चयन में विराट कोहली ही सबसे अहम भूमिका है, जो अच्छी बात हैं, लेकिन चयन समिति की क्या खासियत है, सभी सेलेक्टर्स ने मिलकर 10-12 टेस्ट मैच खेले होंगे. इन सेलेक्टर्स में से एक को तो मैं पहचान भी नहीं पाया, किसी से पूछा तो उसने बताया कि ये भारतीय टीम के सेलेक्टर हैं, वो सिर्फ अनुष्का शर्मा को चाय का कप देते नजर आ रहे थे. मुझे लगता है कि दिलीप वेंगसरकर जैसे कद के खिलाड़ी को चयन समिति में होना चाहिए.

फारूख इंजीनियर के इन आरोपों पर अनुष्का शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. अनुष्का ने फारूक के आरोपों को झूठा बताया है. अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ट्वीट करते हुए लिखा.

मैं अब तक खुद से जुड़ी अफवाहों पर चुप रही. कुछ लोगों ने मेरे बारे में इतना झूठ कहा कि लोग इसे सच मानने लगे. मुझे इस बात का डर है, लेकिन अब मैं चुप नहीं रहूंगी. पहले मुझे मेरे करियर को लेकर और उसके बाद विराट कोहली के करियर में खराब दौर को लेकर जिम्मेदार बताया गया. मेरे बारे में ये कहा गया कि मैं टीम मीटिंग का हिस्सा रही हूं और सेलेक्शन प्रक्रिया में दखलअंदाजी करती हूं. विराट के साथ विदेशी दौरे पर मेरे जाने पर सवाल उठाए गए. वो भी बिना सच जाने. मैंने हमेशा प्रोटोकॉल का पालन किया. मेरे बारे में गलत अफवाह फैलाई गई कि मेरे विदेशी दौरे और टिकट का खर्चा बोर्ड उठाता है, जबकि मैंने खुद फ्लाइट के टिकट और मैच के टिकट भी अपने पैसे से खरीदे और अब ये कहा जा रहा है कि मुझे वर्ल्ड कप के दौरान सेलेक्टर्स चाय के कप सर्व किया करते थे. मैं सिर्फ वर्ल्ड कप के एक मैच के दौरान रही वो भी खिलाड़ियों के परिवार के साथ. अगर आपको सेलेक्शन कमेटी पर कुछ कहना है तो बेशक कहिए ये आपकी राय है लेकिन मेरा नाम बीच में ना लाया जाए. मैं इसकी इजाजत किसी को नहीं देती.

अब बात उन चयनकर्ताओं की जिनकी योग्यता पर रूख इंजीनियर ने सवाल उठाए हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा चयन समिति के प्रमुख एम एस के प्रसाद हैं. एम एस के प्रसाद आंध्र प्रदेश से विकेट कीपर बल्लेबाज रहे. इन्हें वनडे क्रिकेट के लिए टीम इंडिया में पहली बार 1998 में शामिल किया गया था. बांग्लादेश के खिलाफ करियर की शुरुआत करने वाले एम एस का वन डे करियर एक साल से भी छोटा रहा. 1999 में उन्होंने अपना आखिरी वन डे मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला.

पूरे करियर में एम एस के प्रसाद ने 17 वन डे मैच खेले , जिसमें उन्होंने कुल 131 रन बनाए, जिसमें सिर्फ एक अर्धशतक लगाया और औसत रहा 14.55 का. 4 महीने के टेस्ट क्रिकेट करियर में इन्होंने सिर्फ 6 टेस्ट मैच खेले , जिसमें कुल 106 रन बनाए…औसत 11.77 का रहा और अर्धशतक/शतक एक भी नहीं.

देवांग गुजरात से आते हैं खेले बंगाल से. इनका अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर भी ऐसा नहीं रहा, जिसमें कुछ खास नजर आता हो इनका वनडे और टेस्ट करियर तीन-तीन महीने का रहा. वनडे करियर में कुल 3 मैच खेले, कुल 49 रन बनाए औसत 16.33 का रहा. टेस्ट क्रिकेट में 4 मैच खेलने का मौका मिला कुल 204 रन बनाए. 2 अर्धशतक लगाए, औसत रहा 34 का.

शरणदीप सिंह भी उस चयन समिति के हिस्सा हैं जिन्होंने विश्व कप की टीम चुनी थी. ऑफ स्पिनर रहे शरणदीप सिंह का भी क्रिकेट काफी छोटा रहा. वन डे और टेस्ट मिलकर शरणदीप 10 मैच भी नहीं खेले. शरणदीप ने 3 साल के अंतराष्ट्रीय करियर में 5 वन डे मैच खेले, जिसमें कुल 3 विकेट लिए इकॉनमी रही 4.18 की वहीं टेस्ट में शरणदीप में 3 मैच खेले 10 विकेट लिए ,इकॉनमी रही 3 की.

महाराष्ट्र से आने वाले जतिन परांजपे को तो टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला. परांजपे भी उस चयन समिति का हिस्सा हैं. जो भारतीय क्रिकेट टीम को चुनते हैं. परांजपे ने अपने 5 महीने के अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में कुल 4 वन डे मैच खेले , जिसमें कुल 54 रन बनाए औसत रहा 18 का.

अब बात एक और सेलेक्टर की. उनका नाम गगन खोड़ा. इन्हें भी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला और ये सिर्फ दो वन डे मैच खेलकर सेलेक्टर बन गए. राजस्थान से आने वाले गगन खोड़ा ने सिर्फ 2 वन डे मैच खेले कुल 115 रन बनाए, जिसमें 1 अधर्शतक शामिल है औसत रहा 57.50 का.

1961 से 1975 के बीच भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेलने वाले फारुख इंजीनियर, सौरव गांगुली के बीसीसीआई के अध्यक्ष बनने से काफी खुश हैं. उन्होंने कहा क्रिकेट बोर्ड की कमान तजुर्बेकार क्रिकेटर के हाथों में होनी चाहिए, क्योंकि सीओए ,वक्त और पैसे की बर्बादी है.

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